Save Our Heritage, Save Central Vista, New Delhi / भारतीय विरासत को बचाएँ!

Save Our Heritage, Save Central Vista, New Delhi / भारतीय विरासत को बचाएँ!

16 December 2019
Petition to
Hardeep singh Puri (Ministry of Housing and Urban Affairs) and
Signatures: 9,233Next Goal: 10,000
Support now

Why this petition matters

Started by LOKPATH India

(याचिका का हिंदी अनुवाद अंग्रेज़ी के पश्चात है। )

The recent project to redevelop the Central Vista in New Delhi, and the tender process calling for ( inappropriately) “ Procurement of Service’ conducted to launch this project, involves remaking the spatial epicenter of India’s democracy.

Given its significance, the project leaves unanswered several questions of key significance:

1. A Vision for India’s Democracy:

What is the vision for the future of India’s democracy that this space should represent, given that it houses the key institutions that will sustain that democracy - as also that in the mind of most Indians it embodies that very democracy?

Is there a larger understanding of this space and it’s significance to the collective memory of Indians? From countless Republic Day Parades to Beating the Retreats, from Gandhiji’s funeral cortège to family ice cream outings, from Boat Club demonstrations to Children’s day in the Children’s Park .....

Why was this vision not articulated through a transparent and democratic debate in advance of the project launch?

Why was this vision considered of such little importance that it was left to the interpretation of participating architects - that too to articulate within a short period of three weeks?

2. Respect for Heritage:

Given the historical significance of Central Vista and its surroundings, why did a detailed heritage audit not take place prior to the design selection?

How does this project relate to the heritage guidelines of the Delhi Master Plan?

Why indeed have various governmental bodies not prepared a Zonal plan for this crucial zone despite being called upon in 2016 in the “ Master Plan 2021 “ to do so?

Why does it appear that Heritage buildings of Grade 1 and Grade 2 category are being demolished, or even worse, being called upon ( in the very brief ) to be tampered with - beyond the scope of what is allowed?

How does the project relate to India’s submission to UNESCO seeking recognition of this precinct as a World Heritage City?

3. The Impact on Environment:

Why has an environmental impact analysis not been done, and published, as a precursor to the project?

Considering the scant information in the public domain about the building program, the best guess assessment of the construction area is:

  • 3 Crore Square Feet of new buildings and basements
  • 20,000 cars will access this area daily as per building norms

The Impact of such a building program during construction would mean:

  •  possible 1000 trees to be cut to make way for the construction
  • possible 1000 trucks or more plying daily for 5 years
  • possible 20,000 laborers working on the project will need to be bussed in and out daily
  • possible 10 Crore Kilo-liters of water required for construction

What is the level of study on the impact on Air Pollution levels during construction with the additional trucks and construction dust? In this already choking city.

What will be the impact on daily Traffic in the NDMC area for 5 years from construction traffic and the road diversions due to general Infrastructure upgrade in surrounding areas? Is every citizen of Delhi to live with the restrictive traffic plans that are put in place every Republic day ( which is anyway a holiday ) for a whole 5 years - with traffic backed up all the way to Sonepat, Ghaziabad, Faridabad and beyond?

4. The Procedure for the Design Selection:

Why was the project not conducted as an open competition inviting as many ideas as possible? Is that not the correct way forward for a change envisaged to such a core national space - to collect all the best ideas, no matter its source?

There is ample precedent on how to reconcile open ideas with the technical proficiency to execute a large project.

Why was such precedent ignored?

Why were the eligibility criteria for bidders to participate in this set such that it ensured that only a small handful of firms could participate? Was this right?

Why was the list of jury members who would assess the design entries, with credentials demonstrating unimpeachable eminence and integrity, not declared in advance of the announcement? Is this not normal in such an initiative, given just National precedent, if not international ones?

How do we know as a nation that the best has been chosen for us by the best qualified to judge?

Significant public design competitions select a professional advisor, an eminent architect or an urban designer, who oversees the conducting of the design selection to ensure it is a fair process aimed at the best possible result? Was such a person appointed? If so, why was the name not declared in advance?

Why have the design entries not been subject to open scrutiny and debate?

Why is a project of such scale and significance being conducted in such extreme haste?

As concerned citizens of India, we draw attention to the national significance of Central Vista and its surroundings and ask that this project be placed on hold until the important questions above have been answered, the answers subjected to democratic scrutiny and debate, and the subsequent concerns addressed.

