Distance Education में Psychology को बहाल करें – लाखों विद्यार्थियों का भविष्य बचाएँ

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The Issue

UGC से तत्काल पुनर्विचार की मांग: Distance Education में Psychology पाठ्यक्रमों पर प्रतिबंध वापस लिया जाए

लाखों विद्यार्थियों के भविष्य और भारत के मानसिक स्वास्थ्य हित में एक जनअपील

माननीय UGC अध्यक्ष, शिक्षा मंत्रालय एवं भारत सरकार,

हम भारत के विद्यार्थी, शिक्षक, शोधार्थी, मनोविज्ञान विशेषज्ञ, पूर्व सैनिक, नौकरीपेशा नागरिक, गृहिणियाँ, दिव्यांगजन तथा दूरस्थ शिक्षा से जुड़े लाखों शिक्षार्थी UGC द्वारा जुलाई 2025 से Distance Education (ODL) एवं Online Mode में Psychology विषय के BA, MA एवं Diploma पाठ्यक्रमों पर लगाए गए प्रतिबंध पर पुनर्विचार की मांग करते हैं।

यह निर्णय केवल एक शैक्षणिक विषय को प्रभावित नहीं करता, बल्कि उन लाखों विद्यार्थियों के अवसरों को भी सीमित करता है जो भौगोलिक, आर्थिक, सामाजिक या व्यावसायिक कारणों से नियमित विश्वविद्यालयों में अध्ययन नहीं कर सकते।

यह मुद्दा क्यों महत्वपूर्ण है?

भारत आज मानसिक स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। तनाव, अवसाद, चिंता, नशा, पारिवारिक विघटन, विद्यार्थियों में बढ़ता मानसिक दबाव और आत्महत्या जैसी समस्याएँ समाज के सामने बड़ी चुनौती हैं। ऐसे समय में Psychology शिक्षा तक पहुंच को सीमित करना दूरगामी रूप से देश के मानसिक स्वास्थ्य तंत्र को कमजोर कर सकता है।

प्रतिबंध से प्रभावित होने वाले प्रमुख वर्ग

- ग्रामीण एवं दूरदराज क्षेत्रों के विद्यार्थी

- नौकरीपेशा युवा और कार्यरत पेशेवर

- महिलाएँ और गृहिणियाँ

- पूर्व सैनिक एवं सुरक्षा बलों के कर्मी

- दिव्यांगजन

- आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग

- उच्च शिक्षा एवं शोध में रुचि रखने वाले विद्यार्थी

इनमें से अधिकांश के लिए Distance Education ही उच्च शिक्षा प्राप्त करने का एकमात्र व्यवहारिक माध्यम है।

हमारी प्रमुख आपत्तियाँ

1. अवसरों में कमी, गुणवत्ता में नहीं

यदि उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाना है, तो समाधान पूर्ण प्रतिबंध नहीं बल्कि बेहतर नियमन होना चाहिए।

2. BA स्तर पर प्रतिबंध तर्कसंगत नहीं

स्नातक स्तर पर Psychology मुख्यतः सैद्धांतिक एवं आधारभूत विषय है। इसे Distance Mode में गुणवत्तापूर्ण ढंग से पढ़ाया जा सकता है।

3. तकनीक ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षण संभव बनाया है

ऑनलाइन कक्षाएँ, वर्चुअल लैब, डिजिटल केस स्टडी, संपर्क कक्षाएँ, प्रैक्टिकल वर्कशॉप और पर्यवेक्षित इंटर्नशिप के माध्यम से प्रभावी प्रशिक्षण दिया जा सकता है।

4. NEP 2020 के उद्देश्यों के विपरीत

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 शिक्षा को अधिक सुलभ, लचीला और समावेशी बनाने की बात करती है। Psychology को Distance Education से बाहर करना इस उद्देश्य के अनुरूप नहीं है।

हमारी मांगें

1. Psychology के BA, MA एवं Diploma पाठ्यक्रमों पर लगाए गए प्रतिबंध की तत्काल समीक्षा की जाए।

2. BA Psychology को ODL एवं Distance Mode में पुनः अनुमति दी जाए।

3. MA Psychology के लिए Hybrid Model (Online + Mandatory Practical Training) लागू किया जाए।

4. गुणवत्ता सुनिश्चित करने हेतु राष्ट्रीय स्तर पर मानक, इंटर्नशिप और प्रायोगिक प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाए।

5. किसी भी अंतिम निर्णय से पहले विद्यार्थियों, विश्वविद्यालयों, मनोविज्ञान विभागों और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों से परामर्श किया जाए।

हमारा संदेश

हम UGC और भारत सरकार से आग्रह करते हैं कि Psychology शिक्षा को प्रतिबंधित करने के बजाय उसे अधिक गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और जवाबदेह बनाया जाए।

मानसिक स्वास्थ्य संकट के इस दौर में देश को Psychology के विद्यार्थियों की आवश्यकता है, न कि उनके लिए शिक्षा के अवसरों में कटौती की।

यदि आप शिक्षा के समान अवसर, मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता और लाखों विद्यार्थियों के भविष्य का समर्थन करते हैं, तो कृपया इस याचिका पर हस्ताक्षर करें और इसे अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाएँ।

