

बोरिस कागरलिट्स्की और अन्य सभी रूसी युद्ध-विरोधी राजनीतिक कैदियों को मुक्त करो !


बोरिस कागरलिट्स्की और अन्य सभी रूसी युद्ध-विरोधी राजनीतिक कैदियों को मुक्त करो !
The Issue
اللغة العربية 中文 (Chinese) Čeština Dansk Deutsch Ελληνικά English Español Français Italiano Nederlands Norsk Polski Português Русский Srpski Sverige Українська
यह अपील यहाँ भी उपलब्ध है https://freeboris.info/ उसपर अपने हस्ताक्षर कर अपना समर्थन ज़ाहिर करें।
हम सभी को गहरा सदमा और दु:ख हुआ जब अपेक्षा के विपरीत 13 फरवरी को प्रख्यात रूसी समाजवादी बुद्धिजीवी और युद्ध-विरोधी कार्यकर्ता डॉ. बोरिस कागरलिट्स्की (65) को पांच साल जेल की सजा सुनाई गई।
डॉ कागरलिट्स्की को पिछले साल जुलाई में 'आतंकवाद को उचित ठहराने' के बेतुके आरोप में गिरफ्तार किया गया था। पूंजीवाद और साम्राज्यवाद के एक लेखक और आलोचक के रूप में उनकी विश्वव्यापी प्रतिष्ठा को प्रतिबिंबित करने वाले एक वैश्विक अभियान के बाद, उनका मुकदमा 12 दिसंबर को दोषी करार देने और 609,000 रूबल (अमेरिकी 6550 डॉलर) के जुर्माने के साथ समाप्त हुआ।
इसके बाद अभियोजन पक्ष ने जुर्माने को 'अत्यधिक उदारता के कारण अन्यायपूर्ण' बताते हुए ना सिर्फ़ इसके खिलाफ अपील किया बल्कि झूठा दावा किया कि डॉ. कागरलिट्स्की जुर्माना देने में असमर्थ रहे और अदालत के साथ सहयोग करने में विफल रहे थे। हालाँकि वास्तविकता में उन्होंने पूरा जुर्माना अदा कर दिया था और अदालत को वह सब कुछ उपलब्ध कराया था जो उनसे माँगा गया था।
इन सबके वावजूद 13 फरवरी को एक सैन्य अपील अदालत ने उन्हें पांच साल के लिए जेल भेज दिया और रिहाई के बाद दो साल तक के लिए कोई भी वेबसाइट चलाने पर प्रतिबंध लगा दिया।
मूल अदालत के फैसले को पलटना दुनिया भर के उन हजारों कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों और कलाकारों का जानबूझकर किया गया अपमान है जो डॉ. कागरलिट्स्की का सम्मान करते हैं और उनकी रिहाई के लिए वैश्विक अभियान में शामिल हुए। डॉ कागरलिट्स्की के खिलाफ इस्तेमाल की गई रूसी कानून की धारा प्रभावी रूप से स्वतंत्र अभिव्यक्ति पर रोक लगाती है। उनके जुर्माने को कारावास में बदलने का निर्णय पूरी तरह से मनगढ़ंत बहाने के तहत किया गया था। निस्संदेह, अदालत की कार्रवाई रुस-यूक्रेन युद्ध की किसी भी आलोचना को चुप कराने का एक प्रयास ही है, इसके तहत पूरे देश को एक जेल में बदला जा रहा है ताकि कोई भी विरोध के स्वर नहीं उठें।
