Preserve the legacy of Padma shree Dr. Yogesh Praveen.

The Issue

 

सर्वविदित है कि दिनाँक 12 अप्रैल 2021 को कोविड-19 महामारी के दौरान ही अवधी संस्कृति और इतिहास के मर्मज्ञ विद्वान इतिहासकार, अवधविद् पद्मश्री डॉ. योगेश प्रवीन का 83 वर्ष की आयु में त्रासदीपूर्ण निधन हो गया। उनके निधन से देश-प्रदेश में उनके प्रशंसकों, कला-संस्कृतिकर्मियों, लेखकों-कवियों, विद्वतजनों में शोक की लहर है।
डॉ. योगेश प्रवीन लखनऊ की गंगा-जमुनी तहज़ीब, इतिहास, संस्कृति और साहित्य के अद्वितीय और सबसे वरिष्ठ विद्वान थे और आजीवन इन्हें अपनी लेखकीय प्रतिभा से सहेजते रहे। वे इन अनुशासनों के इतने निपुण जानकार थे कि उन्हें लखनऊ के इतिहास और संस्कृति का पर्याय माना जाने लगा था। जनता द्वारा उन्हें अवधी इतिहास के जीवित विश्वकोश की उपाधि दी गयी थी। उन्होंने अपने लेखन की कठिन साधना से इन नाना विषयों को न केवल साधा अपितु आने वाली पीढ़ियों को भी यह अनमोल धरोहर सौंपते रहे।
अपने अंत समय तक वे पढ़ते-पढ़ाते और लिखते रहे। अनेक पुस्तकों के लेखक, कुशल वक्ता, अध्यापक और सत्साहित्यिक योगेश प्रवीन जी आजीवन अविवाहित रहे और लखनऊ शहर से प्रेम करते रहे। लखनऊ शहर से उनके प्रेम और उनके लेखकीय, साहित्यिक अवदान की जितनी भी व्याख्याएँ की जायें, संक्षिप्त होंगी।
नगर लखनऊ की पूरी जनता सदा उनका हृदय से आदर और सम्मान करती रही है। इस अदब और सम्मान को बनाये रखने के लिए उनके शिष्यों, प्रियजनों, लेखकों, पत्रकारों, प्रशंसकों, बुद्धिजीवियों और लखनऊ वासियों की कुछ माँगे हैं जो योगेश प्रवीन जी की स्मृति को लखनऊ में जीवित रखने और उनकी विरासत को आगे बढ़ाने की सद्भावना से प्रेरित हैं। उनकी ज्ञान-परम्परा को अक्षुण्ण रखने और उनकी पुण्य-स्मृति को बनाये रखने हेतु हम उत्तर-प्रदेश शासन से निवेदन और अनुशंसा करते हैं कि :

1- उनके पैतृक निवास 'पंचवटी' ग़ौसनगर, लखनऊ-18 में डॉ. योगेश प्रवीन स्मारक और संग्रहालय निर्मित किया जाय। (यह उनकी अंतिम इच्छा थी।)

2- रकाबगंज चौराहे का नाम डॉ. योगेश प्रवीन चौराहा हो और इस स्थान पर उनकी प्रतिमा स्थापित की जाय।

3- राज्य अभिलेखागार अथवा राज्य संग्रहालय का नाम उनके नाम पर किया जाय।

4- संस्कृति विभाग और हिंदी संस्थान उनके नाम पर पुरस्कार घोषित करें, जो विशेषत: लखनऊ के इतिहास और अवधी संस्कृति पर आधारित विशिष्ट कार्य करने वाले लेखकों, संस्कृतिकर्मियों को प्रत्येक वर्ष प्रदान किये जायें।

5- उत्तर प्रदेश पर्यटन भवन के ऑडिटोरियम का नाम डॉ. योगेश प्रवीन प्रेक्षागृह हो।

6- लखनऊ विश्वविद्यालय में उनके नाम पर पदक और अध्येतावृत्ति घोषित हो।

7- उनके नाम पर डाक टिकट ज़ारी हो।

8- चौक से हैदरगंज तक जो नया पुल बन रहा है, उसका नाम डॉ. योगेश प्रवीन ऊपरिगामी सेतु (फ्लाईओवर) किया जाय।

9- लखनऊ की किसी एक सड़क का नाम उनके नाम पर हो।

10- लखनऊ महोत्सव में आयोजित होने वाले युवा महोत्सव का नाम 'डॉ. योगेश प्रवीन युवा महोत्सव' रखा जाय।

