

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी,
लोकतंत्र में पारदर्शिता बनाये रखने और कार्य में व्यक्तिगत जवाबदेही सुनिश्चित करने के उदेश्य से आपके द्वारा पारदर्शिता और व्यक्तिगत जवाबदेही नीति की घोषणा की गई थी।
मेरे द्वारा उक्त नीति के तहत बैंक आँफ इंडिया में प्रदान की जा रही ग्राहक सेवाओं की गुणवत्ता की जांच हेतु आपको कई पत्र प्रेषित किये गये किन्तु आज तक जांच प्रारम्भ कर वास्तविक मूल्याकंन करने से बचने का प्रयास किया जा रहा है।
मेरे द्वारा प्रेषित शिकायत पर सकारात्मक त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित करने के स्थान पर केवल मात्र औपचारिकता पूर्ण कर विषय को बन्द करने की सूचना प्रदान की जा रही है, जो कि स्वतः सरकार की घोषित पारदर्शिता और व्यक्तिगत जवाबदेही नीति के प्रति संदेह उत्पन्न करता है।
मेरे द्वारा आपको प्रेषित दिनांक 30-06-2018 को प्रेषित पत्र को संदर्भ संख्या डीपीजी /बी /2018/00579 के तहत पंजीकृत कर वित्त सचिव ( आर्थिक सेवाएं) को प्रेषित किया गया था जिसे बिना किसी सार्थक जांच के बन्द करने की सूचना प्रदान कर दी गई है जबकि मेरे द्वारा जांच अधिकारी के समक्ष विषय सम्बधित दस्तावेज़ प्रस्तुत करने का लिखित आश्वासन प्रदान किया गया था।
महोदय उपभोक्ता संरक्षण एवम् आम नागरिकों के प्रति संवेदनशील होने का दावा करने वाली सरकार ही इस प्रकार संवेदन हीनता प्रदर्शित करेगी तो संगठित श्रेत्र में कार्यरत अधिकारियों के विरुद्ध सत्ता के दुरुपयोग की शिकायत आम नागरिक किससे और कैसे करेगा?
अत: मेरी आपसे प्रार्थना है कि आप इस विषय में व्यक्तिगत हस्तक्षेप करते हुये शीघ्र एक व्यापक निष्पक्ष जांच की व्यवस्था करने की कृपा करे ताकि वास्तविकता सामने आ सके।
श्रद्धा और विश्वास के साथ।