Ensure Free Vaccination for all in Uttarakhand

The Issue

ENSURE FREE VACCINATION FOR ALL IN UTTARAKHAND!

"सभी के लिए मुफ्त टीकाकरण सुनिश्चित करो!"

"मुफ्त टीकाकरण की रफ़्तार तेज़ करो!"

सेवा में,
माननीय मुख्यमंत्री महोदय,
उत्तराखंड सरकार-

महोदय,
जैसा कि विदित है कि कोरोना महामारी ने दूसरी लहर में ऐसा विकराल रूप दिखाया है कि जनता में भंयकर भय का माहौल बना हुआ है। हमारे राज्य उत्तराखंड में भी इस महामारी का बहुत बुरा असर रहा जिसमें कि हज़ारों लोग अपना जीवन खो चुके हैं। साथ ही कोरोना से इलाज हो जाने के बाद भी कई और बीमारियों और आर्थिक तंगी के कारण लोग इस संकट का शिकार हो रहे हैं और अपनी जान गंवा रहे हैं। जैसा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन और हमारी सरकार का बार बार ये दावा रहा है कि इससे बचने का सबसे कारगर तरीका टीकाकरण ही है।
महोदय हमारे राज्य उत्तराखंड में भी टीकाकरण चल रहा है, मगर सिर्फ नाम का। इस तथाकथित दूसरी लहर के बाद इसकी (टीकाकरण की) महत्ता विश्व स्वास्थ्य संगठन और आपकी सरकार के द्वारा अब और ज्यादा बताई जा रही है।
हमारे राज्य में जो टीकाकरण चल रहा है वह है 45 वर्ष से ऊपर की आयु के लिए टीकाकरण मार्च महीने में ही शुरु हो गया था। 18 से 44 वर्ष की आयु के लिए यह 10 मई से शुरू हुआ था। 26 मई 2021 को कैबिनेट मीटिंग के बाद में राज्य के मुख्यमंत्री द्वारा घोषणा की गई थी कि राज्य में 18 से 44 वर्ष की आयु के हर व्यक्ति को मुफ्त वैक्सीन लगेगी।
मगर हैरानी भी और निराशाजनक बात यह है कि वर्तमान में हमारे राज्य में 2 प्रकार के टीका केन्द्र एक हैं "free" दूसरे हैं "paid"। इस वक्त हमारे राज्य में फ्री केंद्रों पर वैक्सीन बहुत कम है। वहीं ऐसे केंद्र जिनमें पैसे चुकाए जाने हैं (paid) उनमें हज़ारों की संख्या में वैक्सीन उपलब्ध हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि व्यापक स्तर पर "निशुल्क टीकाकरण" बहुत मंद पड़ गया है और सिर्फ पैसे चुकाने में समर्थ लोग ही आसानी से वैक्सीन लगवा पा रहे हैं। लोगों को सुुदूवर्ती क्षेेेत्रों मे इंटरनेेट ट्रैफिक, टीका केेंद्र की दूरी, नेटवर्क, आवाजाही के साधनों की कमी के कारण भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हम सरकार से पूछना चाहते हैं कि आपकी कथनी और करनी में इतना अंतर क्यों है?

जैसा कि हमने कहा कि हमारे राज्य में वर्तमान में 18 से 44 वर्ष की आयु का टीकाकरण बहुत धीमा पड़ चुका है। बीते दिनों सरकारी वैक्सीनेशन केंद्रों में 18+ आयु का वैक्सीनशन  कई जिलों में बिल्कुल बंद रहा है वहीं देहरादून में मौजूद एक प्राइवेट केंद्र में प्रतिदिन औसतन 3000 डॉज से ज्यादा लग रहे हैं। यह भी सिर्फ वह आंकड़े हैं जो cowin ki official website पर दर्ज हैं। ऐसे और भी केंद्र हैं जो स्वतः ही टीकाकरण कर रहे हैं और मनमर्जी के पैसे  लोगों से वसूल कर रहे हैं, और वह साइट पर दर्ज नहीं हैं।
पृथक हिमालयी क्षेत्रों की दुर्दशा आपको बताना चाहेंगे कि चमोली, पौड़ी, बागेश्वर, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चंपावत, नैनीताल, टेहरी, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ जिलों में बीच में कई वैक्सीनशन ठप्प रहा है। फिर कभी यह अचानक शुरू होता है तो सभी तक इसकी खबर नहीं पहुंच पाती है। इन सुदूरवर्ती क्षेत्रों में जहाँ नेटवर्क की भारी समस्या है वहाँ पर स्लॉट बुकिंग नहीं हो पा रही है।
ऐसे में बहुत जरूरी है कि ग्राम पंचायत स्तर पर जाकर लोगों का टीकाकरण किया जाए और उन्हें टीका केंद्र पर पंजीकरण को सुविधा दी जाए।

