ग्राहकों को किसी भी प्रकार की लिखित सूचना भारतीय भाषाओँ में क्षेत्रवार बहुभाषा फॉर्मेट में


ग्राहकों को किसी भी प्रकार की लिखित सूचना भारतीय भाषाओँ में क्षेत्रवार बहुभाषा फॉर्मेट में
The Issue
सेवा में,
उपभोक्ता मामले विभाग
उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय
विषय :- ग्राहकों को किसी भी प्रकार की लिखित सूचना भारतीय भाषाओँ में क्षेत्रवार बहुभाषा फॉर्मेट में उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में एवं देश की सामाजिक और आर्थिक विकास हेतु भारतीय भाषाओं योगदान
वर्तमान में सूचनाओं का संप्रेषण कुछ सरकारी / गैर सरकारी संस्थानों के द्वारा विदेशी भाषा यानि की अंग्रेजी में मुख्यतः की जाती है, हालांकि अँग्रेजी का ज्ञान वर्तमान परिपेक्ष्य में आवश्यक भी है, किन्तु इस कारण से सूचनाओं की पहुँच अंग्रेजी माध्यम से पढ़े लिखे एवं अँग्रेजी का ज्ञान रखने वालों या कहें तो विशेष वर्ग तक ही सीमित हो जाती है, ऐसा प्रतीत होता है, कि सूचना का प्रसारण किसी एक विशेष वर्ग के लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए ही प्रकाशित किया गया है। बहुत से कारणों में से एक कारण यह भी हो सकता है कि अमीर और अमीर होता जा रहा है, और गरीब, और गरीब।उदाहरण के तौर पर भारतीय भाषा के माध्यम के विद्यालय में शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों का वार्षिक फीस अँग्रेजी माध्यम के विद्यालय में शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों के मासिक फीस में जमीन और आसमान का फर्क है।
2. इसके अतिरिक्त, यदि आप इन्शुरेंस की पॉलिसी, किसी कार का ग्राहक पुस्तिका, गारंटी / वारंटी का दस्तावेज, बिल की प्रति इत्यादि का अवलोकन करतें हैं, तो आप पाएंगे की ये सभी दस्तावेजों को मुख्यत: अँग्रेजी में ही प्रकाशित की गयी है।
3. अगर इन्शुरेंस की पॉलिसी की बात की जाए तो शायद ही किसी कंपनी ने भारतीय भाषाओं में प्रकाशित किया है, इन्शुरेंस पॉलिसी के दस्तावेजों में बहुत से ऐसे नियमों का उल्लेख किया जाता है, भाषाई अज्ञानता के कारण इन्शुरेंस से संबंधित जानकारियों को पढ़ना और समझना ही दिक्कत की बात हो जाती है, फलस्वरूप बहुत से ऐसे नियमों और शर्तों का पालन नहीं हो पाता है, जिससे इन्शुरेंस दावा करने पर, दावा विभिन्न कारणों से निरस्त हो जाता है, और जब दस्तावेज़ की प्रति भारतीय भाषा में मांग की जाती है, तो कंपनियों के द्वारा प्रदान नहीं की जाती और ये कहा जाता है, की ये जानकारी Standard English में ही दी जाती है, जिससे ये प्रतीत होता है, की हम अभी भी अंग्रेजों के गुलाम हैं और आगे भी अंग्रेजों की गुलामी करना चाहते हैं।
4. हाल के दिनों में कई कंपनियों ने आईपीओ जारी किया, किन्तु, शायद ही किसी कंपनी ने भारतीय भाषाओं में विज्ञापन जारी किया। जिस कारण से एक विशेष वर्ग ही इसे पढ़कर एवं समझकर निवेश किया होगा। शायद इन्ही कारणों से देश को अन्य देशों से लोन लेने की आवश्यकता पड़ती है।
5. चूंकि केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार के कार्यालयों में राजभाषा से संबंधित कानूनों / अधिनियमों / नियमों का पालन किया जाता है। किंतु गैर सरकारी संस्थानों / निकायों पर इस प्रकार के नियम लागू नहीं है।