LokPATH India
People for the Appropriate Transformation of Habitats
Download LokPATH India's complete appeal here.

हिंदी अनुवाद

सेंट्रल विस्टा ब्रिटिश सरकार द्वारा बनाई गयी नई दिल्ली की राजधानी का एक अहम् हिस्सा है। राजधानी का निर्माण ब्रिटिश सरकार ने बीसवीं सदी के शुरुआती दशकों में किया जिससे पहले कलकत्ता शहर ब्रिटिश भारत की राजधानी के रूप में जाना जाता था। नई दिल्ली सुनियोजित प्लानिंग और डिज़ाइन का एक शानदार नमूना है जिसे ब्रिटिश आर्किटेक्ट सर एड्विन लूट्यन्स और हर्बर्ट बेकर ने बनाया। खुली सड़के, शानदार इमारतें, छायादार दरख़्तों के साथ खुले लाॅन, पानी के फ़व्वारे और बाग़ों में बसे बंगले एक ख़ूबसूरत शहर की तस्वीर बनाते हैं। आज़ादी के बाद से सेंट्रल विस्टा दिल्ली शहर का एक सांस्कृतिक केंद्र बिंदु रहा है। आज के समय में यह जगह देश के आम आवाम के लिए बेहद ख़ास और मश़्ाहूर है।

सरकार ने हाल ही में नई दिल्ली की राजधानी के सेंट्रल विस्टा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पुनर्विकास के लिए अपनी योजनाओं की घोषणा की है। इसके अंतर्गत ष्चतवबनतमउमदज व िेमतअपबमेष् टेंडर आमंत्रित किया गया है। इस स्थान की महत्वता को ध्यान में रखते हुए इस पूरी प्रक्रिया पर कई सवाल उठाये जा रहे हैं, जिसमे से कुछ ख़ास मुद्दों पर यहाँ विचार किया गया है।

भारतीय लोकतंत्र का भविष्य दृश्य

नयी परियोजना भारतीय लोकतंत्र के भविष्य की तस्वीर को कैसे दर्शाएगी ? इस जगह की महत्वता को समझने के लिए क्या यहाँ के राष्ट्रीय उत्सवों (गणतंत्र दिवस परेड, बीटिंग रिट्रीट), इस के इतिहास तथा इसकी सांस्कृतिक विरासत को भी समझा गया है? इस स्थान का देश के हर नागरिक के ह्रदय में एक खास महत्त्व है। नए डिज़ाइन को सोचने के लिए एक लोकतान्त्रिक तथा पारदर्शी व्यवस्था का चयन क्यों नहीं किया गया ? इन महत्वपूर्ण तथ्यों को सोचने समझने के लिए पर्याप्त समय क्यों नहीं दिया गया ? इस इलाके की तारीख़ी और आवामी अहमियत को नज़र अंदाज़ कर सरकार बिना किसी संगीन और गहरी सोच के डिज़ाइन के चयन और काम के पुरस्कार के साथ आगे बढ़ रही है।

विरासत की संभाल

नई दिल्ली सुनियोजित प्लानिंग और डिज़ाइन का एक शानदार नमूना है जिसे ब्रिटिश आर्किटेक्ट सर एड्विन लूट्यन्स और हर्बर्ट बेकर ने बनाया। खुली सड़के, शानदार इमारतें, छायादार दरख़्तों के साथ खुले लाॅन, पानी के फ़व्वारे और बाग़ों में बसे बंगले एक ख़ूबसूरत शहर की तस्वीर बनाते हैं। आज़ादी के बाद से सेंट्रल विस्टा दिल्ली शहर का एक सांस्कृतिक केंद्र बिंदु रहा है। ऐसे स्थान के पुनर्निर्माण से पहले किसी प्रकार का ऑडिट क्यों नहीं क्या गया ? दिल्ली मास्टरप्लान, एन.सी.आर. के क्षेत्रीय स्केल पर इस योजना का क्या मायने है? इसके बनने के दौरान और इसके बाद शहर की अन्य नई परियोजनाओं पर भी गहन असर होगा ? क्या इस बात का कोई नाप तोल किया गया है कि आम आवाम और उसकी ज़रूरतों पर इसका क्या असर होगा ? मास्टरप्लान २०१६ और २०२१ के सुझावों के अनुसार इस जगह का छोटे स्तर का जोनल प्लान क्यों नहीं बनाया गया ? ग्रेड-१ और ग्रेड-२ की ऐतिहासिक इमारतों को ध्वंस करने का विचार कहाँ तक उचित है? न्छम्ैब्व् के विश्व विरासत शहर की नामांकन प्रक्रिया में दिल्ली भी शामिल है। नयी व्यवस्था में इस तथ्य की क्या जगह होगी ?

