करें न्याय के लिए अपील

करें न्याय के लिए अपील

The Issue

क्या अपनी ही ज़मीन पर इंसान “अतिक्रमणकारी” बन सकता है?

अगर हाँ…

तो मेरी कहानी सुनिए।

और अगर नहीं…

तो मेरे साथ खड़े हो जाइए।

 

मेरा नाम आनंद है…

मैं बिहार के समस्तीपुर जिला, रोसरा प्रखंड, Dharha गाँव का रहने वाला हूँ।

 

2014 में मेरे दादाजी का निधन हुआ…

और उसी दिन से…

हमारे परिवार की लड़ाई शुरू हो गई।

 

मेरे पिताजी…

बहुत ही सीधे-साधे इंसान हैं…

ना नौकरी… ना कोई बड़ा बिज़नेस…

बस खेती करके हम चार भाई-बहनों को पालते रहे।

 

हमारे लिए ज़मीन…

सिर्फ ज़मीन नहीं है…

हमारी पहचान है…

हमारे दादा की आखिरी निशानी है।

 

हमारे डेरा वाली ज़मीन पर…

हम सिर्फ एक छोटा सा निर्माण करना चाहते थे।

 

लेकिन…

हमें रोक दिया गया।

 

पुलिस बुला ली गई…

काम रुकवा दिया गया…

और हम पर ही धारा 144 लगा दी गई…

 

अपनी ही ज़मीन पर।

 

अब आप खुद सोचिए…

 

अगर एक प्लॉट है…

जिसकी लंबाई 50 है…

और चौड़ाई 50 है…

 

तो उसका एरिया हमेशा 2500 ही होगा।

 

चाहे आप उसे (25 + 25 ) × 50  = 2500 करके निकालो…

या किसी भी तरीके से निकालो…

 

नतीजा हमेशा एक ही रहेगा।

 

तो फिर…

 

हमारी ज़मीन की बार-बार नापी क्यों?

और हर बार एरिया अलग क्यों?

 

क्या ज़मीन बदल रही है…

या नीयत?

 

एक और सवाल…

 

क्या सरकारी ज़मीन किसी की निजी संपत्ति हो सकती है?

 

अगर हो सकती है…

तो उसका कानून क्या है?

 

और अगर नहीं हो सकती…

तो फिर उसे बचाने के लिए

नक्शा क्यों बदला गया?

रिपोर्ट क्यों बदली गई?

 

हम जिला अधिकारी तक गए…

 

आदेश आया कि सही सीमांकन हो।

 

लेकिन…

 

रातों-रात आदेश बदल गया…

और हम ही “अतिक्रमणकारी” बना दिए गए।

 

क्यों?

 

क्योंकि ऊपर बैठा अधिकारी…

नीचे से आई रिपोर्ट पर ही भरोसा करता है।

 

और जब रिपोर्ट ही बदली जाए…

तो सच भी बदल जाता है।

 

24 फरवरी 2024…

 

मेरे पिताजी को घेरकर मारा गया…

उनके सिर पर वार किया गया…

आठ टांके लगे…

 

हमने FIR दर्ज कराई…

 

लेकिन अगले ही दिन…

हम पर ही केस कर दिया गया।

 

12 साल…

 

मानसिक तनाव…

आर्थिक नुकसान…

झूठे केस…

और जान से मारने की कोशिश…

 

और आज भी…

हमें न्याय नहीं मिला।

 

मैं हाथ जोड़कर अपील करता हूँ…

 

इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो।

ज़मीन का डिजिटल सीमांकन हो।

बार-बार की नापी पर नियंत्रण हो।

दोषी लोगों और अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो।

 

अगर आपको लगता है कि ये गलत है…

 

तो इस वीडियो को शेयर करें…

आवाज़ उठाएँ…

ताकि ये मामला हर अधिकारी और मीडिया तक पहुँचे।

 

क्योंकि…

 

आज हमारे साथ हुआ है…

कल किसी और के साथ भी हो सकता है।

 

हमने कभी लड़ना नहीं सीखा था…

लेकिन अब चुप रहना भी नहीं आता।

avatar of the starter
Anand RoyPetition Starter

2

The Issue

क्या अपनी ही ज़मीन पर इंसान “अतिक्रमणकारी” बन सकता है?