रूस में वामपंथी आंदोलनों के खिलाफ क्रूर दमन की लहर में निश्चय ही डॉ. कागरलिट्स्की का दिखावटी मुकदमा और कारावास नवीनतम अध्याय है। जिन संगठनों ने लगातार पश्चिमी और अन्य सभी साम्राज्यवादी शक्तियों की हमेशा आलोचना की है, उन पर अब सीधे हमले हो रहे हैं। उनमें से कई पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। दर्जनों कार्यकर्ता पहले से ही लंबी सजा काट रहे हैं क्योंकि वे रूसी सरकार की नीतियों से असहमत हैं और बोलने का साहस रखते हैं। उनमें से कई को रूसी दंड उपनिवेशों में यातना दी जा रही है जहां जीवन-घातक स्थितियों का सामना कर रहे हैं और किसी भी बुनियादी चिकित्सा और न्याय सम्मत व्यस्था से वंचित हैं। वामपंथी राजनेता और राजनैतिक विरोधी सभी आपराधिक आरोपों का सामना करते हुए रूस से भागने को मजबूर हैं। इंडस्ट्रीयल और इंटरनेशनल ट्रांसपोर्ट फेडरेशन जैसे अंतर्राष्ट्रीय ट्रेड यूनियनों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है और उनके साथ किसी भी संपर्क के परिणामस्वरूप लंबी जेल की सजा होगी, जैसे प्रावधान आज लागू हैं।
रूसी वामपंथ पर इस कड़ी कार्रवाई के बेहद स्पष्ट कारण है। यूक्रेन युद्ध में हो रही भारी क्षति से मेहनतकश जनता के बीच असंतोष लगातार बढ़ रहा है। गरीब आम जनता इस नरसंहार की कीमत अपने जीवन और खुशहाली से चुका रही है, और इस कारण युद्ध का लगातार विरोध गरीबों में सबसे ज्यादा है। वामपंथ के पास साम्राज्यवादी युद्ध और मानवीय पीड़ा के बीच संबंध को उजागर करने का संदेश और संकल्प है और इसलिए सरकार उनके ख़िलाफ़ है।
डॉ कागरलिट्स्की ने अदालत के अपमानजनक फैसले पर शांति और गरिमा के साथ प्रतिक्रिया दी है, उन्होंने इतने सबके बाद सिर्फ़ यही कहा की, 'हमें बस थोड़ा और लंबा जीना है, और इस अंधेर काल को झेल जाना है अपने देश की ख़ातिर। रूस आज एक आमूल-चूल परिवर्तन और उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है, और इस लिये ज़रूरी है की डॉ कागरलिट्स्की और अन्य कार्यकर्ताओं की रिहाई हो ताकि यह दाऊर कामयाबी की और बढ़ सके।
हम मांग करते हैं कि बोरिस कागरलिट्स्की और अन्य सभी युद्ध-विरोधी कैदियों को तुरंत और बिना शर्त रिहा किया जाए।
हम रूसी संघ के अधिकारियों से अपील करते हैं की असहमति के ख़िलाफ़ बढ़ते दमन को रोकें और अपने नागरिकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और विरोध करने के अधिकार का सम्मान करें।
फोटो: इमागो-टीएएसएस
अग्रणी हस्ताक्षरकर्ता (संक्षिप्त सूची-पूरी सूची यहां उपलब्ध है)
नाओमी क्लेन, लेखिका (कनाडा)
जेरेमी कॉर्बिन सांसद (यूके)
जीन-ल्यूक मेलेनचोन, राजनीतिक नेता (फ्रांस)
स्लावोज ज़िज़ेक, बिर्कबेक और ज़ुब्लज़ाना विश्वविद्यालय (स्लोवेनिया)
तारिक अली, लेखक (यूके)
यानिस वरौफ़ाकिस, लेखक और राजनीतिक नेता (ग्रीस)
जूडी रेबिक, नारीवादी लेखिका और कार्यकर्ता (कनाडा)
मिखाइल लोबानोव, राजनीतिज्ञ और ट्रेड यूनियन कार्यकर्ता (रूस)
मरियम ब्रेगमैन, राष्ट्रीय उप (अर्जेंटीना)
निकोलस डेल कानो, राष्ट्रीय उप (अर्जेंटीना)
क्रिश्चियन कैस्टिलो, राष्ट्रीय उप (अर्जेंटीना)
एलेजांद्रो विल्का, राष्ट्रीय उप (अर्जेंटीना)
