Action against Hate Speech during Election Campaigns

Action against Hate Speech during Election Campaigns

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Swarna Rajagopalan started this petition to Chief Election Commissioner (Election Commission of India)

March 25, 2021

Chief Election Commissioner, India

Dear Sir,

A few days ago, Mr. Dindigul I. Leoni made obnoxious misogynistic statements in his election speech supporting candidate Mr. Karthikeya Sivasenapathy's campaign for a Tamil Nadu legislative assembly seat. Political parties have not show the will to act against such behaviour so we are appealing to you to take action, not just in this instance, but by amending the Model Code of Conduct to include gendered hate speech. 

Candidates who vilify members of any gender, caste or community in the course of an election campaign, including making personal comments on their appearance or lifestyle, are not deserving of the honour of representing any of us. Their tolerance of hate speech by their supporters is an equal offence. This is also true of political parties who tolerate this culture of vilification and hate speech in their self-interest.

While the Model Code of Conduct prohibits caste or communal comments and provocations and it forbids candidates from insulting each other, it carries no such provision with respect to slurs and insults against women and gender minorities. We ask you to add such a provision, in so many words, establishing once and for all that those who speak hatefully will be penalised decisively.

It is time that misogynistic, homophobic and transphobic speech were made disqualifications for the honour of serving in our legislatures, along with histories of sexual harassment and violence. Please take action that initiates that change in our election laws.

As the Prajnya Gender Equality Election Checklist states, “Democracy without gender equality is incomplete and imperfect.” As the guardians of India’s electoral democracy, it is up to the Election Commission to introduce and promote a more gender-sensitive and inclusive election culture, by:

1.  Banning misogynistic, homophobic and transphobic speech; and

2.  Barring candidates charge-sheeted or convicted of sexual and gender-based violence and harassment.

We look to you in the hope that you will stand up for the Constitution that sees all of us as equal citizens, equally entitled to dignity. You must act because without your action, you know that the political parties that field such obnoxious candidates and "star" campaigners will not. We ask you to penalise the campaigner, the candidate and warn political parties to stop the use of offensive language.

Yours truly,

Swarna Rajagopalan 
Bader Sayeed
Sujata Mody
ACR Sudaroli

Addenda:

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मार्च 25 2021  

मुख्य चुनाव आयुक्त, भारत  

श्रीमान,

कुछ दिनों पूर्व, श्री दिंडीगुल ई. लेओनी ने चुनावी उम्मीदवार श्री कार्तिकेय शिवसेनापती के समर्थन मे उनके तमिल नाडु विधान सभा सीट की चुनावी अभियान मे कुछ अप्रिय गलत कथन दिए। राजनैतिक दलों ने इस तरहँ के बर्ताव की खिलाफत करने की इच्छा प्रकट नहीं की, इसलिए हम आपसे यह अपील कर रहे हैं की आप इसी समय, इस प्रकार के बर्ताव के खिलाफ आदर्श आचार संहिता मे अभद्र भाषा उच्चारण का संशोधन करें।

जो उम्मीदवार किसी भी सदस्य के लिंग, जाति अथवा धर्म से संबंधित उसका तिरस्कार करे या उसके रंग-रूप या रहन-सहन के ढंग के ऊपर टिप्पणी करे, उसे हमारा प्रतिनिधित्व करने का कोई अधिकार नहीं है। इस द्वेषपूर्ण भाषण का समर्थन करने वाले सदस्य भी दंड के भागी होंगे। यह बात उन राजनैतिक दलों पर भी लागू होती है, जो इस प्रकार के सांस्कृतिक तिरस्कार तथा द्वेषपूर्ण भाषण को अपने हित के लिए बर्दाश्त करते हैं।

आदर्श आचार संहिता जाति और धर्म संबंधी टिप्पणीयों तथा उत्तेजनाजनक टिप्पणीयों को प्रतिबंधित करने के साथ-साथ उम्मीदवारों को एक-दूसरे की निंदा करने पर भी रोक लगाता है। इसमे महिलाओं तथा लिंग अल्पसंख्यकों को गाली ना देने या उनकी निंदा ना करने का कोई भी प्रावधान उपलब्ध नहीं है। हमारी आपसे यह विनति है, की आप ऐसा प्रावधान तुरंत लागू करें तथा यह स्पष्ट कर दें कि कोई भी द्वेषपूर्वक भाषी हमेशा ही निर्णायक रूपी दंड का आभागी होगा।

समय या गया है कि, जो उमीदवार भ्रामक, समलैंगिकता के विरुद्ध तथा किन्नरों की विरुद्ध भाषण देते हों, उन्हें हमारे विधायकों मे सेवन करने का गौरव प्राप्त होना ही नहीं चाहिए। और जो उमीदवार यौन उत्पीड़न तथा यौन शोषण करते हैं, वे भी इस कार्य के लिए अयोग्य हैं। कृपया यह बदलाव हमारे चुनावी कानूनों मे तुरंत लागू किए जाएं।

प्रज्ञा की लिंग समानता चुनावी जांच-सूची का कथन यह कहता है कि “लिंग समानता के बिना प्रजातन्त्र अधूरा और अपूर्ण है। चुनावी आयोग को भारतीय चुनावी प्रजतंत्र के रखवाले होने के नाते निम्नलिखित नियमों को लागू कर चुनावों को लिंग संवेदनशील बनाना चाहिए।

1.  भ्रामिक, समलैंगिता तथा किन्नरों के विरुद्ध भाषणबाजी पर रोक लगाना।

2.  यौन शोषण तथा यौन उत्पीड़न से आरोपित उम्मीदवारों पर रोक लगाना।

हम आपसे यह अपेक्षा करते हैं, कि आप उस संविधान का समर्थन करेंगे जो हम सभी नागरिकों को बराबर का दर्जा और मर्यादा देता है। आप यह जानते हैं, की अगर आप आगे नहीं बढ़ेंगे तो राजनैतिक दल ऐसे अप्रिय उमीदवारों को चुनावों मे खड़ा करेंगे और अच्छे उम्मीदवार उनका समर्थन नहीं करेंगे। इसलिए हम आपसे विनति करते हैं, की आप द्वेषपूर्ण भाषा का उपयोग करने वाले उमीदवारों तथा समर्थकों को दंडित करें, और राजनैतिक दलों को आगाह करें कि ऐसी भाषा का प्रयोग ना करें, नहीं तो वे भी दंड के आभागी हो सकते हैं।

 

भवदीय

स्वर्णा राजगोपालन

बदर सईद

सुजाता मोदी

ए सी आर सुड़रोली  

         

       

    

 

 

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