JUSTICE FOR KAUSHLENDRA

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To

The CEO

Tech Mahindra Foundation

Mahindra Towers

Bhikhaji Cama Place

New Delhi - 66

Subject: Demand for Justice for deceased Kaushlendra Prapanna from Tech Mahindra Foundation

Sir/Madam,

We, people from different backgrounds, have come together due to our concerns about civil rights to express our grief, anger and demands on a serious matter related to your organization.

You will be aware that Shri Kaushlendra Prapanna was working as Vice Principal with Tech Mahindra Foundation (TMF) in Delhi for last five years. He had always been raising questions about the plight of school education and teachers, in various local newspapers and magazines and at various academic fora. On 25 August 2019, one of his articles was published in Jansatta newspaper - 'शिक्षा : न पढ़ा पाने की कसक'. In this article, Kaushlendra had rejected the discourse that blames teachers for all the shortcomings of the school system and had instead highlighted some of the institutional shortcomings responsible for the sorry state of affairs in schools. 

Article Link - https://www.jansatta.com/editors-pick/jansatta-sunday-special-ducation-column/1129272/ 

According to our information, East Delhi Municipal Corporation which runs primary schools built pressure on TMF after the publication of this article and as a result Kaushlendra was professionally harassed for several days at the workplace. This harassment was not confined to one place but followed him home, to the office and the organizational headquarters. He was mentally pressurized into forcefull Resigning.

He wrote an article about himself on 5th September on whats happening with him- सच का साथ देने का पाठ पढ़ाने वाले शिक्षक यदि सच बोलें तो हो जाती है कार्यवाही https://www.prabhasakshi.com/column/hindi-essay-on-teachers-day-2019 

Kaushlendra Prapanna, was writing in prominent newspapers and journals from past 15+ years and who had built a reputation for himself with his work and writing, both inside and outside the field, could not bear this constant humiliation and was struck by cardiac arrest on ‘Teachers' Day’ . He had no ailment. And this writer who had always raised questions of education in Hindi, passed away on The Hindi Divas i.e. 14 September 2019. He is survived by his wife and an eleven months old son.

The same organization which had always been proudly displaying Kaushlendra’ s newspaper articles on the display boards of its centers, could not treat its old employee with basic humanity. This entire incident needs to be seen beyond its personal and local scope.

In such a situation, it becomes the responsibility of TMF to ensure that Kaushlendra’ s family gets justice and that the injustice done to Kaushlendra is not repeated in the future. Also, TMF should ensure that the dignity of all employees at its workplaces gets due respect and it doesn’t obstruct their fundamental right to freedom of expression.

We demand that - 

1. Tech Mahindra Foundation should give due compensation to Shri Kaushlendra Prapanna’ s wife and their 11-month-old child keeping in mind their unsafe future and the need for financial security.

2. Tech Mahindra Foundation should investigate the mental harassment that Kaushlendra had to face and take appropriate action against those of its officials who are found responsible for creating conditions leading to his death.

3. Tech Mahindra Foundation should make the report investigating into the chain of events and factors/reasons which lead to Kaushlendra Prapanna’ s death public.

4. Tech Mahindra Foundation, based on the above churning, should lay down appropriate rules and guidelines to prevent the recurrence of such incidents and make these rules and guidelines public.

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In Hindi - 

प्रति

सीईओ

टेक महिंद्रा फाउंडेशन

महिंद्रा टावर्स

भीखाजी कामा प्लेस

नयी दिल्ली – 66

विषय : टेक महिंद्रा फाउंडेशन के मरहूम  कर्मचारी कौशलेन्द्र प्रपन्न के लिए न्याय

महोदय/महोदया

हम, नागरिक अधिकारों के प्रति चिंता करने वाले अलग-अलग पृष्ठभूमियों के लोग, आपके समक्ष आपकी संस्था से जुड़े एक गंभीर विषय को लेकर अपना दुःख, गुस्सा और माँगें रखने जा रहे हैं|