फर्नांडा मेलचिओना, संघीय उप (ब्राजील)
सैमिया बोम्फिम, संघीय उप (ब्राजील)
वाल्डेन बेलो, फोकस ऑन द ग्लोबल साउथ (फिलीपींस)
लुसियाना जेनरो, राज्य उप, रियो ग्रांडे डो सुल (ब्राजील)
कविता कृष्णन, महिला अधिकार कार्यकर्ता (भारत)
पियोत्र ओस्ट्रोव्स्की, ऑल-पोलैंड एलायंस ऑफ ट्रेड यूनियंस (पोलैंड) के अध्यक्ष
बर्नड रीएक्सिंगर, बुंडेस्टाग (जर्मनी) के सदस्य।
जेनाइन विस्लर, बुंडेस्टाग (जर्मनी) के सदस्य।
ग्रेगोर गिसी, बुंडेस्टाग (जर्मनी) के सदस्य।
डाइटमार बार्टश, बुंडेस्टाग (जर्मनी) के सदस्य।
मार्टिन शिर्डेवान, यूरोपीय संसद के सदस्य (जर्मनी)।
रिचर्ड बॉयड-बैरेट, टीडी (आयरलैंड)।
गेब्रियल नादेउ-डुबॉइस, संसदीय नेता, क्यूबेक सोलिडेयर (कनाडा)
जॉन मैकडॉनेल सांसद (यूके)
फ्रेड्रिक जेमिसन, ड्यूक यूनिवर्सिटी (यूएसए)
एटिने बालिबार, यूनिवर्सिटी पेरिस-नैनटेरे (फ्रांस)
लिन चुन, लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (यूके/चीन)
कोहेई सैतो, टोक्यो विश्वविद्यालय (जापान)
क्लाउडियो काट्ज़, ब्यूनस आयर्स विश्वविद्यालय (अर्जेंटीना)
लुइस बोनिला-मोलिना, ओट्रास वोसेस एन एडुकेशियन (वेनेजुएला)
रेनाल्डो इटुरिज़ा लोपेज़, समाजशास्त्री (वेनेजुएला)
पैट्रिक बॉन्ड (जोहान्सबर्ग विश्वविद्यालय)
लिंडसे जर्मन, युद्ध गठबंधन बंद करो (यूके)
एलेक्स कैलिनिकोस, किंग्स कॉलेज लंदन (यूके)
आंद्रेज हंको, बुंडेस्टाग के सदस्य (जर्मनी)
जोड़ी डीन, होबार्ट-विलियम स्मिथ (यूएसए)

The Issue
اللغة العربية 中文 (Chinese) Čeština Dansk Deutsch Ελληνικά English Español Français Italiano Nederlands Norsk Polski Português Русский Srpski Sverige Українська
यह अपील यहाँ भी उपलब्ध है https://freeboris.info/ उसपर अपने हस्ताक्षर कर अपना समर्थन ज़ाहिर करें।
हम सभी को गहरा सदमा और दु:ख हुआ जब अपेक्षा के विपरीत 13 फरवरी को प्रख्यात रूसी समाजवादी बुद्धिजीवी और युद्ध-विरोधी कार्यकर्ता डॉ. बोरिस कागरलिट्स्की (65) को पांच साल जेल की सजा सुनाई गई।
डॉ कागरलिट्स्की को पिछले साल जुलाई में 'आतंकवाद को उचित ठहराने' के बेतुके आरोप में गिरफ्तार किया गया था। पूंजीवाद और साम्राज्यवाद के एक लेखक और आलोचक के रूप में उनकी विश्वव्यापी प्रतिष्ठा को प्रतिबिंबित करने वाले एक वैश्विक अभियान के बाद, उनका मुकदमा 12 दिसंबर को दोषी करार देने और 609,000 रूबल (अमेरिकी 6550 डॉलर) के जुर्माने के साथ समाप्त हुआ।
इसके बाद अभियोजन पक्ष ने जुर्माने को 'अत्यधिक उदारता के कारण अन्यायपूर्ण' बताते हुए ना सिर्फ़ इसके खिलाफ अपील किया बल्कि झूठा दावा किया कि डॉ. कागरलिट्स्की जुर्माना देने में असमर्थ रहे और अदालत के साथ सहयोग करने में विफल रहे थे। हालाँकि वास्तविकता में उन्होंने पूरा जुर्माना अदा कर दिया था और अदालत को वह सब कुछ उपलब्ध कराया था जो उनसे माँगा गया था।
