नगर पंचायत सभासदों के लिए वित्तीय अधिकार और मानदेय दो

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The Issue

माननीय मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार, नगर विकास मंत्री एवं संबंधित अधिकारीगण,

हम, उत्तर प्रदेश के नगर पंचायतों के सभासद, इस याचिका के माध्यम से एक महत्वपूर्ण मांग उठा रहे हैं। वर्तमान में नगर पंचायतों में निर्वाचित सभासदों की भूमिका केवल हस्ताक्षर करने तक सीमित रह गई है। उन्हें किसी भी प्रकार के वित्तीय अधिकार नहीं दिए जाते, जिससे वे अपने वार्ड के विकास कार्यों में स्वतंत्र रूप से निर्णय नहीं ले सकते। इसके अलावा, सभासदों को किसी प्रकार का मानदेय (वेतन या भत्ता) भी नहीं दिया जाता, जिससे वे जनहित के कार्यों में आर्थिक रूप से कठिनाइयों का सामना करते हैं।

हमारी मुख्य मांगें:

1️⃣ सभासदों को मानदेय दिया जाए – अन्य जनप्रतिनिधियों (जैसे नगर पंचायत अध्यक्ष, विधायक और सांसद) की तरह सभासदों को भी सम्मानजनक मानदेय मिलना चाहिए, ताकि वे अपना समय और संसाधन वार्ड के विकास में लगा सकें।
2️⃣ वित्तीय अधिकार दिए जाएं – सभासदों को अपने वार्ड में होने वाले कार्यों के लिए बजट आवंटन में भागीदारी मिले और वे यह तय कर सकें कि विकास कार्यों के लिए धनराशि कहाँ खर्च की जाए।
3️⃣ सभासदों की भागीदारी को मजबूत किया जाए – नगर पंचायत के प्रशासनिक और विकास कार्यों में सभासदों की राय को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए।
4️⃣ नगर पंचायत में पारदर्शिता लाई जाए – हर वार्ड में किए जाने वाले खर्च का विवरण सभासदों को दिया जाए, ताकि वे अपने क्षेत्र की जनता को जानकारी दे सकें और किसी भी प्रकार की अनियमितता पर सवाल उठा सकें।

सभासदों की मौजूदा स्थिति

आज नगर पंचायत में सभासदों को केवल हस्ताक्षर करने तक सीमित कर दिया गया है।

बिना वित्तीय अधिकार और पारदर्शिता के, वे अपने ही वार्ड के विकास कार्यों में प्रभावी भूमिका नहीं निभा सकते।

बिना मानदेय के, कई सभासद अपने निजी खर्च पर वार्ड के नागरिकों की मदद करने की कोशिश करते हैं, जिससे वे आर्थिक रूप से कमजोर हो जाते हैं।


हम यह बदलाव क्यों चाहते हैं?

✅ जब नगर पंचायत अध्यक्ष, विधायक और सांसद को मानदेय व अन्य सुविधाएँ मिलती हैं, तो सभासदों को क्यों नहीं?
✅ जब पंचायत के अध्यक्ष व ग्राम पंचायत के प्रधानों को वित्तीय अधिकार दिए जाते हैं, तो नगर पंचायत सभासद को क्यों नहीं?
✅ अगर सभासदों को वित्तीय निर्णयों में भागीदारी मिले, तो भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी और विकास कार्य तेजी से होंगे।

हम उत्तर प्रदेश सरकार से आग्रह करते हैं कि इस मुद्दे को गंभीरता से लिया जाए और नगर पंचायतों में सभासदों को वित्तीय अधिकार व मानदेय प्रदान किया जाए। यह लोकतंत्र की सच्ची भावना को मजबूत करेगा और स्थानीय विकास को गति देगा।

हमारी आपसे अपील:

अगर आप मानते हैं कि सभासदों को वित्तीय अधिकार और मानदेय मिलना चाहिए, तो इस याचिका को साइन करें और ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।

यह सिर्फ सभासदों का ही नहीं, बल्कि लोकतंत्र को मजबूत करने का मुद्दा है!