हर हस्ताक्षर एक विद्यार्थी की आशा और भारत के बेहतर मानसिक स्वास्थ्य भविष्य के समर्थन में है।

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Anil KumarPetition Starter

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UGC से तत्काल पुनर्विचार की मांग: Distance Education में Psychology पाठ्यक्रमों पर प्रतिबंध वापस लिया जाए

लाखों विद्यार्थियों के भविष्य और भारत के मानसिक स्वास्थ्य हित में एक जनअपील

माननीय UGC अध्यक्ष, शिक्षा मंत्रालय एवं भारत सरकार,

हम भारत के विद्यार्थी, शिक्षक, शोधार्थी, मनोविज्ञान विशेषज्ञ, पूर्व सैनिक, नौकरीपेशा नागरिक, गृहिणियाँ, दिव्यांगजन तथा दूरस्थ शिक्षा से जुड़े लाखों शिक्षार्थी UGC द्वारा जुलाई 2025 से Distance Education (ODL) एवं Online Mode में Psychology विषय के BA, MA एवं Diploma पाठ्यक्रमों पर लगाए गए प्रतिबंध पर पुनर्विचार की मांग करते हैं।

यह निर्णय केवल एक शैक्षणिक विषय को प्रभावित नहीं करता, बल्कि उन लाखों विद्यार्थियों के अवसरों को भी सीमित करता है जो भौगोलिक, आर्थिक, सामाजिक या व्यावसायिक कारणों से नियमित विश्वविद्यालयों में अध्ययन नहीं कर सकते।

यह मुद्दा क्यों महत्वपूर्ण है?

भारत आज मानसिक स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। तनाव, अवसाद, चिंता, नशा, पारिवारिक विघटन, विद्यार्थियों में बढ़ता मानसिक दबाव और आत्महत्या जैसी समस्याएँ समाज के सामने बड़ी चुनौती हैं। ऐसे समय में Psychology शिक्षा तक पहुंच को सीमित करना दूरगामी रूप से देश के मानसिक स्वास्थ्य तंत्र को कमजोर कर सकता है।

प्रतिबंध से प्रभावित होने वाले प्रमुख वर्ग

- ग्रामीण एवं दूरदराज क्षेत्रों के विद्यार्थी

- नौकरीपेशा युवा और कार्यरत पेशेवर

- महिलाएँ और गृहिणियाँ

- पूर्व सैनिक एवं सुरक्षा बलों के कर्मी

- दिव्यांगजन

- आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग

- उच्च शिक्षा एवं शोध में रुचि रखने वाले विद्यार्थी

इनमें से अधिकांश के लिए Distance Education ही उच्च शिक्षा प्राप्त करने का एकमात्र व्यवहारिक माध्यम है।

हमारी प्रमुख आपत्तियाँ

1. अवसरों में कमी, गुणवत्ता में नहीं

यदि उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाना है, तो समाधान पूर्ण प्रतिबंध नहीं बल्कि बेहतर नियमन होना चाहिए।

2. BA स्तर पर प्रतिबंध तर्कसंगत नहीं

स्नातक स्तर पर Psychology मुख्यतः सैद्धांतिक एवं आधारभूत विषय है। इसे Distance Mode में गुणवत्तापूर्ण ढंग से पढ़ाया जा सकता है।

3. तकनीक ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षण संभव बनाया है

ऑनलाइन कक्षाएँ, वर्चुअल लैब, डिजिटल केस स्टडी, संपर्क कक्षाएँ, प्रैक्टिकल वर्कशॉप और पर्यवेक्षित इंटर्नशिप के माध्यम से प्रभावी प्रशिक्षण दिया जा सकता है।

4. NEP 2020 के उद्देश्यों के विपरीत

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 शिक्षा को अधिक सुलभ, लचीला और समावेशी बनाने की बात करती है। Psychology को Distance Education से बाहर करना इस उद्देश्य के अनुरूप नहीं है।

हमारी मांगें

1. Psychology के BA, MA एवं Diploma पाठ्यक्रमों पर लगाए गए प्रतिबंध की तत्काल समीक्षा की जाए।

2. BA Psychology को ODL एवं Distance Mode में पुनः अनुमति दी जाए।

3. MA Psychology के लिए Hybrid Model (Online + Mandatory Practical Training) लागू किया जाए।

4. गुणवत्ता सुनिश्चित करने हेतु राष्ट्रीय स्तर पर मानक, इंटर्नशिप और प्रायोगिक प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाए।

5. किसी भी अंतिम निर्णय से पहले विद्यार्थियों, विश्वविद्यालयों, मनोविज्ञान विभागों और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों से परामर्श किया जाए।

हमारा संदेश

हम UGC और भारत सरकार से आग्रह करते हैं कि Psychology शिक्षा को प्रतिबंधित करने के बजाय उसे अधिक गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और जवाबदेह बनाया जाए।

मानसिक स्वास्थ्य संकट के इस दौर में देश को Psychology के विद्यार्थियों की आवश्यकता है, न कि उनके लिए शिक्षा के अवसरों में कटौती की।

यदि आप शिक्षा के समान अवसर, मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता और लाखों विद्यार्थियों के भविष्य का समर्थन करते हैं, तो कृपया इस याचिका पर हस्ताक्षर करें और इसे अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाएँ।

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