इन सबके वावजूद 13 फरवरी को एक सैन्य अपील अदालत ने उन्हें पांच साल के लिए जेल भेज दिया और रिहाई के बाद दो साल तक के लिए कोई भी वेबसाइट चलाने पर प्रतिबंध लगा दिया।
मूल अदालत के फैसले को पलटना दुनिया भर के उन हजारों कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों और कलाकारों का जानबूझकर किया गया अपमान है जो डॉ. कागरलिट्स्की का सम्मान करते हैं और उनकी रिहाई के लिए वैश्विक अभियान में शामिल हुए। डॉ कागरलिट्स्की के खिलाफ इस्तेमाल की गई रूसी कानून की धारा प्रभावी रूप से स्वतंत्र अभिव्यक्ति पर रोक लगाती है। उनके जुर्माने को कारावास में बदलने का निर्णय पूरी तरह से मनगढ़ंत बहाने के तहत किया गया था। निस्संदेह, अदालत की कार्रवाई रुस-यूक्रेन युद्ध की किसी भी आलोचना को चुप कराने का एक प्रयास ही है, इसके तहत पूरे देश को एक जेल में बदला जा रहा है ताकि कोई भी विरोध के स्वर नहीं उठें।
रूस में वामपंथी आंदोलनों के खिलाफ क्रूर दमन की लहर में निश्चय ही डॉ. कागरलिट्स्की का दिखावटी मुकदमा और कारावास नवीनतम अध्याय है। जिन संगठनों ने लगातार पश्चिमी और अन्य सभी साम्राज्यवादी शक्तियों की हमेशा आलोचना की है, उन पर अब सीधे हमले हो रहे हैं। उनमें से कई पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। दर्जनों कार्यकर्ता पहले से ही लंबी सजा काट रहे हैं क्योंकि वे रूसी सरकार की नीतियों से असहमत हैं और बोलने का साहस रखते हैं। उनमें से कई को रूसी दंड उपनिवेशों में यातना दी जा रही है जहां जीवन-घातक स्थितियों का सामना कर रहे हैं और किसी भी बुनियादी चिकित्सा और न्याय सम्मत व्यस्था से वंचित हैं। वामपंथी राजनेता और राजनैतिक विरोधी सभी आपराधिक आरोपों का सामना करते हुए रूस से भागने को मजबूर हैं। इंडस्ट्रीयल और इंटरनेशनल ट्रांसपोर्ट फेडरेशन जैसे अंतर्राष्ट्रीय ट्रेड यूनियनों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है और उनके साथ किसी भी संपर्क के परिणामस्वरूप लंबी जेल की सजा होगी, जैसे प्रावधान आज लागू हैं।
रूसी वामपंथ पर इस कड़ी कार्रवाई के बेहद स्पष्ट कारण है। यूक्रेन युद्ध में हो रही भारी क्षति से मेहनतकश जनता के बीच असंतोष लगातार बढ़ रहा है। गरीब आम जनता इस नरसंहार की कीमत अपने जीवन और खुशहाली से चुका रही है, और इस कारण युद्ध का लगातार विरोध गरीबों में सबसे ज्यादा है। वामपंथ के पास साम्राज्यवादी युद्ध और मानवीय पीड़ा के बीच संबंध को उजागर करने का संदेश और संकल्प है और इसलिए सरकार उनके ख़िलाफ़ है।
डॉ कागरलिट्स्की ने अदालत के अपमानजनक फैसले पर शांति और गरिमा के साथ प्रतिक्रिया दी है, उन्होंने इतने सबके बाद सिर्फ़ यही कहा की, 'हमें बस थोड़ा और लंबा जीना है, और इस अंधेर काल को झेल जाना है अपने देश की ख़ातिर। रूस आज एक आमूल-चूल परिवर्तन और उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है, और इस लिये ज़रूरी है की डॉ कागरलिट्स्की और अन्य कार्यकर्ताओं की रिहाई हो ताकि यह दाऊर कामयाबी की और बढ़ सके।