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Shivangi TiwariPetition Starter

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माननीय मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार, नगर विकास मंत्री एवं संबंधित अधिकारीगण,

हम, उत्तर प्रदेश के नगर पंचायतों के सभासद, इस याचिका के माध्यम से एक महत्वपूर्ण मांग उठा रहे हैं। वर्तमान में नगर पंचायतों में निर्वाचित सभासदों की भूमिका केवल हस्ताक्षर करने तक सीमित रह गई है। उन्हें किसी भी प्रकार के वित्तीय अधिकार नहीं दिए जाते, जिससे वे अपने वार्ड के विकास कार्यों में स्वतंत्र रूप से निर्णय नहीं ले सकते। इसके अलावा, सभासदों को किसी प्रकार का मानदेय (वेतन या भत्ता) भी नहीं दिया जाता, जिससे वे जनहित के कार्यों में आर्थिक रूप से कठिनाइयों का सामना करते हैं।

हमारी मुख्य मांगें:

1️⃣ सभासदों को मानदेय दिया जाए – अन्य जनप्रतिनिधियों (जैसे नगर पंचायत अध्यक्ष, विधायक और सांसद) की तरह सभासदों को भी सम्मानजनक मानदेय मिलना चाहिए, ताकि वे अपना समय और संसाधन वार्ड के विकास में लगा सकें।
2️⃣ वित्तीय अधिकार दिए जाएं – सभासदों को अपने वार्ड में होने वाले कार्यों के लिए बजट आवंटन में भागीदारी मिले और वे यह तय कर सकें कि विकास कार्यों के लिए धनराशि कहाँ खर्च की जाए।
3️⃣ सभासदों की भागीदारी को मजबूत किया जाए – नगर पंचायत के प्रशासनिक और विकास कार्यों में सभासदों की राय को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए।
4️⃣ नगर पंचायत में पारदर्शिता लाई जाए – हर वार्ड में किए जाने वाले खर्च का विवरण सभासदों को दिया जाए, ताकि वे अपने क्षेत्र की जनता को जानकारी दे सकें और किसी भी प्रकार की अनियमितता पर सवाल उठा सकें।

सभासदों की मौजूदा स्थिति

आज नगर पंचायत में सभासदों को केवल हस्ताक्षर करने तक सीमित कर दिया गया है।

बिना वित्तीय अधिकार और पारदर्शिता के, वे अपने ही वार्ड के विकास कार्यों में प्रभावी भूमिका नहीं निभा सकते।

बिना मानदेय के, कई सभासद अपने निजी खर्च पर वार्ड के नागरिकों की मदद करने की कोशिश करते हैं, जिससे वे आर्थिक रूप से कमजोर हो जाते हैं।


हम यह बदलाव क्यों चाहते हैं?

✅ जब नगर पंचायत अध्यक्ष, विधायक और सांसद को मानदेय व अन्य सुविधाएँ मिलती हैं, तो सभासदों को क्यों नहीं?
✅ जब पंचायत के अध्यक्ष व ग्राम पंचायत के प्रधानों को वित्तीय अधिकार दिए जाते हैं, तो नगर पंचायत सभासद को क्यों नहीं?
✅ अगर सभासदों को वित्तीय निर्णयों में भागीदारी मिले, तो भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी और विकास कार्य तेजी से होंगे।

हम उत्तर प्रदेश सरकार से आग्रह करते हैं कि इस मुद्दे को गंभीरता से लिया जाए और नगर पंचायतों में सभासदों को वित्तीय अधिकार व मानदेय प्रदान किया जाए। यह लोकतंत्र की सच्ची भावना को मजबूत करेगा और स्थानीय विकास को गति देगा।

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यह सिर्फ सभासदों का ही नहीं, बल्कि लोकतंत्र को मजबूत करने का मुद्दा है!

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Durga Shankar Mishra
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Yogi Adityanath
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Dr Indramani Tripathi
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State Election Commissioner, Uttar Pradesh
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