चित्रशिला मंदिर परिसर की भूमि पर अवैध व्यावसायिक गतिविधियों एवं अनधिकृत निर्माण के संबंध म

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The Issue

सेवा में, 

 

जिलाधिकारी 

नैनीताल 

 

महोदय,

सविनय निवेदन है कि रानीबाग स्थित चित्रशिला मंदिर परिसर में, नैनीताल रोड से प्रवेश करते ही शिवद्वार के दाईं ओर स्थित मंदिर की भूमि पर वर्तमान में फूड कोर्ट/चौपाटी के नाम पर तेज़ी से व्यावसायिक निर्माण कार्य किया जा रहा है। यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक होने के साथ-साथ धार्मिक आस्था और विधि दोनों के साथ गंभीर खिलवाड़ प्रतीत होती है।

उक्त भूमि के संबंध में प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह भूमि पूर्व में कत्युरी जागर जैसे धार्मिक आयोजनों के लिए प्रयुक्त होती रही है। किंतु विगत कुछ वर्षों में, यहाँ के सेवायत परिवार (गोस्वामी) द्वारा इस भूमि को घेरकर आपस में बाँट लेने और निजी उपयोग में लाने की बात सामने आई है, जो अत्यंत आपत्तिजनक एवं पीड़ादायक है।

राजस्व अभिलेखों के अनुसार यह भूमि पदमेश्वर महादेव मंदिर के नाम दर्ज है। अतः यह स्पष्ट रूप से मंदिर की संपत्ति है, जिस पर केवल धार्मिक गतिविधियाँ ही अनुमन्य हैं। इस पर किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि कानूनन अवैध एवं दंडनीय है। सेवायत पुजारियों का दायित्व केवल मंदिर की सेवा और देखरेख तक सीमित होता है; उन्हें इस भूमि पर स्वामित्व या निजी उपयोग का कोई अधिकार नहीं है।

इसके अतिरिक्त, यह भी संज्ञान में आया है कि मंदिर परिसर के लगभग दो-तिहाई भाग पर शनि मंदिर निर्माण की अनुमति भी कथित रूप से अनियमित तरीके से दी गई, जिसमें आर्थिक लेन-देन की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। वर्तमान में यह निर्माण इतना विस्तृत हो चुका है कि मूल चित्रेश्वर महादेव मंदिर का स्वरूप और उसकी पौराणिक गरिमा गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है और भी चिंताजनक तथ्य यह है कि इस निर्माण के कारण कत्युरी देवी जिया गुफा मंदिर से गौलाघाट की ओर होने वाले पारंपरिक दर्शन पूरी तरह बाधित हो चुके हैं। जबकि इस अवैध निर्माण के विरुद्ध प्राधिकरण द्वारा अगस्त एवं नवंबर 2026 में नोटिस भी जारी किए गए थे, फिर भी अब तक कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं होना प्रशासनिक उदासीनता या दबाव का संकेत देता है।

साथ ही, प्राचीन जसुली देवी धर्मशाला का दुरुपयोग कर उसे दुकानों में परिवर्तित किया जाना भी धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के साथ खुला अन्याय है।

अतः आपसे विनम्र किंतु दृढ़ निवेदन है कि:

  • उक्त भूमि की राजस्व स्थिति एवं स्वामित्व की तत्काल जांच कराई जाए।
  • मंदिर की भूमि पर चल रही सभी अवैध व्यावसायिक गतिविधियों को तत्काल प्रभाव से रोका जाए
  • बिना अनुमति किए गए निर्माण कार्यों को विधि अनुसार हटाया जाए।
  • इस प्रकार के कृत्यों में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध विधिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।
  • यह स्पष्ट किया जाए कि उक्त निर्माण हेतु पानी, बिजली एवं अन्य सुविधाओं की अनुमति किस आधार पर दी गई।

महोदय, यह केवल भूमि का विषय नहीं है, बल्कि एक प्राचीन धार्मिक स्थल की गरिमा और आस्था का प्रश्न है। यदि समय रहते कठोर कार्यवाही नहीं की गई, तो यह पवित्र स्थल पूरी तरह व्यावसायिक अतिक्रमण का शिकार हो जाएगा।

