Decision Maker

Manoj Kumar Jha

  • Member of Parliament, Rajya Sabha & Spokesperson RJD

Does Manoj Kumar Jha have the power to decide or influence something you want to change? Start a petition to this decision maker.Start a petition
Petitioning Narendra Modi, Amit Shah, Manoj Kumar Jha, Arvind Kejriwal, Office of the Chief Minister of Maharashtra, Manish Tewari

Provide Food and Safe Transport to Stranded Migrants during COVID-19 Lockdown

"Should we eat mud and stones here in the city? It’s better that we go back to our villages. At least there we will get to eat roti with salt." These words by a migrant labourer interviewed on TV while he was walking hundreds of kilometres to his home shook me.  All of India is struggling for normalcy in this 21-day lockdown in the wake of the Coronavirus outbreak. But the ones who are the hardest hit are the most vulnerable of us all: the migrant labourers, who work in big cities as daily wagers.  The lockdown means they’re out of work for the next 3 weeks. With no income they can’t afford food. Before the government could announce relief packages, lakhs of them with children in tow began heading back to their villages within and across state borders. On foot, as there is no public transport either. All they want is to get back safely to their homes in their village.Sign my petition asking the Central governments and state governments to coordinate a rescue and relief operation. This should include providing them  Safe transport to reach their villages Food and water camps along the route Doing so will require intense coordination across states, involving District Administrations. It is heartening to see that a few Chief Ministers have already begun reaching out to one another through social media. Chief Ministers of Uttar Pradesh (where I am from), Odisha, Jharkhand, Delhi, and Punjab are already coordinating among themselves. This rescue, relief and support operation needs to involve multiple states. Sign my petition to provide relief to stranded migrants immediately. This will be the best use of our access to social media, especially when we are unable to go out of our homes.If we don't raise our voices for these helpless Indians then who will?#HelpTheMigrants Image Credit: Adnan Abidi/Reuters

Shirin S Khan and Sunita Kumari Changemakers
433,355 supporters
Petitioning Narendra Modi, Amit Shah, Chief Ministers of All States, Manoj Kumar Jha, Office of the Chief Minister of Maharashtra, Manish Tewari

कोरोना लॉकडाउन में फंसे मज़दूरों के खाने-पीने और सुरक्षित यातायात की व्यवस्था करे सरकार

“यहाँ शहर में मिट्टी और पत्थर खाएं? बेहतर है कि हम गाँव चले जाएं। कम से कम वहाँ नमक रोटी तो खा पाएंगे।” टीवी पर एक प्रवासी मजदूर के इन शब्दों से हमारी आत्मा सिहर उठी। वो कई किलोमीटर पैदल चलकर अपने गाँव जाने की कोशिश कर रहा था। कोरोना वायरस के चलते देश में लॉकडाउन के बाद पूरा भारत हालात के सामान्य होने की प्रतीक्षा कर रहा है। इससे हर भारतीय प्रभावित है लेकिन जो सबसे ज्यादा प्रभावित हैं वो गरीब मजदूर और कामगार हैं, जो बड़े शहरों में रोज़ कमाने खाने की लड़ाई लड़ते हैं। देश में लॉकडाउन के साथ मानो इनके पेट पर भी लॉकडाउन लग गया। लॉकडाउन का मतलब है कि अगले 3 हफ्तों तक उनके पास कोई काम नहीं होगा। ना कोई आमदानी जिससे वो खाना पाएं। सरकार के राहत पैकेज की घोषणाओं से पहले ही लाखों मजदूर सिर पर बोरी और बच्चों को लादकर पैदल ही अपने गाँव की ओर निकल गए। पैदल, क्योंकि रोड पर कोई बस या सवारी नहीं। वो किसी तरह बस अपने गाँव पहुँचना चाहते हैं। मेरी पेटीशन साइन कर केंद्र और राज्य सरकारों से मांग करें कि वो प्रवासी मजदूरों के लिए साझा राहत और बचाव अभियान चलाएं। इसमें वो: 1. उन्हें सुरक्षित उनके गाँव पहुँचाने के लिए सवारी का प्रबंध करें2. रास्तों पर उनके लिए खाने-पीने के कैंप लगाए जाएं ताकि वो भूखे ना रहें ऐसा करने के लिए विभिन्न राज्यों में बेहतर तालमेल की ज़रूरत है, इसमें ज़िला प्रशासनों की भी बड़ी भूमिका होगी। ये अच्छी बात है कि कुछ राज्यों के मुख्यमंत्री पहले ही सोशल मीडिया के माध्यम से एक-दूसरे से संपर्क कर रहे हैं और मजदूरों को राहत पहुँचा रहे हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री (जहाँ से मैं खुद हूँ), ओडिशा, झारखंड, दिल्ली और पंजाब जैसे राज्य एक दूसरे से बराबर संपर्क में हैं। इस राहत और बचाव कार्य में और भी राज्यों को सक्रियता दिखानी होगी। मेरी पेटीशन साइन करें ताकि लॉकडाउन में फंसे मजदूरों को तुरंत राहत पहुँचाई जाए। जब हम घर से नहीं निकल सकते, तो कम से कम घर पर रहकर इन मजदूरों के लिए आवाज़ तो उठा सकते हैं। हमारे सोशल मीडिया का यही सबसे अच्छा उपयोग होगा कि हम उनके लिए आवाज़ उठाएं, अगर हमने ऐसा नहीं किया तो कौन करेगा? #MazdooronKiMadad Image Credit: Reuters

