एक डस्टबिन के मिलने पर आई है उनके चेहरे पर खुशी


“पैड बदलना? स्कूल में तो ये संभव ही नहीं है दीदी। मैं या तो स्कूल नहीं आती हूँ और आती हूँ तो घर जाकर ही पैड बदलती हूँ”। झारखंड के पाकुर में लिट्टीपारा स्थित खुस्मी(बदला हुआ नाम) की ये बातें सुनकर मैं हैरान थी। उसके स्कूल में सैनेटरी नैपकिन को फेंकने के लिए कोई व्यवस्था ही नहीं थी।
खुस्मी को स्कूल में 6 घंटे से ज़्यादा बिताने पड़ते हैं और स्कूल तक पहुँचने और वापस जाने में उसे साइकिल पर एक घंटे का सफर तय करना पड़ता है। इस दौरान वो अपने पैड नहीं बदल पाती है। ऐसे हालत का सामना करने के लिए खुस्मी की तरह झारखंड की बहुत सारी लड़कियों के पास एक आसान रास्ता होता है--पीरियड्स के दौरान स्कूल ही नहीं जाना।
मैंने खुस्मी और उसकी दोस्तों के साथ जुलाई के महीने में एक वर्कशॉप का आयोजन किया था, जिसमें मैंने उन्हें माहवारी से जुड़ी अहम बातों के बारे में बताया था। मैं तो वर्कशॉप लेकर चली आई पर वो लड़कियाँ आगे बढ़ गईं। उन्हें अपने स्कूल में पैड को फेंकने के लिए एक डस्टबिन चाहिए थी।
आगे के दिनों में जब बाल संसद का आयोजन हुआ तो स्कूल मैनेजमेंट कमेटी में इस समस्या पर गहन चर्चा हुई। खुस्मी ने एक रणनीति के तहत अपने दोस्तों के साथ एक अभियान सा छेड़ दिया कि उन्हें स्कूल में डस्टबिन चाहिए। इस काम में NEEDS संस्था ने उनकी मदद की।
शुरूआत में खुस्मी और उसकी दोस्तों को सफलता नहीं मिली पर उन्होंने स्कूल प्रशासन के आगे मज़बूती से अपनी मांग रखी और पीछे नहीं हटीं। उन्होंने स्कूल के प्रिसिंपल और पाकुड़ के स्वच्छता विभाग के सहायक इंजीनियर को पत्र लिखकर मदद माँगी।
अच्छी खबर ये है कि हाल ही में खुस्मी और उसकी दोस्तों को स्कूल में डस्टबिन मिल गया और जल्द ही उन्हें एक इंसीनरेटर भी मिल जाएगा। एक छोटे से प्रयास पर आपके समर्थना का ये नतीजा है, हम और आप इस तरह से झारखंड की लड़कियों को सक्षम बना रहे हैं। इस लिंक पर क्लिक कर के इस पेटीशन को शेयर करें--https://bit.ly/2PBUkhK
इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता है कि भारत के गाँवों में लड़कियाँ बस इसलिए स्कूल नहीं जा पा रही हैं क्योंकि उनके पास माहवारी से जुड़ी सेवाएं नहीं हैं, बाथरूम नहीं है। ये बहुत ज़रूरी है कि खुस्मी और उसके जैसी लाखों लड़कियों को माहवारी से जुड़ी सेवाएं प्राप्त हों ताकि ग्रामीण भारत में माहवारी को लेकर एक जागरुकता हो।
खुस्मी को अपने स्कूल की बाल संसद में स्वास्थ्य मंत्री के रूप में चुना गया है ताकि वो स्वास्थ्य और स्वच्छता जैसी समस्याओं को देख सके। खुस्मी वो वजह बन गई है जिससे अब और लड़कियों को पीरियड्स की वजह से स्कूल जाना नहीं छोड़ना पड़ेगा। बाकियों को भी दें ये खुशखबरी, इस लिंक पर क्लिक करें-https://bit.ly/2PBUkhK
आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर पत्रकारों और निर्णायकों से संपर्क करने का प्रयास करूँगी ताकि हम खुस्मी जैसी और लड़कियों का जीवन थोड़ा बेहतर बना सकें। अगर आप इस काम में किसी भी प्रकार से मेरी मदद कर सकते हैं तो कृपया मुझे ईमेल करें या कमेंट में अपने सुझाव दें।
आप सभी लोगों का दिल से धन्यवाद, आप के बिना ये सबकुछ संभव नहीं हो पाता। कृपया इस पेटीशन को अपना समर्थन देते रहें और इसे बाकी लोगों से साझा करें।
खुस्मी और उसकी दोस्त आपकी धन्यवाद करती हैं,
श्रीलेखा