पर्यावरण पर असर

शहर के पर्यावरण में, हवा में, पानी में, उस जगह के पुराने दरख्तों पर कोसों फैली नयी तामीर का क्या असर पड़ेगा? इन सब मामलों के लिए गहन विचार विमर्श की ज़रुरत है। इस परियोजना की सार्वजनिक ज्ञान क्षेत्र में बहुत काम जानकारी दी गयी है। कुछ अनुमानित आंकड़े इस प्रकार हैंः

१. नयी इमारतों और बेसमेंट के लिए ३ करोड़ स्क्वायर फुट का क्षेत्रफल
२. २०,००० कारों का रोज़ाना आवागमन
३. १,००० से अधिक पुराने तथा नए वृक्षों की कटाई
४. २०,००० से अधिक मज़दूरों की रहने की व्यवस्था
५. १० करोड़ किलो लीटर पानी के ज़रुरत

इस स्तर की परियोजना का अगले पांच वर्षों में नगरपालिका के क्षेत्र में क्या असर होगा? क्या इस परियोजना से वाहनों के चलन का असर सोनीपत, ग़ज़िआबाद, फरीदाबाद और बाहरी इलाकों पर भी होगा ?

डिज़ाइन चुनाव की प्रक्रिया

विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) में इन संगीन मुद्दों और इनको सुलझने की गहरी और नियोजित सोच का कोई ज़िक्र नहीं है। रिपोर्ट में मंत्रालय की बढ़ती ज़रूरतें,ं बजट, असर का आकलन आदि की रूपरेखा सहित सार्वजनिक दस्तावेज़ों का उत्पादन नहीं किया गया है। इस प्रक्रिया के अनुसार देश के कई होनहार पर छोटे दफ़्तरों के आर्किटेक्ट इसमें भाग नहीं ले पाए। अगर सरकार विचारों की तलाश कर रही है तो क्या उसे देश भर के डिज़ाइन पेशेवरों, कलाकारों, छात्रों के लिए इस प्रक्रिया को खोलने की बजाय इसे मुट्ठी भर तक सीमित करना चाहिए? और सिर्फ वो जो बड़े बयाना में २५ लाख रुपए जमा कर सके? देश के इतिहास में अंतरास्ट्रीय स्तर के कई प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ है। ऐसे उदाहरणों का कोई उल्लेख इस प्रतियोगिता में क्यों नहीं है? इस स्तर की प्रतियोगिता में चयन समिति का एक महत्वपूर्ण योगदान है। पारदर्शिता के आदर्शों को मानते हुए इसका ऐलान प्रतियोगिता से न पहले किया गया और न बाद में। मंत्रालय द्वारा डिज़ाइन की फर्म के चयन की प्रक्रिया के लिए प्रासंगिक संस्थाओं और समाजों से मदद और रहनुमाई जैसे वास्तुकला परिषद (CoA) और भारतीय आर्किटेक्ट संस्थान (IIA) के प्रस्ताव की कोई पेशकश नहीं की गई। इन्टैक (INTACH) (दिल्ली), और अन्य समाजों जैसे कि इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन डिजाइनर्स ऑफ इंडिया (IUDI) और इंडियन सोसाइटी ऑफ लैंडस्केप आर्किटेक्ट्स (ISOLA) जो संस्थाएं सालों से विरासत, प्रकृति और भवन निर्माण के शोध कार्यों में जुटी हैं, इस परियोजना में भागीदार नहीं है।

परियोजना के अनेक प्रस्तावों को सार्वजनिक ज्ञानक्षेत्र में वाद विवाद तथा गहन विचार के लिए क्यों नहीं रखा गया? इतने महत्वपूर्ण तथा विस्तृत परियोजना के लिए इतनी ज़ल्दबाज़ी क्यों ?

भारत के चिंताजनक नागरिकों की हैसियत से हम चाहते हैं कि जबतक इन संगीन मुद्दों तथा सवालों के जवाब नहीं दिए जाते इस परियोजना पर रोक लगाई जाये।


Support now
Signatures: 9,233Next Goal: 10,000
Support now