Shirin S Khan and Sunita Kumari Changemakers
433,355 supporters
Petitioning Shri Tejashwi Prasad Yadav, Shri Manoj Kumar Jha

RJD must ensure Lok Sabha ticket for Pasmanda icon Shri Ali Anwar Ansari

The Rashtriya Janta Dal (RJD) in Bihar which claims itself to be the champion of social justice politics has usually given a short shrift to the Most Backward Castes (MBCs), particularly the Pasmanda Muslims, in terms of ticket distribution. Historically, as far as the sphere of Muslim-Minority politics is concerned the RJD has consistently and disproportionately favored the forward caste Muslims in ticket distribution. The RJD leadership should ensure that the interests of Pasmanda (Backward/Dalit) Muslims, who constitute about 85% of Bihari Muslims, are not sacrificed during ticket distribution in the upcoming Lok Sabha elections. We are aware that political change is not effected overnight. Therefore, we demand that the RJD should at least offer a ticket to the Pasmanda icon Shri Ali Anwar Ansari (Ex-MP Rajya Sabha and President All India Pasmanda Muslim Mahaz). Shri Ansari has been a valiant grassroots activist/writer and has defended the principles of social justice and secularism throughout his career. If RJD offers a ticket to Shri Ansari then it will encourage the Pasmanda Muslim community at the national level and further strengthen the cause of social justice.    बिहार में अपने आप को सामाजिक न्याय का पैरोकार मानने वाली राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने अब तक टिकेट वितरण में अति-पिछड़ी जातियों, ख़ास तौर पर पसमांदा मुसलमानों को, लगातार नज़रंदाज़ किया है. ऐतिहासिक तौर पर जहाँ तक मुस्लिम-अल्पसंख्यक राजनीति का प्रश्न है तो राजद ने हमेशा अगड़े मुसलमानों को टिकेट वितरण में तरजीह दी. इस लोक सभा चुनाव में राजद लीडरशिप को ख्याल रखना चाहिए कि टिकेट वितरण में सिर्फ अगड़े मुसलमानों को ही नहीं बल्कि पसमांदा मुसलमानों को भी उनकी उचित हिस्सेदारी मिले. ज्ञात हो की पसमांदा मुसलमानों की आबादी बिहारी मुसलमानों में लगभग 85% है. हम जानते हैं कि रातोंरात कोई राजनीतिक बदलाव नहीं होता है. इस लिए हम यह मांग करते हैं की कम से कम इस लोक सभा चुनाव में पसमांदा नायक श्री अली अनवर अंसारी साहब (भूतपूर्व सांसद राज्य सभा एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष, पसमांदा मुस्लिम महाज़) को टिकेट ज़रूर दिया जाये. अली अनवर साहब सेकुलरिज्म और सामाजिक न्याय के ज़मीनी योद्धा हैं और पसमांदा मुसलमानों की शान हैं. अगर उनको टिकेट मिलता है तो पूरे पसमांदा समाज की हौसला अफजाई होगी और सामाजिक न्याय की राजनीति मज़बूत होगी.    

Khalid Anis Ansari
380 supporters
कोरोना लॉकडाउन में फंसे मज़दूरों के खाने-पीने और सुरक्षित यातायात की व्यवस्था करे सरकार

