

मित्रों,
मुझे आप सभी को सूचित करते हुये अति प्रसन्नता हो रही है कि
जनहित के इस विषय में आपके सहयोग से अभी तक 95 लोगों ने समर्थन प्रदान कर दिया है और हमें 100 लोगों का लक्ष्य प्राप्त करना है।
मेरे द्वारा इस विषय में अपने परम मित्रों और आदरणीय सहकर्मियों को निरन्तर सहयोग और समर्थन की अपेक्षा में विषय की प्रगति से अवगत कराते हुये आवश्यक प्रतिक्रिया प्रदान करने हेतु बारबार प्रार्थना की गई किन्तु आज तक किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई है।
मित्रों आपकी निरन्तर उपेक्षा के बावजूद भी मुझे आदरणीय राष्ट्र कवि श्री मैथिली शरण जी की कविता के निम्न अंशों ने प्रेरित किया है:--
“अधिकार खोकर बैठ रहना यह महा दुष्कर्म है,
न्यायार्थ अपने बन्धु को भी दंड देना धर्म है।“
सरकारी निर्देशों के अनुसार ग्राहक शिकायत निराकरण एक समयबद्ध प्रक्रिया है किन्तु मेरे द्वारा पिछलें दो वर्षों से भी अधिक अवधि में सभी सक्षम अधिकारियों को निरन्तर सूचना प्रदान करते हुये विषय की विस्तृत जांच कर वास्तवित न्याय सुलभ कराने और दोषी अधिकारियों को कड़ा संदेश देने का बारबार अनुरोध किया किन्तु विषय को समुचित गम्भीरता प्रदान करने के स्थान पर मात्र औपचारिकता पूर्ण करने का प्रयास किया गया।
मेरे विचार से ग्राहक सेवाओं की वास्तवित गुणवत्ता की जांच सम्बधित मेरी पंजीकृत शिकायत पर आज तक की गई कार्यवाही की निष्पक्ष जांच कर पारदर्शिता और व्यक्तिगत जवाबदेही नीति के तहत दोषी अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित किया जाना अति आवश्यक है ताकि संवेदन हीन अधिकारियों को एक कड़ा संदेश जा सके और उपभोक्ताओं को सरकार द्वारा प्रदान अधिकारों का लाभ वास्तवित रुप से प्राप्त हो सके।
आशा करता हूँ कि आप सभी अधिक से अधिक हस्ताक्षर कर संघर्ष को सफल बनाने में अपना अमूल्य सहयोग प्रदान करने की कृपा करेंगे।,
I just signed the petition "narendra modi: Trancperency & Personal Accountability Policy" and wanted to see if you could help by adding your name.
Our goal is to reach 100 signatures and we need more support. You can read more and sign the petition here:
Thanks!
vimlesh chandra