बात करें, देहरादून की तो, क्योंकि यह राजधानी है और उससे भी महत्वपूर्ण कि राज्य के कई political elites यहां बसे हुए हैं, यहां सबसे ज्यादा वैक्सीनेशन केंद्र चल रहे हैं जिसमे करीब 80 सरकारी और 10 प्राइवेट केंद्र हैं। इन सब में 6 जून को 18 से 44 साल के लोगो के लिए सरकारी केंद्र में 698 टीके बुक हुए और वहीं प्राइवेट केंद्रों में कुल मिलाकर 3240 डोज तक बुक हुए। टीका नीति के क्रियान्वयन में यह विभेद बहुत ही कष्टकारी है।

हमारे राज्य की 18 से 44 साल के लोगों की संख्या 66 लाख की है और अभी तक (6 जून) 5,56,902 लोगो को ही टीका लगा है। इस गति से अगर टीकाकरण चलता रहा तो पूरे राज्य के युवाओं को मात्र पहली डॉज लगाने में ही एक साल से ज्यादा वक्त लग जायेगा। उसके बाद दूसरे डोज के पश्चात पूर्ण वैक्सीनेशन के लिए और भी लंबा वक्त लगेगा, 2 साल भी लग सकते हैं।
सरकार की इस तरह की अयोग्यता और निकम्मापन यहां पढ़ने वाले छात्रों और नौकरी पेशा युवाओं के लिए तो बड़ी चिंता का विषय है क्योंकि वो जल्द से जल्द अपनी पढ़ाई, पेशा शुरू करना चाहते हैं, साथ ही ये पूरे राज्य के सभी लोगों के लिए भी चिंताजनक है क्योंकि लोग भी अपनी सामान्य दिनचर्या शुरू करने के इंतेजार में हैं।
साथ ही पिछले 10 दिनों से जो वैक्सीनेशन 18+ से 44 साल के लोगों का चल रहा है वह अधिकांश प्राइवेट केंद्रों में हो रहा है, जिसमें मजबूर जनता से मोटा पैसा लिया जा रहा है। वैक्सीन लगाने के लिए 900 से लेकर 1400 रुपये तक भी इन निजी केंद्रों द्वारा लिए जा रहे हैं। यह निजी केंद्र पिछले 10 दिनों में ही लगभग 5 करोड़ रुपये की की कमाई कर चुके है। ऐसे में सरकार का मुफ्त टीकाकरण का वादा झूठ और ठप्प साबित होता नजर आ रहा है, अभी भी टीकों का अनियंत्रित दामों पर बिकना जारी है, इसलिए इन तमाम निजी केंद्रों पर आवश्यक और तुरन्त लगाम लगाएं और राज्य में मौजूद सभी लोगों को निशुल्क टीका सुनिश्चित करें।

जब मुफ्त टीकाकरण के लिए स्लॉट बुक करवाने आम आदमी बैठता है तब विभिन्न मुफ्त स्लोटों पर भारी ट्रैफिक होने के कारण बहुत से लोग स्लॉट बुक करवाने से चूक जाते हैं, इनमें वो लाखों लोग भी हैं जो स्मार्ट फ़ोन नहीं चला सकते हैं, न ही उनके पास हैं, या फिर ऐसे इलाकों में रहते हैं जहाँ नेटवर्क नहीं है। इसलिए ऐसी व्यवस्था होनी चाहिये कि व्यक्ति टीका केन्द्र जाकर सीधा offline पंजीकरण करवाएं और टीका लगवा सके। इस प्रकार की व्यवस्था तो है मग़र सरकार ने ऐसा खुले तौर पर अभी घोषित नहीं किया है, और न ही इसे प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है।
इसलिए वैक्सीन की उपलब्धता सुनिश्चित करवाते हुए सरकार को डिजिटल और टेक्नोलॉजी का उपयोग न करने वाले लोगों को भी टीकाकरण के इस अभियान में जोड़कर उन्हें उनका अधिकार और बिना परेशान किये सुनिश्चित करना चाहिए।