हमारे मज़दूर भाई-बहनों के सामूहिक पलायन का कारण अचानक हुआ लॉकडाउन था, जिसके लिए किसी को तैयारी का समय नहीं दिया गया। इससे समाज का सबसे गरीब वर्ग बुरी तरह प्रभावित है। एक तरफ सरकार ने विदेशों में फंसे लोगों को पूरी प्लानिंग और सम्मान के साथ वापस लाया तो दूसरी तरफ़ प्रवासी मज़दूरों को उनके हाल पर छोड़ दिया। भारत इस वैश्विक महामारी से उबर जाएगा पर इस लॉकडाउन से हमने जो संकट पैदा किया है वो आने वाले कई सालों तक हमारे मन को कचोटता रहेगा। अचानक से लॉकडाउन करना सरकार की दूरदृष्टि की कमी को दर्शाता है। कोई भी नीति बनाने से पहले हमें ये सोचना चाहिए कि देश के आखिरी गाँव के आखिरी इंसान पर उसका क्या असर होगा। संकट के समय, घर केवल ईंट-पत्थरों का एक मकान नहीं होता, जिसमें आप छिपना चाहते हैं। बल्कि घर एक स्थान होता है जहाँ आप खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं। घर पर होना अगर हमारे लिए ज़रूरी है तो हमारे मज़दूर भाई-बहनों के लिए भी। ये पलायन ना केवल रोज़गार छीन रहा है बल्कि लोगों की जानें भी छीन रहा है। लोग बच्चों और बुज़ुर्गों के साथ सैंकड़ों किलोमीटर चलने को मजबूर हैं और कुछ ने इस लंबी यात्रा में थककर दम दोड़ दिया है। इससे ज्यादा शर्मनाक और क्या होगा कि देश के नागरिकों के साथ ऐसा हो रहा है। सरकार प्रवासी मज़दूर शक्ति को कटघरे में खड़ा कर रही है जबकि कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकार की आपातकालीन रणनीति को कटघरे में खड़ा होना चाहिए। बरेली में उनपर केमिकल के छिड़काव से हमारे मज़दूर भाई-बहनों के साथ अमानवीयता की हदें पार हो गई हैं। क्या उन्हें बताया गया कि उनके साथ क्या होने जा रहा है? क्या उन्हें कपड़े बदलने की सुविधा दी गई? क्या सरकार समाज के अन्य वर्ग के साथ भी ऐसा बर्ताव करेगी? जब मैंने शिरीन शबाना खान और सुनीता कुमारी जी की ये पेटीशन देखी तो मैंने तुरंत इसके बारे में ट्वीट किया क्योंकि मेरा भी मानना है कि सरकार को इस मुद्दे पर एक मज़बूत रणनीति बनानी होगी। वित्त मंत्री ने आपातकालीन मदद के तौर पर 500 रुपये प्रति जन धन अकाउंट में डालने की बात कही है, ये मज़ाक है। मतलब 16.60 प्रति दिन। 16.60 रुपये में आप रोज़ क्या खरीद पाएंगे? मैं हमारे मज़दूर भाई-बहनों की हालत और उनकी तकलीफों पर प्रधानमंत्री को एक मज़बूत ज्ञापन देने जा रहा हूँ। हम कोरोना वायरस से लड़ाई में उन्हें अकेला नहीं छोड़ सकते हैं। सादर, मनोज झा सांसद (राज्य सभा), राष्ट्रीय प्रवक्ता (आरजेडी) (Image Courtesy: Reuters/Danish Siddiqui)

3 months ago
Provide Food and Safe Transport to Stranded Migrants during COVID-19 Lockdown

The mass exodus of migrant workers triggered by the sudden announcement of a lockdown with no time for anyone to prepare, has taken its toll on the poorest of the poor. While the government gave due planning and thought to bringing back people stranded in other countries, it has completely failed to include migrant workers in its emergency response. India might recover from this pandemic but the crisis we have generated through this lockdown will haunt us for years to come. The sudden lockdown was a complete lack of imagination from the government. Any policy decision should look at how it will impact the last person on the ladder. When in crisis, I strongly believe that the idea of a home is not a physical space. It is that of a psychological space. It is important for us as much as the migrant labourers. At present, that space of a home for migrant workers is under a lot of stress. Not just are livelihoods being lost, lives are being lost. People are walking with the elderly and kids for hundreds of kilometres and some of them are dropping dead. Can anything be more shameful than what we have inflicted on our own citizens? The government is criminalising the migrant workforce, while it is the government’s policy on Emergency Response for Covid-19 that should be criminalised. The spray of chemicals on migrant work force in Bareilly is just another inhuman act inflicted upon our own people. Were they told what they were subjected to? Was any facility provided for changing clothes etc.? Could the government think of the same response to any other section of people? When I saw this petition, I tweeted about it because I believe that the government must come out with a solid strategy. What the Union Finance Minister has announced as emergency aid - Rs 500/- per Jan Dhan account, is a joke. It translates to Rs. 16.60/- per day. I am making a strong representation to the Prime Minister on the condition of migrant workers and their suffering. We cannot exclude them from our Covid-19 response. Yours sincerely, Manoj K Jha, Member of Parliament, Rajya Sabha & National Spokesperson, RJD (Image Courtesy: Reuters/Danish Siddiqui)

3 months ago