

शिवशंकर गौशाला समिति, उदयपुर द्वारा गौमाता को 'राष्ट्र माता' घोषित करने की अपील"
The Issue
हम, भारत के नागरिक, विनम्रतापूर्वक यह आग्रह करते हैं कि "गौमाता" को "राष्ट्र माता" का दर्जा दिया जाए और इस विषय में एक प्रस्ताव संसद भवन में पारित किया जाए। भारत की प्राचीन संस्कृति और परंपराओं में गौमाता का स्थान अत्यंत पूजनीय और महत्वपूर्ण रहा है। गाय भारतीय कृषि, पर्यावरण, अर्थव्यवस्था, और समाज के कल्याण में अनगिनत योगदान देती है।
हमारे अनुरोध के प्रमुख कारण:
1. सांस्कृतिक महत्व: गौमाता को भारतीय संस्कृति और धर्म में माता का स्थान दिया गया है। वे अनेक धर्मग्रंथों और शास्त्रों में विशेष रूप से वर्णित हैं और उनकी पूजा-अर्चना हमारी परंपराओं का हिस्सा है।
2. पर्यावरणीय योगदान: गायों के गोबर और मूत्र से बनने वाले जैविक उर्वरक और कीटनाशक न केवल हमारी मिट्टी की उर्वरता बढ़ाते हैं बल्कि पर्यावरणीय स्थिरता को भी बनाए रखते हैं।
3. अर्थव्यवस्था में योगदान: भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा पशुधन, विशेष रूप से गायों, पर आधारित है। डेयरी उद्योग और गौ आधारित व्यवसाय लाखों लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं।
4. सामाजिक समरसता: गौमाता को राष्ट्र माता का दर्जा देने से समाज में एकता और आपसी सौहार्द बढ़ेगा, क्योंकि यह हमारे सभी धर्मों और समुदायों में समान रूप से आदरणीय हैं।
5. गौ-संरक्षण: गौमाता को राष्ट्र माता का दर्जा देने से उनका संरक्षण और देखभाल सुनिश्चित होगी, जिससे उनका कल्याण और सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।
अतः हम विनम्र निवेदन करते हैं कि "गौमाता" को "राष्ट्र माता" को राष्ट्रीय सम्मान प्रदान करने हेतु भारतीय संसद में इसका प्रस्ताव पारित किया जाए, ताकि यह हमारे देश की सांस्कृतिक धरोहर, पर्यावरणीय संरक्षण और सामाजिक एकता के प्रतीक के रूप में स्थापित हो सके।
निवेदक : शिवशंकर गौशाला समिति
पाराखेत, कलड़वास , उदयपुर (राज. )

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The Issue
हम, भारत के नागरिक, विनम्रतापूर्वक यह आग्रह करते हैं कि "गौमाता" को "राष्ट्र माता" का दर्जा दिया जाए और इस विषय में एक प्रस्ताव संसद भवन में पारित किया जाए। भारत की प्राचीन संस्कृति और परंपराओं में गौमाता का स्थान अत्यंत पूजनीय और महत्वपूर्ण रहा है। गाय भारतीय कृषि, पर्यावरण, अर्थव्यवस्था, और समाज के कल्याण में अनगिनत योगदान देती है।
हमारे अनुरोध के प्रमुख कारण:
1. सांस्कृतिक महत्व: गौमाता को भारतीय संस्कृति और धर्म में माता का स्थान दिया गया है। वे अनेक धर्मग्रंथों और शास्त्रों में विशेष रूप से वर्णित हैं और उनकी पूजा-अर्चना हमारी परंपराओं का हिस्सा है।
2. पर्यावरणीय योगदान: गायों के गोबर और मूत्र से बनने वाले जैविक उर्वरक और कीटनाशक न केवल हमारी मिट्टी की उर्वरता बढ़ाते हैं बल्कि पर्यावरणीय स्थिरता को भी बनाए रखते हैं।
3. अर्थव्यवस्था में योगदान: भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा पशुधन, विशेष रूप से गायों, पर आधारित है। डेयरी उद्योग और गौ आधारित व्यवसाय लाखों लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं।
4. सामाजिक समरसता: गौमाता को राष्ट्र माता का दर्जा देने से समाज में एकता और आपसी सौहार्द बढ़ेगा, क्योंकि यह हमारे सभी धर्मों और समुदायों में समान रूप से आदरणीय हैं।
5. गौ-संरक्षण: गौमाता को राष्ट्र माता का दर्जा देने से उनका संरक्षण और देखभाल सुनिश्चित होगी, जिससे उनका कल्याण और सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।
अतः हम विनम्र निवेदन करते हैं कि "गौमाता" को "राष्ट्र माता" को राष्ट्रीय सम्मान प्रदान करने हेतु भारतीय संसद में इसका प्रस्ताव पारित किया जाए, ताकि यह हमारे देश की सांस्कृतिक धरोहर, पर्यावरणीय संरक्षण और सामाजिक एकता के प्रतीक के रूप में स्थापित हो सके।
निवेदक : शिवशंकर गौशाला समिति
पाराखेत, कलड़वास , उदयपुर (राज. )

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Petition created on 19 November 2024