राज्य के छात्र और युवा अब कोरोना की दूसरी लहर के नीचे चले जाने के बाद अपने कैंपस और कार्यक्षेत्र की तरफ लौटेंगे। पहले ही उनके ऊपर पिछले 2 साल से ठप्प पड़े काम का भारी बोझ है, ऐसे में उनका जल्द से जल्द टीकाकरण किया जाना चाहिए।

अतः हम उत्तराखंड की राज्य सरकार से यह पुरजोर माँग करते हैं कि:

1. मुख्यमंत्री द्वारा जनता से किये गए वादे "सभी के लिए निशुल्क टीकाकरण" को अमल में लाया जाए।
2. 18 वर्ष से 44 वर्ष के बीच के धीमे पड़े मुफ्त टीकाकरण को सभी जिलों में अविलंब तेज गति से शुरू किया जाए।
3. 400 से अधिक मुफ्त सरकारी केंद्रों पर भी उसी मात्रा एवं अनुपात में टीकाकरण किया जाए जिस मात्रा एवं अनुपात में  निजी केंद्रों में हो रहा है।
4.टीके की कालाबाज़ारी और अप्रत्याशित कीमतों पर रोक लगाई जाए और अपराधियों के खिलाफ दंडात्मक कार्यवाही की जाए।
5. टीका केन्द्र पर पहुंचकर पंजीकरण की व्यवस्था को offline mode भी किया जाए, कहीं पर है तो उसे दुरुस्त किया जाए, और इसे हर टीका केंद्र पर लागू किया जाए।
6.पृथक हिमालयी ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायत स्तर तक टीकाकरण को ले जाया जाए।
7. सरकारी टीका केंद्रों पर हर व्यक्ति को टीके के बाद कि जरूरी दवाओं की खुराक भी अनिवार्य रूप से दी जाए। इसपर हो रहे भ्रष्टाचार पर भी रोक लगाई जाए।
8. टीका केन्द्र पर जागरूकता केंद्र भी बनाए जाएं ताकि स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा लोगों को टीका लगने के बाद जरूरी चीजों में सावधानियाँ बरतने के लिए जागरूक किया जा सके।

धन्यवाद

From: -
Students' Federation of India (SFI)
अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति उत्तराखंड (AIDWA)
भारत की जनवादी नौजवान सभा उत्तराखंड
(DYFI)

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SFI AIDWA DYFI UttarakhandPetition Starter
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"सभी के लिए मुफ्त टीकाकरण सुनिश्चित करो!"

"मुफ्त टीकाकरण की रफ़्तार तेज़ करो!"

सेवा में,
माननीय मुख्यमंत्री महोदय,
उत्तराखंड सरकार-

महोदय,
जैसा कि विदित है कि कोरोना महामारी ने दूसरी लहर में ऐसा विकराल रूप दिखाया है कि जनता में भंयकर भय का माहौल बना हुआ है। हमारे राज्य उत्तराखंड में भी इस महामारी का बहुत बुरा असर रहा जिसमें कि हज़ारों लोग अपना जीवन खो चुके हैं। साथ ही कोरोना से इलाज हो जाने के बाद भी कई और बीमारियों और आर्थिक तंगी के कारण लोग इस संकट का शिकार हो रहे हैं और अपनी जान गंवा रहे हैं। जैसा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन और हमारी सरकार का बार बार ये दावा रहा है कि इससे बचने का सबसे कारगर तरीका टीकाकरण ही है।
महोदय हमारे राज्य उत्तराखंड में भी टीकाकरण चल रहा है, मगर सिर्फ नाम का। इस तथाकथित दूसरी लहर के बाद इसकी (टीकाकरण की) महत्ता विश्व स्वास्थ्य संगठन और आपकी सरकार के द्वारा अब और ज्यादा बताई जा रही है।
हमारे राज्य में जो टीकाकरण चल रहा है वह है 45 वर्ष से ऊपर की आयु के लिए टीकाकरण मार्च महीने में ही शुरु हो गया था। 18 से 44 वर्ष की आयु के लिए यह 10 मई से शुरू हुआ था। 26 मई 2021 को कैबिनेट मीटिंग के बाद में राज्य के मुख्यमंत्री द्वारा घोषणा की गई थी कि राज्य में 18 से 44 वर्ष की आयु के हर व्यक्ति को मुफ्त वैक्सीन लगेगी।
मगर हैरानी भी और निराशाजनक बात यह है कि वर्तमान में हमारे राज्य में 2 प्रकार के टीका केन्द्र एक हैं "free" दूसरे हैं "paid"। इस वक्त हमारे राज्य में फ्री केंद्रों पर वैक्सीन बहुत कम है। वहीं ऐसे केंद्र जिनमें पैसे चुकाए जाने हैं (paid) उनमें हज़ारों की संख्या में वैक्सीन उपलब्ध हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि व्यापक स्तर पर "निशुल्क टीकाकरण" बहुत मंद पड़ गया है और सिर्फ पैसे चुकाने में समर्थ लोग ही आसानी से वैक्सीन लगवा पा रहे हैं। लोगों को सुुदूवर्ती क्षेेेत्रों मे इंटरनेेट ट्रैफिक, टीका केेंद्र की दूरी, नेटवर्क, आवाजाही के साधनों की कमी के कारण भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हम सरकार से पूछना चाहते हैं कि आपकी कथनी और करनी में इतना अंतर क्यों है?