आपको ज्ञात होगा कि कौशलेन्द्र प्रपन्न टेक महिंद्रा फाउंडेशन (टीएमएफ) के साथ दिल्ली में बतौर वाइस प्रिंसिपल के रूप में पांच सालों से काम कर रहे थे| वह स्कूली शिक्षा एवं शिक्षकों की इरादतन बनाई गई दुर्दशा पर विभिन्न स्थानीय समाचार पत्र-पत्रिकाओं और मंचों पर प्रश्न खडे करते रहे। 25 अगस्त 2019 को भी जनसत्ता अखबार में उनका एक लेख छपा -'शिक्षा : न पढ़ा पाने की कसक'। कौशलेन्द्र ने इस लेख में स्कूली व्यवस्था की कमियों के लिए शिक्षकों को नाकारा ठहराने वाले विमर्श को नकारते हुए संस्थागत कमियों को उजागर किया था|

https://www.jansatta.com/editors-pick/jansatta-sunday-special-ducation-column/1129272/ 

हमारी जानकारी के अनुसार इस लेख के चलते पूर्वी दिल्ली नगर निगम से टीएमएफ पर जो दबाव पड़ा उसका परिणाम यह हुआ कि कार्यस्थल पर कई दिनों तक कौशलेन्द्र को पेशेवराना ढंग से प्रताड़ित किया गया| एक जगह नहीं, कई जगहों पर- घर, ऑफिस और मुख्यालय पर। उन पर मानसिक दबाव बनाकर उनसे इस्तीफ़ा ले लिया गया| 

सच का साथ देने का पाठ पढ़ाने वाले शिक्षक यदि सच बोलें तो हो जाती है कार्यवाहीhttps://www.prabhasakshi.com/column/hindi-essay-on-teachers-day-2019 

कार्यक्षेत्र के भीतर और बाहर, अपने काम की वजह से सराहे जाने वाले कौशलेन्द्र प्रपन्न इस जलालत से शिक्षक-दिवस पर कार्डिएक अरेस्ट की चपेट में आ गए और हिन्दी में शिक्षा के सवाल उठाने वाला यह लेखक हिंदी-दिवस यानी 14 सितंबर 2019 के दिन चल बसा| उनके पीछे उनकी पत्नी और 11 महीने का बेटा है|

जो संस्था कल तक ख़ुद कौशलेन्द्र के अखबारों में छपने वाले लेखों को अपने केंद्रों के डिस्प्ले बोर्ड्स पर शान से प्रदर्शित करती आई थी, वो अपने इतने पुराने कर्मचारी के साथ मूलभूत मानवता का व्यवहार भी नहीं कर पाई| इस संपूर्ण घटना को इसके व्यक्तिगत एवं स्थानीय दायरे से परे जाकर देखने की भी ज़रूरत है।

ऐसे में टीएमएफ की यह ज़िम्मेदारी बनती है कि वह यह सुनिश्चित करे कि कौशलेन्द्र के परिवार को न्याय मिले और जो अन्याय उनके साथ हुआ वो दोबारा न हो| साथ ही, टीएमएफ अपने कार्यस्थलों पर सभी कर्मचारियों की गरिमा का सम्मान करे एवं उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार को बाधित न करे|

हम मांग करते हैं कि –

1. टेक महिंद्रा फाउंडेशन कौशलेन्द्र प्रपन्न की पत्नी और उनके 11 महीने के बच्चे के असुरक्षित भविष्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें उचित मुआवजा दे|

2. टेक महिंद्रा फाउंडेशन कौशलेन्द्र के साथ हुए मानसिक उत्पीड़न की जांच करे तथा उन्हें मौत के मुंह तक पहुंचाने में औजार बने लोगों की जिम्मेदारियां निर्धारित करके उन पर उचित कार्रवाई करे|

3. टेक महिंद्रा फाउंडेशन, कौशलेन्द्र प्रपन्न की मौत पर मंथन करते हुए इसकी रिपोर्ट सार्वजनिक करे|

4. टेक महिंद्रा फाउंडेशन उपरोक्त मंथन के आधार पर ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने संबंधी नियमावली निर्धारित करे व उसे सार्वजनिक करे|