Vimlesh Chandra JoshiJaipur, India
8 Apr 2019

आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी,

संदर्भ:-

PMOPG/E/2019/0081618

लोकतंत्र में आम उपभोक्ताओं को त्वरित एवम् सुलभ न्याय प्रदान करने के उदेश्य से और सार्वजनिक श्रेत्र में पारदर्शिता बनाये रखने और सत्ता के दुरुपयोग को रोकने के विचार से सरकार द्वारा पारदर्शिता एवम् व्यक्तिगत जवाबदेही नीति की घोषणा की गई थी।

उक्त नीति के तहत मेरे द्वारा जांच प्रारम्भ कर वास्तविक सच्चाई जानने के लिये आपको दिनांक 30-06-2018 को एक पत्र प्रेषित किया गया था जिसे सरकार द्वारा संदर्भ संख्या डीईएबीडी / ई /2018/30585 दिनांक 12-11-2018 के तहत सचिव ( वित्तीय सेवाएँ) को आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित किये जानें की सूचना प्रदान की गई थी।

वित्त विभाग द्वारा विषय को दिनांक 16-01-2019 को बी•ओ• तृतीया श्री सुरेंद्र सिंह जी को प्रेषित किये जानें की सूचना प्रदान की गई थी।

सरकारी निर्देशों के अनुसार ग्राहक की शिकायत का निराकरण अधिकतम अवधि 60 दिवस में किये जानें का स्पष्ट प्रावधान है किन्तु मेरे द्वारा आपको प्रेषित दिनांक 30-06-2018 के पत्र को दिनांक 12-11-2018 को संदर्भ संख्या डीईएबीडी /ई/2018/30585 के तहत पंजीकृत करना और वित्त विभाग द्वारा आज तक किसी भी प्रकार की प्रगति सम्बधित सूचना प्रदान नहीं करना घोषित नीति के प्रति सरकारी गम्भीरता पर संदेह उत्पन्न करता है।

मेरे द्वारा पिछलें दो वर्षों से भी अधिक अवधि में बारबार जांच कर वास्तविक मूल्याकंन करने हेतु विनम्र अनुरोध किया गया किन्तु आज तक जांच प्रारम्भ नहीं की गई है।

सरकार का जांच प्रारम्भ कर वास्तविक मूल्याकंन करने से बचने का प्रयास निश्चित ही आश्चर्य एवम् खेद का विषय है।

यदि लोकतंत्र में आम उपभोक्ता के प्रति संवेदन शील होने का दावा करने वाली सरकार द्वारा ही त्वरित न्याय प्रदान नहीं किया जायेगा तो आम उपभोक्ता के अधिकारों का संरक्षण कैसे होगा?

 

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