जैसा कि हमने कहा कि हमारे राज्य में वर्तमान में 18 से 44 वर्ष की आयु का टीकाकरण बहुत धीमा पड़ चुका है। बीते दिनों सरकारी वैक्सीनेशन केंद्रों में 18+ आयु का वैक्सीनशन  कई जिलों में बिल्कुल बंद रहा है वहीं देहरादून में मौजूद एक प्राइवेट केंद्र में प्रतिदिन औसतन 3000 डॉज से ज्यादा लग रहे हैं। यह भी सिर्फ वह आंकड़े हैं जो cowin ki official website पर दर्ज हैं। ऐसे और भी केंद्र हैं जो स्वतः ही टीकाकरण कर रहे हैं और मनमर्जी के पैसे  लोगों से वसूल कर रहे हैं, और वह साइट पर दर्ज नहीं हैं।
पृथक हिमालयी क्षेत्रों की दुर्दशा आपको बताना चाहेंगे कि चमोली, पौड़ी, बागेश्वर, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चंपावत, नैनीताल, टेहरी, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ जिलों में बीच में कई वैक्सीनशन ठप्प रहा है। फिर कभी यह अचानक शुरू होता है तो सभी तक इसकी खबर नहीं पहुंच पाती है। इन सुदूरवर्ती क्षेत्रों में जहाँ नेटवर्क की भारी समस्या है वहाँ पर स्लॉट बुकिंग नहीं हो पा रही है।
ऐसे में बहुत जरूरी है कि ग्राम पंचायत स्तर पर जाकर लोगों का टीकाकरण किया जाए और उन्हें टीका केंद्र पर पंजीकरण को सुविधा दी जाए।

बात करें, देहरादून की तो, क्योंकि यह राजधानी है और उससे भी महत्वपूर्ण कि राज्य के कई political elites यहां बसे हुए हैं, यहां सबसे ज्यादा वैक्सीनेशन केंद्र चल रहे हैं जिसमे करीब 80 सरकारी और 10 प्राइवेट केंद्र हैं। इन सब में 6 जून को 18 से 44 साल के लोगो के लिए सरकारी केंद्र में 698 टीके बुक हुए और वहीं प्राइवेट केंद्रों में कुल मिलाकर 3240 डोज तक बुक हुए। टीका नीति के क्रियान्वयन में यह विभेद बहुत ही कष्टकारी है।

हमारे राज्य की 18 से 44 साल के लोगों की संख्या 66 लाख की है और अभी तक (6 जून) 5,56,902 लोगो को ही टीका लगा है। इस गति से अगर टीकाकरण चलता रहा तो पूरे राज्य के युवाओं को मात्र पहली डॉज लगाने में ही एक साल से ज्यादा वक्त लग जायेगा। उसके बाद दूसरे डोज के पश्चात पूर्ण वैक्सीनेशन के लिए और भी लंबा वक्त लगेगा, 2 साल भी लग सकते हैं।
सरकार की इस तरह की अयोग्यता और निकम्मापन यहां पढ़ने वाले छात्रों और नौकरी पेशा युवाओं के लिए तो बड़ी चिंता का विषय है क्योंकि वो जल्द से जल्द अपनी पढ़ाई, पेशा शुरू करना चाहते हैं, साथ ही ये पूरे राज्य के सभी लोगों के लिए भी चिंताजनक है क्योंकि लोग भी अपनी सामान्य दिनचर्या शुरू करने के इंतेजार में हैं।
साथ ही पिछले 10 दिनों से जो वैक्सीनेशन 18+ से 44 साल के लोगों का चल रहा है वह अधिकांश प्राइवेट केंद्रों में हो रहा है, जिसमें मजबूर जनता से मोटा पैसा लिया जा रहा है। वैक्सीन लगाने के लिए 900 से लेकर 1400 रुपये तक भी इन निजी केंद्रों द्वारा लिए जा रहे हैं। यह निजी केंद्र पिछले 10 दिनों में ही लगभग 5 करोड़ रुपये की की कमाई कर चुके है। ऐसे में सरकार का मुफ्त टीकाकरण का वादा झूठ और ठप्प साबित होता नजर आ रहा है, अभी भी टीकों का अनियंत्रित दामों पर बिकना जारी है, इसलिए इन तमाम निजी केंद्रों पर आवश्यक और तुरन्त लगाम लगाएं और राज्य में मौजूद सभी लोगों को निशुल्क टीका सुनिश्चित करें।

