Form a film board in Uttarakhand and release subsidies for artists


Form a film board in Uttarakhand and release subsidies for artists
The Issue
उत्तराखंड फिल्म बोर्ड का गठन: हमारी संस्कृति, रोजगार और पहचान को बचाने की एक मुहीम
नमस्ते, मैं एक पेशेवर अभिनेत्री और फिल्म निर्माता की सहायक (DA) हूँ। उत्तराखंड की मिट्टी से जुड़ी होने के नाते और मुंबई में फिल्म इंडस्ट्री के कामकाज को करीब से देखने के बाद, मुझे अपने राज्य के सिनेमा की स्थिति पर गहरी चिंता है।
उत्तराखंड फिल्म बोर्ड की मांग असल में है क्या?
अक्सर लोग समझते हैं कि यह सिर्फ कुछ कलाकारों के पैसे की बात है, लेकिन यह उससे कहीं बढ़कर है। यह पिटीशन निम्नलिखित 3 स्तंभों (Pillars) पर आधारित है:
1. प्रशासनिक पारदर्शिता (Administrative Transparency):
वर्तमान में उत्तराखंड में फिल्म नीति तो है, लेकिन उसे लागू करने वाला कोई समर्पित 'बोर्ड' नहीं है। 'फिल्म बोर्ड' का मतलब है एक ऐसी संस्था जहाँ प्रोफेशनल लोग बैठें, न कि सिर्फ सरकारी बाबू। यह बोर्ड कलाकारों को सिंगल-विंडो क्लीयरेंस देगा, ताकि उन्हें दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।
2. आर्थिक न्याय और सुरक्षा (Economic Justice & Security):
पिछले 10 सालों से ₹50 लाख से अधिक की प्राइज मनी और करोड़ों की सब्सिडी रुकी हुई है। इससे फिल्ममेकर्स कर्ज में डूब रहे हैं और प्रोड्यूसर्स उत्तराखंड में पैसा लगाने से डर रहे हैं। 'फिल्म बोर्ड' का होना यह सुनिश्चित करेगा कि कलाकारों का पैसा समय पर मिले और उन्हें कानूनी सुरक्षा (Legal Aid) प्राप्त हो।
3. पलायन रोकना और रोजगार (Stopping Migration & Employment):
अगर उत्तराखंड में एक मजबूत फिल्म इकोसिस्टम बनता है, तो हमारे युवाओं को काम के लिए मुंबई या दिल्ली नहीं भागना पड़ेगा। शूटिंग के दौरान स्थानीय होटलों, ड्राइवरों, गाइडों और तकनीशियनों को रोजगार मिलता है। 'फिल्म बोर्ड' इस प्रक्रिया को प्रोफेशनल बनाएगा।
हमारा अनुरोध:
हम सरकार से सिर्फ वादे नहीं, बल्कि एक 'स्वतंत्र निकाय' (Independent Body) के रूप में फिल्म बोर्ड का गठन चाहते हैं। जो बोर्ड कलाकारों की भाषा समझे, उनकी समस्याओं को सुने और उत्तराखंड को सही मायनों में 'फिल्म हब' बनाए।
यह हमारी संस्कृति और पहचान को बचाने की आखिरी पुकार है। जब तक हमारी कहानियाँ पर्दे पर नहीं आएंगी, तब तक दुनिया हमारे पहाड़ के असली दर्द और खूबसूरती को नहीं समझ पाएगी।
कृपया इस याचिका पर हस्ताक्षर करें और हमारे सिनेमा को एक
नई दिशा दें।

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उत्तराखंड फिल्म बोर्ड का गठन: हमारी संस्कृति, रोजगार और पहचान को बचाने की एक मुहीम
नमस्ते, मैं एक पेशेवर अभिनेत्री और फिल्म निर्माता की सहायक (DA) हूँ। उत्तराखंड की मिट्टी से जुड़ी होने के नाते और मुंबई में फिल्म इंडस्ट्री के कामकाज को करीब से देखने के बाद, मुझे अपने राज्य के सिनेमा की स्थिति पर गहरी चिंता है।
उत्तराखंड फिल्म बोर्ड की मांग असल में है क्या?
अक्सर लोग समझते हैं कि यह सिर्फ कुछ कलाकारों के पैसे की बात है, लेकिन यह उससे कहीं बढ़कर है। यह पिटीशन निम्नलिखित 3 स्तंभों (Pillars) पर आधारित है:
1. प्रशासनिक पारदर्शिता (Administrative Transparency):
वर्तमान में उत्तराखंड में फिल्म नीति तो है, लेकिन उसे लागू करने वाला कोई समर्पित 'बोर्ड' नहीं है। 'फिल्म बोर्ड' का मतलब है एक ऐसी संस्था जहाँ प्रोफेशनल लोग बैठें, न कि सिर्फ सरकारी बाबू। यह बोर्ड कलाकारों को सिंगल-विंडो क्लीयरेंस देगा, ताकि उन्हें दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।
2. आर्थिक न्याय और सुरक्षा (Economic Justice & Security):
पिछले 10 सालों से ₹50 लाख से अधिक की प्राइज मनी और करोड़ों की सब्सिडी रुकी हुई है। इससे फिल्ममेकर्स कर्ज में डूब रहे हैं और प्रोड्यूसर्स उत्तराखंड में पैसा लगाने से डर रहे हैं। 'फिल्म बोर्ड' का होना यह सुनिश्चित करेगा कि कलाकारों का पैसा समय पर मिले और उन्हें कानूनी सुरक्षा (Legal Aid) प्राप्त हो।
3. पलायन रोकना और रोजगार (Stopping Migration & Employment):
अगर उत्तराखंड में एक मजबूत फिल्म इकोसिस्टम बनता है, तो हमारे युवाओं को काम के लिए मुंबई या दिल्ली नहीं भागना पड़ेगा। शूटिंग के दौरान स्थानीय होटलों, ड्राइवरों, गाइडों और तकनीशियनों को रोजगार मिलता है। 'फिल्म बोर्ड' इस प्रक्रिया को प्रोफेशनल बनाएगा।
हमारा अनुरोध:
हम सरकार से सिर्फ वादे नहीं, बल्कि एक 'स्वतंत्र निकाय' (Independent Body) के रूप में फिल्म बोर्ड का गठन चाहते हैं। जो बोर्ड कलाकारों की भाषा समझे, उनकी समस्याओं को सुने और उत्तराखंड को सही मायनों में 'फिल्म हब' बनाए।
यह हमारी संस्कृति और पहचान को बचाने की आखिरी पुकार है। जब तक हमारी कहानियाँ पर्दे पर नहीं आएंगी, तब तक दुनिया हमारे पहाड़ के असली दर्द और खूबसूरती को नहीं समझ पाएगी।
कृपया इस याचिका पर हस्ताक्षर करें और हमारे सिनेमा को एक
नई दिशा दें।

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Petition created on 19 April 2026