6. हाल के दिनों में कुछ अच्छी खबरे में सुनने को मिला है, जैसे की शिक्षा, नियोजन, मनोरंजन, खेल एवं सेवा जगत में भी बहुभाषाओं का प्रयोग किया जा रहा है और इस संबंध में अखबारों के शीर्षक कुछ इस प्रकार हैं।
शिक्षा
1. सुप्रीम कोर्ट के फैसले की कॉपी अब सिर्फ अंगेजी में नहीं होगी! जल्द अपनी पसंदीदा भाषा में पढ़ पाएंगे फैसले
2. Centre exploring feasibility of multilingual textbooks across major Indian languages
3. लोकल भाषा में छात्रों को परीक्षा देने का हो विकल्प, UGC चेयरमैन ने सभी यूनिवर्सिटीज को लिखी चिट्ठी
4. CUET UG 2023: एप्ली केशन फॉर्म में करेक्शन के लिए विंडो आज से ओपन, 21 मई से 13 भाषाओं में होगी एग्जाम
नियोजन
1. गृह मंत्रालय ने एक ऐतिहासिक फैसला करते हुए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) में कांस्टेबल (सामान्य ड्यूटी) पदों के लिए हिंदी और अंग्रेजी के अलावा 13 क्षेत्रीय भाषाओं में परीक्षा आयोजित कराए जाने को मंजूरी दे दी है।
2. पहली बार ! 13 क्षेत्रीय भाषाओं में आयोजित होगी SSC MTS और CHSL की परीक्षा, DOPT की मंजूरी के बाद आयोग का बड़ा फैसला।
3. अब SSC MTS, CHSL एग्जाम भी 13 क्षेत्रीय भाषाओं में आयोजित होंगे
मनोरंजन
1. Baahubali Released in over ten languages and counting
वर्ल्ड स्तर पर धमाल मचाने आ रही है फिल्म हनुमान,11 भाषाओं में एक साथ होगी रिलीज
2. Suriya’s next titled Kanguva, film to release in 2024 in 10 languages
खेल
1. पहली बार 12 भाषाओं में IPL की कमेंट्री:भोजपुरी, पंजाबी और उड़िया भाषाएं होंगी शामिल
सेवा
1. BHIM app to be available in seven regional languages by the end of this week
2. Google Working To Make Internet Search Available In Over 100 Indian Languages: Sundar Pichai
3. UPI Apps: यूपीआई पेमेंट करते वक्त अपने स्थानीय भाषा का करना चाहते हैं इस्तेमाल, जानें PhonePe, Gpay जैसे ऐप्स में भाषा बदलने का पूरा प्रोसेस
4. दही को क्षेत्रीय भाषा में भी लेबल किया जा सकता है: टीएन विवाद के बीच एफएसएसएआई
7. अतः भारतीय भाषाओं का मान सम्मान करते हुए, सरकारी या गैर सरकारी संस्थानों / निकायों इत्यादि के द्वारा जारी किए जाने वाले विज्ञापनों, दस्तावेजों, पैकेटों के लेबलों इत्यादि को अँग्रेजी भाषा में प्रकाशन करने के स्थिति में एवं सूचनाओं का संप्रेषण सामान्य जनमानस तक संप्रेषण हेतु उन सरकारी या गैर सरकारी संस्थानों / निकायों को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित भाषाओं (हिंदी, असमिया, उड़िया, उर्दू, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, गुजराती, डोगरी, तमिल, तेलुगू, नेपाली, पंजाबी, बांग्ला, बोड़ो, मणिपुरी, मराठी, मलयालम, मैथिली, संथाली, संस्कृत, सिंधी,) में से भारत सरकार के राजभाषा के साथ किसी अन्य अनुसूचित भाषा में (बहुभाषा फ़ारमैट) में अथवा सभी भाषाओं में क्षेत्रवार विज्ञापनों, दस्तावेजों, पैकेटों के लेबलों इत्यादि जारी किया जाना चाहिए। जिससे हम सभी भारतवासियों को हमारी भाषा में सूचना के पहुँच से सूचनाओं को समझने में आसानी होगी और समय भी बचत होगी, फलस्वरूप समय पर आवश्यक निर्णय लिया जा सकेगा। इससे ना केवल उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा इससे वस्तुओं एवं सेवाओं के प्रदाता को भी लाभ मिलेगा। अंततः हमारे देश का सामाजिक और आर्थिक विकास भी होगा।