जब मुफ्त टीकाकरण के लिए स्लॉट बुक करवाने आम आदमी बैठता है तब विभिन्न मुफ्त स्लोटों पर भारी ट्रैफिक होने के कारण बहुत से लोग स्लॉट बुक करवाने से चूक जाते हैं, इनमें वो लाखों लोग भी हैं जो स्मार्ट फ़ोन नहीं चला सकते हैं, न ही उनके पास हैं, या फिर ऐसे इलाकों में रहते हैं जहाँ नेटवर्क नहीं है। इसलिए ऐसी व्यवस्था होनी चाहिये कि व्यक्ति टीका केन्द्र जाकर सीधा offline पंजीकरण करवाएं और टीका लगवा सके। इस प्रकार की व्यवस्था तो है मग़र सरकार ने ऐसा खुले तौर पर अभी घोषित नहीं किया है, और न ही इसे प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है।
इसलिए वैक्सीन की उपलब्धता सुनिश्चित करवाते हुए सरकार को डिजिटल और टेक्नोलॉजी का उपयोग न करने वाले लोगों को भी टीकाकरण के इस अभियान में जोड़कर उन्हें उनका अधिकार और बिना परेशान किये सुनिश्चित करना चाहिए।

राज्य के छात्र और युवा अब कोरोना की दूसरी लहर के नीचे चले जाने के बाद अपने कैंपस और कार्यक्षेत्र की तरफ लौटेंगे। पहले ही उनके ऊपर पिछले 2 साल से ठप्प पड़े काम का भारी बोझ है, ऐसे में उनका जल्द से जल्द टीकाकरण किया जाना चाहिए।

अतः हम उत्तराखंड की राज्य सरकार से यह पुरजोर माँग करते हैं कि:

1. मुख्यमंत्री द्वारा जनता से किये गए वादे "सभी के लिए निशुल्क टीकाकरण" को अमल में लाया जाए।
2. 18 वर्ष से 44 वर्ष के बीच के धीमे पड़े मुफ्त टीकाकरण को सभी जिलों में अविलंब तेज गति से शुरू किया जाए।
3. 400 से अधिक मुफ्त सरकारी केंद्रों पर भी उसी मात्रा एवं अनुपात में टीकाकरण किया जाए जिस मात्रा एवं अनुपात में  निजी केंद्रों में हो रहा है।
4.टीके की कालाबाज़ारी और अप्रत्याशित कीमतों पर रोक लगाई जाए और अपराधियों के खिलाफ दंडात्मक कार्यवाही की जाए।
5. टीका केन्द्र पर पहुंचकर पंजीकरण की व्यवस्था को offline mode भी किया जाए, कहीं पर है तो उसे दुरुस्त किया जाए, और इसे हर टीका केंद्र पर लागू किया जाए।
6.पृथक हिमालयी ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायत स्तर तक टीकाकरण को ले जाया जाए।
7. सरकारी टीका केंद्रों पर हर व्यक्ति को टीके के बाद कि जरूरी दवाओं की खुराक भी अनिवार्य रूप से दी जाए। इसपर हो रहे भ्रष्टाचार पर भी रोक लगाई जाए।
8. टीका केन्द्र पर जागरूकता केंद्र भी बनाए जाएं ताकि स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा लोगों को टीका लगने के बाद जरूरी चीजों में सावधानियाँ बरतने के लिए जागरूक किया जा सके।

धन्यवाद

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Petition created on 6 June 2021