#ग्वालियर_के_फेफड़े

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The Issue

ग्वालियर के फेफड़े (वन झेत्र) संक्रमित है हम ग्वालियर नगर के नागरिकों और सभी भारत वसियों को मिलकर भविष्य के लिए प्रकृति का संचय करना हैं
सभी को साथ मिलकर संघर्ष करना होगा और अपने वन क्षेत्र को संक्रमण से बचाना होगा #ग्वालियरकेफेफड़े

ग्वालियर के फेफड़े अभियान ग्वालियर के आस पास के वन झेत्रोँ और उसके पर्यावरण को बचने के लिए संघर्ष रत जन जागरण अभियान है !

अवगत हो की, विगत वर्षों में विकास की दौड़ में शामिल हम अपने नगर में पर्यावरण का दोहन कर रहे है, और हमारे आस पास के वन जो नगर को शुद्ध वायु देते हैं दिन प्रति दिन नष्ट होते जा रहे हैं
पर्यावरण के दोहन से उत्पन्न परिस्तिथि की वजह से वर्तमान पीढ़ी ही नहीं भविस्य भी भीषण गर्मी जल संकट एवं उससे उद्भूत कई समस्याओं से ग्रषित हो जाएगा
इस अभियान के अध्यात्म से हम समाज की व्यापक मूल भूत जरूरतों (जल और वायु) के झरण को रोकने हेतु यह निवेदन पत्र महोदय की ओर प्रेषित कर रहे है:

निवेदन पत्र के बिंदु क्रमशः निमिन लिखित हैं

१. ग्वालियर नगर की चरों दिशाओं में कई छोटे व् बड़े वन स्थल हैं मूलतः सबसे निकटतम वन घाटीगांव स्तिथ सोन चिर्राय अभ्यारण है| अभ्यारण तकरीबन ५५० वर्ग कम झेत्र में फैला है अभयारण का मुख्य आकर्षण उसके वनो के अंदर स्तिथ वनस्पति जिनमे खैर, मुरजन, पलाश, सेजा, धावड़ा, रोंजा, घोंटे, बेवज़े, धमन, सलाई, हींस और कतली शामिल थे| वर्तमान बड़े वृक्षों की अवैध कटाई हो चुकी है बची हुई वनस्पति सोन चिर्राय की तरह विलुप्त होने के कगार पर है इस वनस्पति के नष्ट होने का मूल कारन इन वनों के भीतर ऊपरी सतह पर सफ़ेद फर्शी पत्थर का पाया जाना है वैसे तो वनों में शासन द्वारा खदानों को पट्टे पर नहीं दिया गया है, परन्तु स्थानीय प्रशासन एवं वन विभाग की उदासीनता के कारन यहाँ निरंतर उत्खनन जारी है| इस अवैध उत्खनन के कारन प्राचीन वनस्पति तो नष्ट हो ही रही है दूसरी और नयी वनस्पति भी प्राकृतिक रूप से खोदी हुई सतह पर अपनी जड़ें नहीं जमा पाते| त्तात्पर्य यह है की हम पुराणी वनस्पति को तो खो ही देते हैं और ऊपरी सतह को बंजर भी कर देते है| वर्तमान में हो रहे अवैध उत्खनन का अवैध परिवहन मुरैना स्तिथ बानमोर की और किया जाता है| बानमोर में इस बेशकीमती पत्थर की खीसाई कटाई कर के बाजारों में बेच दिया जाता है इसके कारन शासन को राजस्व की हानि होती है|

महोदय से निवेदन है की इस अवैध उत्खनन को पूर्ण से प्रतिबंधित करवाया जाये जिससे शासन प्रकृति के दोहन को रोका जा सके और राजस्व की हानि पर भी लगाम लग सके|

२. वर्तमान में यह सर्वविदित तथ्य है की जो भी व्यापक स्तर पर वनस्पति का झरण अवैध उत्खनन हो रहा है वह वनों के आस पास और वनों में निवासरत ग्राम वाशी ही करते हैं| ग्राम वाशी इस अवैध उत्खनन की कमाई से अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं| ग्वालियर के फेफड़े अभियान का उद्देशय किसी भी आमजन अथवा ग्रामीण के रोजगार को छीनना कदापि नहीं है अपितु उन ग्राम वासियों को भी अपने पुण्य उद्देशय से जोड़ना हैं क्यूंकि प्रकृति का झरण इन गांववासियों के लिए भी कालांतर में घातक सिद्ध होगा निवेदनकर्ताओं की आप से ये अपेक्षा है की इन ग्रामवासियो को मध्यप्रदेश सरकार और वन विभाग की अन्य उपयोगी योजनाओं से जोड़कर रोजगार उपलबध कराएं | उदहारण के तौर पर MNREGA के अंतर्गत एक साल के लिए वन लगाने और पानी के श्रोत तैयार करने के लिए योजना तैयार की जाए|
इस प्रकार यही ग्रामवासी वनों को सरंक्षण देने में आगे बढ़ कर वन विभाग और सरकार का हाथ बटायेंगे|

३. यह सर्विदित है की घाटीगाँव वनों का ह्राष इस स्तर तक हो चूका है की यदि हम कल से वृहद स्तर पर वृक्षारोपण करें तो वनों को यथास्तिथि में लाने में लगभग ४० वर्षों का समय लगेगा | प्रशासन को तत्काल वृक्षारोपण की दिशा में बहुत प्रभावी कदम उठाने होंगे| इतने व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण करने में प्रशासन स्वंय भी नाकाफी होगा, ग्वालियर के फेफड़े इस पावन कार्य को करने हेतु तत्पर एवं इक्छुक है जिसमे वृक्षारोपण में श्रम दान और उसके रखरखाव की जिम्मेदारी सम्मिलित है

प्रशासन इस जन अभियान के रूप में प्रस्तुत करे जिससे इसमें आमजन की भी भागीदारी हो एवं यह कार्य सुचारु रूप से द्रुत गति से लक्ष्य की प्राप्ति हो सके|

Will be signed by all Core Group Members
(Please advice on the same )

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