हम मांग करते हैं कि बोरिस कागरलिट्स्की और अन्य सभी युद्ध-विरोधी कैदियों को तुरंत और बिना शर्त रिहा किया जाए।
हम रूसी संघ के अधिकारियों से अपील करते हैं की असहमति के ख़िलाफ़ बढ़ते दमन को रोकें और अपने नागरिकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और विरोध करने के अधिकार का सम्मान करें।
फोटो: इमागो-टीएएसएस
अग्रणी हस्ताक्षरकर्ता (संक्षिप्त सूची-पूरी सूची यहां उपलब्ध है)
नाओमी क्लेन, लेखिका (कनाडा)
जेरेमी कॉर्बिन सांसद (यूके)
जीन-ल्यूक मेलेनचोन, राजनीतिक नेता (फ्रांस)
स्लावोज ज़िज़ेक, बिर्कबेक और ज़ुब्लज़ाना विश्वविद्यालय (स्लोवेनिया)
तारिक अली, लेखक (यूके)
यानिस वरौफ़ाकिस, लेखक और राजनीतिक नेता (ग्रीस)
जूडी रेबिक, नारीवादी लेखिका और कार्यकर्ता (कनाडा)
मिखाइल लोबानोव, राजनीतिज्ञ और ट्रेड यूनियन कार्यकर्ता (रूस)
मरियम ब्रेगमैन, राष्ट्रीय उप (अर्जेंटीना)
निकोलस डेल कानो, राष्ट्रीय उप (अर्जेंटीना)
क्रिश्चियन कैस्टिलो, राष्ट्रीय उप (अर्जेंटीना)
एलेजांद्रो विल्का, राष्ट्रीय उप (अर्जेंटीना)
फर्नांडा मेलचिओना, संघीय उप (ब्राजील)
सैमिया बोम्फिम, संघीय उप (ब्राजील)
वाल्डेन बेलो, फोकस ऑन द ग्लोबल साउथ (फिलीपींस)
लुसियाना जेनरो, राज्य उप, रियो ग्रांडे डो सुल (ब्राजील)
कविता कृष्णन, महिला अधिकार कार्यकर्ता (भारत)
पियोत्र ओस्ट्रोव्स्की, ऑल-पोलैंड एलायंस ऑफ ट्रेड यूनियंस (पोलैंड) के अध्यक्ष
बर्नड रीएक्सिंगर, बुंडेस्टाग (जर्मनी) के सदस्य।
जेनाइन विस्लर, बुंडेस्टाग (जर्मनी) के सदस्य।
ग्रेगोर गिसी, बुंडेस्टाग (जर्मनी) के सदस्य।
डाइटमार बार्टश, बुंडेस्टाग (जर्मनी) के सदस्य।
मार्टिन शिर्डेवान, यूरोपीय संसद के सदस्य (जर्मनी)।
रिचर्ड बॉयड-बैरेट, टीडी (आयरलैंड)।
गेब्रियल नादेउ-डुबॉइस, संसदीय नेता, क्यूबेक सोलिडेयर (कनाडा)
जॉन मैकडॉनेल सांसद (यूके)
फ्रेड्रिक जेमिसन, ड्यूक यूनिवर्सिटी (यूएसए)
एटिने बालिबार, यूनिवर्सिटी पेरिस-नैनटेरे (फ्रांस)
लिन चुन, लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (यूके/चीन)
कोहेई सैतो, टोक्यो विश्वविद्यालय (जापान)
क्लाउडियो काट्ज़, ब्यूनस आयर्स विश्वविद्यालय (अर्जेंटीना)
लुइस बोनिला-मोलिना, ओट्रास वोसेस एन एडुकेशियन (वेनेजुएला)
रेनाल्डो इटुरिज़ा लोपेज़, समाजशास्त्री (वेनेजुएला)
पैट्रिक बॉन्ड (जोहान्सबर्ग विश्वविद्यालय)
लिंडसे जर्मन, युद्ध गठबंधन बंद करो (यूके)
एलेक्स कैलिनिकोस, किंग्स कॉलेज लंदन (यूके)
आंद्रेज हंको, बुंडेस्टाग के सदस्य (जर्मनी)
जोड़ी डीन, होबार्ट-विलियम स्मिथ (यूएसए)

Petition Closed
Share this petition
Petition Updates
Share this petition
Petition created on 19 March 2024