आपसे अपेक्षा है कि इस गंभीर विषय पर शीघ्र एवं निष्पक्ष कार्यवाही कर न्याय सुनिश्चित करेंगे।

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नैनीताल 

 

महोदय,

सविनय निवेदन है कि रानीबाग स्थित चित्रशिला मंदिर परिसर में, नैनीताल रोड से प्रवेश करते ही शिवद्वार के दाईं ओर स्थित मंदिर की भूमि पर वर्तमान में फूड कोर्ट/चौपाटी के नाम पर तेज़ी से व्यावसायिक निर्माण कार्य किया जा रहा है। यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक होने के साथ-साथ धार्मिक आस्था और विधि दोनों के साथ गंभीर खिलवाड़ प्रतीत होती है।

उक्त भूमि के संबंध में प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह भूमि पूर्व में कत्युरी जागर जैसे धार्मिक आयोजनों के लिए प्रयुक्त होती रही है। किंतु विगत कुछ वर्षों में, यहाँ के सेवायत परिवार (गोस्वामी) द्वारा इस भूमि को घेरकर आपस में बाँट लेने और निजी उपयोग में लाने की बात सामने आई है, जो अत्यंत आपत्तिजनक एवं पीड़ादायक है।

राजस्व अभिलेखों के अनुसार यह भूमि पदमेश्वर महादेव मंदिर के नाम दर्ज है। अतः यह स्पष्ट रूप से मंदिर की संपत्ति है, जिस पर केवल धार्मिक गतिविधियाँ ही अनुमन्य हैं। इस पर किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि कानूनन अवैध एवं दंडनीय है। सेवायत पुजारियों का दायित्व केवल मंदिर की सेवा और देखरेख तक सीमित होता है; उन्हें इस भूमि पर स्वामित्व या निजी उपयोग का कोई अधिकार नहीं है।

इसके अतिरिक्त, यह भी संज्ञान में आया है कि मंदिर परिसर के लगभग दो-तिहाई भाग पर शनि मंदिर निर्माण की अनुमति भी कथित रूप से अनियमित तरीके से दी गई, जिसमें आर्थिक लेन-देन की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। वर्तमान में यह निर्माण इतना विस्तृत हो चुका है कि मूल चित्रेश्वर महादेव मंदिर का स्वरूप और उसकी पौराणिक गरिमा गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है और भी चिंताजनक तथ्य यह है कि इस निर्माण के कारण कत्युरी देवी जिया गुफा मंदिर से गौलाघाट की ओर होने वाले पारंपरिक दर्शन पूरी तरह बाधित हो चुके हैं। जबकि इस अवैध निर्माण के विरुद्ध प्राधिकरण द्वारा अगस्त एवं नवंबर 2026 में नोटिस भी जारी किए गए थे, फिर भी अब तक कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं होना प्रशासनिक उदासीनता या दबाव का संकेत देता है।

साथ ही, प्राचीन जसुली देवी धर्मशाला का दुरुपयोग कर उसे दुकानों में परिवर्तित किया जाना भी धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के साथ खुला अन्याय है।

अतः आपसे विनम्र किंतु दृढ़ निवेदन है कि:

  • उक्त भूमि की राजस्व स्थिति एवं स्वामित्व की तत्काल जांच कराई जाए।
  • मंदिर की भूमि पर चल रही सभी अवैध व्यावसायिक गतिविधियों को तत्काल प्रभाव से रोका जाए
  • बिना अनुमति किए गए निर्माण कार्यों को विधि अनुसार हटाया जाए।
  • इस प्रकार के कृत्यों में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध विधिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।
  • यह स्पष्ट किया जाए कि उक्त निर्माण हेतु पानी, बिजली एवं अन्य सुविधाओं की अनुमति किस आधार पर दी गई।

महोदय, यह केवल भूमि का विषय नहीं है, बल्कि एक प्राचीन धार्मिक स्थल की गरिमा और आस्था का प्रश्न है। यदि समय रहते कठोर कार्यवाही नहीं की गई, तो यह पवित्र स्थल पूरी तरह व्यावसायिक अतिक्रमण का शिकार हो जाएगा।

आपसे अपेक्षा है कि इस गंभीर विषय पर शीघ्र एवं निष्पक्ष कार्यवाही कर न्याय सुनिश्चित करेंगे।

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