Save government Institute of Fine arts Indore (M.P.)


Save government Institute of Fine arts Indore (M.P.)
The Issue
शासकीय ललित कला संस्थान इंदौर, (म.प्र.) केवल मध्य प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश की सबसे महत्वपूर्ण कला संस्थाओं में से एक है. भारत की आधुनिक चित्रकला में इस संस्थान का योगदान अति महत्वपूर्ण है. इसकी स्थापना स्व. डी.डी. देवलालीकर ने सन 1927 में की थी. उनके शिष्यों में मकबूल फ़िदा हुसैन और नारायण श्रीधर बेंद्रे जैसे प्रख्यात चित्रकार शामिल रहे हैं. बेंद्रे ने 1950 में के.जी.सुब्रमण्यम के साथ बडौदा के कला महाविद्यालय की स्थापना में सहयोग किया था.
कालांतर में बडौदा के संस्थान की तो खूब प्रगति हुई किन्तु मध्य प्रदेश शासन अपने सबसे महत्वपूर्ण कला संस्थान को भूल गया. आधारभूत सुविधाओं से लेकर अकादमिक स्तर पर शासन ने इसके उत्थान में कोई रूचि नहीं ली. वर्तमान में संस्थान एक अस्थायी भवन में जो कि ललित कला या किसी भी शिक्षण संस्थान की द्रष्टि से अनुपयुक्त है, चलाया जा रहा है.
85 वर्ष से भी प्राचीन इस संस्थान को सुचारू रूप से चलाने के लिए और इसकी अधोसरंचना को विकसित करने के लिए हम आप सबसे अपील करते हैं कि इस ऑनलाइन पिटीशन पर अधिक से अधिक संख्या में हस्ताक्षर कर इस आन्दोलन को सफल बनायें. यह केवल कला संस्थान ही नहीं बल्कि एक व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र भी है जिसमें व्यावसायिक डिग्री प्रदान की जाती है, जिसका संचालन यूं जी सी के नियमों के तहत सुचारू रुप से किया जाना चाहिए.

The Issue
शासकीय ललित कला संस्थान इंदौर, (म.प्र.) केवल मध्य प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश की सबसे महत्वपूर्ण कला संस्थाओं में से एक है. भारत की आधुनिक चित्रकला में इस संस्थान का योगदान अति महत्वपूर्ण है. इसकी स्थापना स्व. डी.डी. देवलालीकर ने सन 1927 में की थी. उनके शिष्यों में मकबूल फ़िदा हुसैन और नारायण श्रीधर बेंद्रे जैसे प्रख्यात चित्रकार शामिल रहे हैं. बेंद्रे ने 1950 में के.जी.सुब्रमण्यम के साथ बडौदा के कला महाविद्यालय की स्थापना में सहयोग किया था.
कालांतर में बडौदा के संस्थान की तो खूब प्रगति हुई किन्तु मध्य प्रदेश शासन अपने सबसे महत्वपूर्ण कला संस्थान को भूल गया. आधारभूत सुविधाओं से लेकर अकादमिक स्तर पर शासन ने इसके उत्थान में कोई रूचि नहीं ली. वर्तमान में संस्थान एक अस्थायी भवन में जो कि ललित कला या किसी भी शिक्षण संस्थान की द्रष्टि से अनुपयुक्त है, चलाया जा रहा है.
85 वर्ष से भी प्राचीन इस संस्थान को सुचारू रूप से चलाने के लिए और इसकी अधोसरंचना को विकसित करने के लिए हम आप सबसे अपील करते हैं कि इस ऑनलाइन पिटीशन पर अधिक से अधिक संख्या में हस्ताक्षर कर इस आन्दोलन को सफल बनायें. यह केवल कला संस्थान ही नहीं बल्कि एक व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र भी है जिसमें व्यावसायिक डिग्री प्रदान की जाती है, जिसका संचालन यूं जी सी के नियमों के तहत सुचारू रुप से किया जाना चाहिए.

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The Decision Makers
Petition created on 12 July 2016