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सर्वविदित है कि दिनाँक 12 अप्रैल 2021 को कोविड-19 महामारी के दौरान ही अवधी संस्कृति और इतिहास के मर्मज्ञ विद्वान इतिहासकार, अवधविद् पद्मश्री डॉ. योगेश प्रवीन का 83 वर्ष की आयु में त्रासदीपूर्ण निधन हो गया। उनके निधन से देश-प्रदेश में उनके प्रशंसकों, कला-संस्कृतिकर्मियों, लेखकों-कवियों, विद्वतजनों में शोक की लहर है।
डॉ. योगेश प्रवीन लखनऊ की गंगा-जमुनी तहज़ीब, इतिहास, संस्कृति और साहित्य के अद्वितीय और सबसे वरिष्ठ विद्वान थे और आजीवन इन्हें अपनी लेखकीय प्रतिभा से सहेजते रहे। वे इन अनुशासनों के इतने निपुण जानकार थे कि उन्हें लखनऊ के इतिहास और संस्कृति का पर्याय माना जाने लगा था। जनता द्वारा उन्हें अवधी इतिहास के जीवित विश्वकोश की उपाधि दी गयी थी। उन्होंने अपने लेखन की कठिन साधना से इन नाना विषयों को न केवल साधा अपितु आने वाली पीढ़ियों को भी यह अनमोल धरोहर सौंपते रहे।
अपने अंत समय तक वे पढ़ते-पढ़ाते और लिखते रहे। अनेक पुस्तकों के लेखक, कुशल वक्ता, अध्यापक और सत्साहित्यिक योगेश प्रवीन जी आजीवन अविवाहित रहे और लखनऊ शहर से प्रेम करते रहे। लखनऊ शहर से उनके प्रेम और उनके लेखकीय, साहित्यिक अवदान की जितनी भी व्याख्याएँ की जायें, संक्षिप्त होंगी।
नगर लखनऊ की पूरी जनता सदा उनका हृदय से आदर और सम्मान करती रही है। इस अदब और सम्मान को बनाये रखने के लिए उनके शिष्यों, प्रियजनों, लेखकों, पत्रकारों, प्रशंसकों, बुद्धिजीवियों और लखनऊ वासियों की कुछ माँगे हैं जो योगेश प्रवीन जी की स्मृति को लखनऊ में जीवित रखने और उनकी विरासत को आगे बढ़ाने की सद्भावना से प्रेरित हैं। उनकी ज्ञान-परम्परा को अक्षुण्ण रखने और उनकी पुण्य-स्मृति को बनाये रखने हेतु हम उत्तर-प्रदेश शासन से निवेदन और अनुशंसा करते हैं कि :

1- उनके पैतृक निवास 'पंचवटी' ग़ौसनगर, लखनऊ-18 में डॉ. योगेश प्रवीन स्मारक और संग्रहालय निर्मित किया जाय। (यह उनकी अंतिम इच्छा थी।)

2- रकाबगंज चौराहे का नाम डॉ. योगेश प्रवीन चौराहा हो और इस स्थान पर उनकी प्रतिमा स्थापित की जाय।

3- राज्य अभिलेखागार अथवा राज्य संग्रहालय का नाम उनके नाम पर किया जाय।

4- संस्कृति विभाग और हिंदी संस्थान उनके नाम पर पुरस्कार घोषित करें, जो विशेषत: लखनऊ के इतिहास और अवधी संस्कृति पर आधारित विशिष्ट कार्य करने वाले लेखकों, संस्कृतिकर्मियों को प्रत्येक वर्ष प्रदान किये जायें।

5- उत्तर प्रदेश पर्यटन भवन के ऑडिटोरियम का नाम डॉ. योगेश प्रवीन प्रेक्षागृह हो।

6- लखनऊ विश्वविद्यालय में उनके नाम पर पदक और अध्येतावृत्ति घोषित हो।

7- उनके नाम पर डाक टिकट ज़ारी हो।

8- चौक से हैदरगंज तक जो नया पुल बन रहा है, उसका नाम डॉ. योगेश प्रवीन ऊपरिगामी सेतु (फ्लाईओवर) किया जाय।

9- लखनऊ की किसी एक सड़क का नाम उनके नाम पर हो।

10- लखनऊ महोत्सव में आयोजित होने वाले युवा महोत्सव का नाम 'डॉ. योगेश प्रवीन युवा महोत्सव' रखा जाय।

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Petition created on 15 April 2021