

भारतीय द्वारा भारतीय भाषा में ही हस्ताक्षर करने का प्रण एवं अभियान।
The Issue
भारतीय द्वारा भारतीय भाषा में ही हस्ताक्षर करने का प्रण एवं अभियान।अपने हस्ताक्षर अपनी भाषा में करें, पूरे विश्व के लोग अपनी भाषा में हस्ताक्षर करते हैं तो भारतीय अंग्रेजी में क्यों करें ? आइये भारतीय भाषाओँ का सम्मान करें। अपनी मातृभाषा में हस्ताक्षर करने से कोई क़ानूनी रोक नहीं है परन्तु हम सभी अपने हस्ताक्षर अंग्रेजी भाषा में करते हैं जो की भारतीय भाषाओँ के सम्मान के विर्रुध है। अपनी मातृभाषा में हस्ताक्षर एक ऐसा कदम है जो आपका प्रथम सम्मान आपके मूल वक्तित्व को देता है अतः अपनी मुलता को सम्मानित करने हेतु सभी को अपने हस्ताक्षर अपनी मातृभाषा में ही करना चाहिए। ऐसा करने से आपको कोई रोक नहीं सकता एवं किसी भी कानून में इसकी मनाही नहीं है। विश्व के सभी अग्रगणी देशो के नागरिक अपने हस्ताक्षर अपनी भाषा में करते हैं। रूस, जापान, कोरिया, चीन , फ्रांस , इटली , अरब देश सभी इसका उदाहरण हैं अतः भारतीय द्वारा अंग्रेजी में हस्ताक्षर करना अपने संस्कृति का सम्मान नहीं करना है।
भारत में २२ भाषाएँ संविधान द्वारा भारतीय भाषाओँ के रूप में निर्धारित की गई हैं जिनमें अंग्रेजी नहीं है परन्तु यह दुःख का विषय है की सभी लोग अपने हस्ताक्षर अंग्रेजी में करके गौरवान्वित होते है जो की मानसिक रूप से अंग्रेजी की गुलामी है।
अपनी मातृभाषा को सम्मान दिलाने का प्रथम प्रयास , अपने हस्ताक्षर अपनी मातृभाषा में करना है , यह कदम आपके वक्तित्व की मूलता को स्थापित करता है अतः हम सभी भारतीय लोगों को अपने हस्ताक्षर अपनी मातृभाषा में ही करना चाहिए अथवा राजभाषा हिंदी में करना चाहिए जो हमारी अस्मिता का प्रतीक है। आइये , हम प्रण करें की हम अपने हस्ताक्षर अपनी मातृभाषा अथवा भारत की राजभाषा हिंदी में ही करेंगे एवं इस अभियान का समर्थन करते हुए इस पेटिशन को अग्रेसित करते रहेंगें।

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भारतीय द्वारा भारतीय भाषा में ही हस्ताक्षर करने का प्रण एवं अभियान।अपने हस्ताक्षर अपनी भाषा में करें, पूरे विश्व के लोग अपनी भाषा में हस्ताक्षर करते हैं तो भारतीय अंग्रेजी में क्यों करें ? आइये भारतीय भाषाओँ का सम्मान करें। अपनी मातृभाषा में हस्ताक्षर करने से कोई क़ानूनी रोक नहीं है परन्तु हम सभी अपने हस्ताक्षर अंग्रेजी भाषा में करते हैं जो की भारतीय भाषाओँ के सम्मान के विर्रुध है। अपनी मातृभाषा में हस्ताक्षर एक ऐसा कदम है जो आपका प्रथम सम्मान आपके मूल वक्तित्व को देता है अतः अपनी मुलता को सम्मानित करने हेतु सभी को अपने हस्ताक्षर अपनी मातृभाषा में ही करना चाहिए। ऐसा करने से आपको कोई रोक नहीं सकता एवं किसी भी कानून में इसकी मनाही नहीं है। विश्व के सभी अग्रगणी देशो के नागरिक अपने हस्ताक्षर अपनी भाषा में करते हैं। रूस, जापान, कोरिया, चीन , फ्रांस , इटली , अरब देश सभी इसका उदाहरण हैं अतः भारतीय द्वारा अंग्रेजी में हस्ताक्षर करना अपने संस्कृति का सम्मान नहीं करना है।
भारत में २२ भाषाएँ संविधान द्वारा भारतीय भाषाओँ के रूप में निर्धारित की गई हैं जिनमें अंग्रेजी नहीं है परन्तु यह दुःख का विषय है की सभी लोग अपने हस्ताक्षर अंग्रेजी में करके गौरवान्वित होते है जो की मानसिक रूप से अंग्रेजी की गुलामी है।
अपनी मातृभाषा को सम्मान दिलाने का प्रथम प्रयास , अपने हस्ताक्षर अपनी मातृभाषा में करना है , यह कदम आपके वक्तित्व की मूलता को स्थापित करता है अतः हम सभी भारतीय लोगों को अपने हस्ताक्षर अपनी मातृभाषा में ही करना चाहिए अथवा राजभाषा हिंदी में करना चाहिए जो हमारी अस्मिता का प्रतीक है। आइये , हम प्रण करें की हम अपने हस्ताक्षर अपनी मातृभाषा अथवा भारत की राजभाषा हिंदी में ही करेंगे एवं इस अभियान का समर्थन करते हुए इस पेटिशन को अग्रेसित करते रहेंगें।

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Petition created on 9 January 2021