अगर हाँ…

तो मेरी कहानी सुनिए।

और अगर नहीं…

तो मेरे साथ खड़े हो जाइए।

 

मेरा नाम आनंद है…

मैं बिहार के समस्तीपुर जिला, रोसरा प्रखंड, Dharha गाँव का रहने वाला हूँ।

 

2014 में मेरे दादाजी का निधन हुआ…

और उसी दिन से…

हमारे परिवार की लड़ाई शुरू हो गई।

 

मेरे पिताजी…

बहुत ही सीधे-साधे इंसान हैं…

ना नौकरी… ना कोई बड़ा बिज़नेस…

बस खेती करके हम चार भाई-बहनों को पालते रहे।

 

हमारे लिए ज़मीन…

सिर्फ ज़मीन नहीं है…

हमारी पहचान है…

हमारे दादा की आखिरी निशानी है।

 

हमारे डेरा वाली ज़मीन पर…

हम सिर्फ एक छोटा सा निर्माण करना चाहते थे।

 

लेकिन…

हमें रोक दिया गया।

 

पुलिस बुला ली गई…

काम रुकवा दिया गया…

और हम पर ही धारा 144 लगा दी गई…

 

अपनी ही ज़मीन पर।

 

अब आप खुद सोचिए…

 

अगर एक प्लॉट है…

जिसकी लंबाई 50 है…

और चौड़ाई 50 है…

 

तो उसका एरिया हमेशा 2500 ही होगा।

 

चाहे आप उसे (25 + 25 ) × 50  = 2500 करके निकालो…

या किसी भी तरीके से निकालो…

 

नतीजा हमेशा एक ही रहेगा।

 

तो फिर…

 

हमारी ज़मीन की बार-बार नापी क्यों?

और हर बार एरिया अलग क्यों?

 

क्या ज़मीन बदल रही है…

या नीयत?

 

एक और सवाल…

 

क्या सरकारी ज़मीन किसी की निजी संपत्ति हो सकती है?

 

अगर हो सकती है…

तो उसका कानून क्या है?

 

और अगर नहीं हो सकती…

तो फिर उसे बचाने के लिए

नक्शा क्यों बदला गया?

रिपोर्ट क्यों बदली गई?

 

हम जिला अधिकारी तक गए…

 

आदेश आया कि सही सीमांकन हो।

 

लेकिन…

 

रातों-रात आदेश बदल गया…

और हम ही “अतिक्रमणकारी” बना दिए गए।

 

क्यों?

 

क्योंकि ऊपर बैठा अधिकारी…

नीचे से आई रिपोर्ट पर ही भरोसा करता है।

 

और जब रिपोर्ट ही बदली जाए…

तो सच भी बदल जाता है।

 

24 फरवरी 2024…

 

मेरे पिताजी को घेरकर मारा गया…

उनके सिर पर वार किया गया…

आठ टांके लगे…

 

हमने FIR दर्ज कराई…

 

लेकिन अगले ही दिन…

हम पर ही केस कर दिया गया।

 

12 साल…

 

मानसिक तनाव…

आर्थिक नुकसान…

झूठे केस…

और जान से मारने की कोशिश…

 

और आज भी…

हमें न्याय नहीं मिला।

 

मैं हाथ जोड़कर अपील करता हूँ…

 

इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो।

ज़मीन का डिजिटल सीमांकन हो।

बार-बार की नापी पर नियंत्रण हो।

दोषी लोगों और अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो।

 

अगर आपको लगता है कि ये गलत है…

 

तो इस वीडियो को शेयर करें…

आवाज़ उठाएँ…

ताकि ये मामला हर अधिकारी और मीडिया तक पहुँचे।

 

क्योंकि…

 

आज हमारे साथ हुआ है…

कल किसी और के साथ भी हो सकता है।

 

हमने कभी लड़ना नहीं सीखा था…

लेकिन अब चुप रहना भी नहीं आता।

avatar of the starter
Anand RoyPetition Starter

The Decision Makers

Joseph R. Biden
Former President of the United States
Donald Trump
President of the United States
Todd Young
U.S. Senate - Indiana

Petition Updates