The Issue
सेवा में,
उपभोक्ता मामले विभाग
उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय
विषय :- ग्राहकों को किसी भी प्रकार की लिखित सूचना भारतीय भाषाओँ में क्षेत्रवार बहुभाषा फॉर्मेट में उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में एवं देश की सामाजिक और आर्थिक विकास हेतु भारतीय भाषाओं योगदान
वर्तमान में सूचनाओं का संप्रेषण कुछ सरकारी / गैर सरकारी संस्थानों के द्वारा विदेशी भाषा यानि की अंग्रेजी में मुख्यतः की जाती है, हालांकि अँग्रेजी का ज्ञान वर्तमान परिपेक्ष्य में आवश्यक भी है, किन्तु इस कारण से सूचनाओं की पहुँच अंग्रेजी माध्यम से पढ़े लिखे एवं अँग्रेजी का ज्ञान रखने वालों या कहें तो विशेष वर्ग तक ही सीमित हो जाती है, ऐसा प्रतीत होता है, कि सूचना का प्रसारण किसी एक विशेष वर्ग के लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए ही प्रकाशित किया गया है। बहुत से कारणों में से एक कारण यह भी हो सकता है कि अमीर और अमीर होता जा रहा है, और गरीब, और गरीब।उदाहरण के तौर पर भारतीय भाषा के माध्यम के विद्यालय में शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों का वार्षिक फीस अँग्रेजी माध्यम के विद्यालय में शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों के मासिक फीस में जमीन और आसमान का फर्क है।
2. इसके अतिरिक्त, यदि आप इन्शुरेंस की पॉलिसी, किसी कार का ग्राहक पुस्तिका, गारंटी / वारंटी का दस्तावेज, बिल की प्रति इत्यादि का अवलोकन करतें हैं, तो आप पाएंगे की ये सभी दस्तावेजों को मुख्यत: अँग्रेजी में ही प्रकाशित की गयी है।
3. अगर इन्शुरेंस की पॉलिसी की बात की जाए तो शायद ही किसी कंपनी ने भारतीय भाषाओं में प्रकाशित किया है, इन्शुरेंस पॉलिसी के दस्तावेजों में बहुत से ऐसे नियमों का उल्लेख किया जाता है, भाषाई अज्ञानता के कारण इन्शुरेंस से संबंधित जानकारियों को पढ़ना और समझना ही दिक्कत की बात हो जाती है, फलस्वरूप बहुत से ऐसे नियमों और शर्तों का पालन नहीं हो पाता है, जिससे इन्शुरेंस दावा करने पर, दावा विभिन्न कारणों से निरस्त हो जाता है, और जब दस्तावेज़ की प्रति भारतीय भाषा में मांग की जाती है, तो कंपनियों के द्वारा प्रदान नहीं की जाती और ये कहा जाता है, की ये जानकारी Standard English में ही दी जाती है, जिससे ये प्रतीत होता है, की हम अभी भी अंग्रेजों के गुलाम हैं और आगे भी अंग्रेजों की गुलामी करना चाहते हैं।
4. हाल के दिनों में कई कंपनियों ने आईपीओ जारी किया, किन्तु, शायद ही किसी कंपनी ने भारतीय भाषाओं में विज्ञापन जारी किया। जिस कारण से एक विशेष वर्ग ही इसे पढ़कर एवं समझकर निवेश किया होगा। शायद इन्ही कारणों से देश को अन्य देशों से लोन लेने की आवश्यकता पड़ती है।
5. चूंकि केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार के कार्यालयों में राजभाषा से संबंधित कानूनों / अधिनियमों / नियमों का पालन किया जाता है। किंतु गैर सरकारी संस्थानों / निकायों पर इस प्रकार के नियम लागू नहीं है।
6. हाल के दिनों में कुछ अच्छी खबरे में सुनने को मिला है, जैसे की शिक्षा, नियोजन, मनोरंजन, खेल एवं सेवा जगत में भी बहुभाषाओं का प्रयोग किया जा रहा है और इस संबंध में अखबारों के शीर्षक कुछ इस प्रकार हैं।
शिक्षा
1. सुप्रीम कोर्ट के फैसले की कॉपी अब सिर्फ अंगेजी में नहीं होगी! जल्द अपनी पसंदीदा भाषा में पढ़ पाएंगे फैसले
2. Centre exploring feasibility of multilingual textbooks across major Indian languages
3. लोकल भाषा में छात्रों को परीक्षा देने का हो विकल्प, UGC चेयरमैन ने सभी यूनिवर्सिटीज को लिखी चिट्ठी
4. CUET UG 2023: एप्ली केशन फॉर्म में करेक्शन के लिए विंडो आज से ओपन, 21 मई से 13 भाषाओं में होगी एग्जाम
नियोजन
1. गृह मंत्रालय ने एक ऐतिहासिक फैसला करते हुए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) में कांस्टेबल (सामान्य ड्यूटी) पदों के लिए हिंदी और अंग्रेजी के अलावा 13 क्षेत्रीय भाषाओं में परीक्षा आयोजित कराए जाने को मंजूरी दे दी है।
2. पहली बार ! 13 क्षेत्रीय भाषाओं में आयोजित होगी SSC MTS और CHSL की परीक्षा, DOPT की मंजूरी के बाद आयोग का बड़ा फैसला।
3. अब SSC MTS, CHSL एग्जाम भी 13 क्षेत्रीय भाषाओं में आयोजित होंगे
मनोरंजन
1. Baahubali Released in over ten languages and counting
वर्ल्ड स्तर पर धमाल मचाने आ रही है फिल्म हनुमान,11 भाषाओं में एक साथ होगी रिलीज
2. Suriya’s next titled Kanguva, film to release in 2024 in 10 languages
खेल
1. पहली बार 12 भाषाओं में IPL की कमेंट्री:भोजपुरी, पंजाबी और उड़िया भाषाएं होंगी शामिल
सेवा
1. BHIM app to be available in seven regional languages by the end of this week
2. Google Working To Make Internet Search Available In Over 100 Indian Languages: Sundar Pichai
3. UPI Apps: यूपीआई पेमेंट करते वक्त अपने स्थानीय भाषा का करना चाहते हैं इस्तेमाल, जानें PhonePe, Gpay जैसे ऐप्स में भाषा बदलने का पूरा प्रोसेस
4. दही को क्षेत्रीय भाषा में भी लेबल किया जा सकता है: टीएन विवाद के बीच एफएसएसएआई
7. अतः भारतीय भाषाओं का मान सम्मान करते हुए, सरकारी या गैर सरकारी संस्थानों / निकायों इत्यादि के द्वारा जारी किए जाने वाले विज्ञापनों, दस्तावेजों, पैकेटों के लेबलों इत्यादि को अँग्रेजी भाषा में प्रकाशन करने के स्थिति में एवं सूचनाओं का संप्रेषण सामान्य जनमानस तक संप्रेषण हेतु उन सरकारी या गैर सरकारी संस्थानों / निकायों को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित भाषाओं (हिंदी, असमिया, उड़िया, उर्दू, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, गुजराती, डोगरी, तमिल, तेलुगू, नेपाली, पंजाबी, बांग्ला, बोड़ो, मणिपुरी, मराठी, मलयालम, मैथिली, संथाली, संस्कृत, सिंधी,) में से भारत सरकार के राजभाषा के साथ किसी अन्य अनुसूचित भाषा में (बहुभाषा फ़ारमैट) में अथवा सभी भाषाओं में क्षेत्रवार विज्ञापनों, दस्तावेजों, पैकेटों के लेबलों इत्यादि जारी किया जाना चाहिए। जिससे हम सभी भारतवासियों को हमारी भाषा में सूचना के पहुँच से सूचनाओं को समझने में आसानी होगी और समय भी बचत होगी, फलस्वरूप समय पर आवश्यक निर्णय लिया जा सकेगा। इससे ना केवल उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा इससे वस्तुओं एवं सेवाओं के प्रदाता को भी लाभ मिलेगा। अंततः हमारे देश का सामाजिक और आर्थिक विकास भी होगा।

Petition Closed
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The Decision Makers
Petition created on May 25, 2023