संसद से गुहार: महिलाओं के मुद्दों और समस्याओं पर हर साल हो दो दिन का विशेष सत्र

समस्या

महिलाएं समाज का अभिन्न अंग हैं और हमें उनके हितों को प्राथमिकता देनी होगी, साथ ही अन्याय से उनकी रक्षा को सुनिश्चित करना होगा। ये दुर्भाग्य है कि पिछले एक दशक में हमारे देश ने महिलाओं के अधिकारों का केवल दमन देखा है। महिलाओं के हितों की रक्षा के मामले भारत ने अपनी बेटियों को निराश किया है। बहुत दुख के साथ लिख रही हूँ कि दुनिया ने हमें ‘महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित देश’ की उपाधि दी है। विश्व ने हमारे देश को ‘रेप कैपिटल ऑफ़ द वर्ल्ड’ तक कहा है।

बेसिक शिक्षा हो, वित्तीय या निजी स्वतंत्रता, भारतीय महिलाओं को हर क्षेत्र में हर बार बस दबाया ही गया है। इसपर से हमारा समाज भी महिलाओं के रास्ते में अनगिनत रोड़े अटकाता है। महिलाएं पितृसत्ता, नफ़रत और समाज के बोझ तले दब ना जाएं, इसके लिए सोच और सिस्टम दोनों में परिवर्तन की आवश्यकता है।

महिलाओं को उनके अधिकार दिलाने के लिए राजनीति एक अहम दिशा दे सकती है। देश की राजनिती महिला अधिकारों को लेकर हमारी गिरती साख को बचा सकती है।

जब तक देश की महिलाओं की आवाज़ नहीं सुनी जाएगी, उन्हें दरकिनार करते रहा जाएगा, तब तक हम एक आदर्श समाज की कल्पना ही नहीं कर पाएंगे। राजनीतिक नेतृत्व ने महिलाओं की समस्याओं के समाधान के लिए ज़रूर कुछ अच्छे निर्णय लिए हैं, पर अधिकांश महिलाएं आज भी अपनी समस्या के समाधान, अपने अधिकारों की बाट जोह रही हैं।

हम ये पेटीशन इसलिए लिख रहे हैं ताकि भारत की संसद “भारत को महिलाओं के लिए एक आदर्श देश” बनाने की दिशा में पहला कदम लेगी। हम भारतीय लोकतंत्र के सबसे बड़े अंग से उम्मीद करते हैं कि वो महिलाओं को हिंसा, भय, बहिष्कार और अपराध से मुक्त करने के लिए सामाजिक और आर्थिक बदलाव की मुहिम की अगुआई करेगी।

कृपया ये पेटीशन साइन करें और जितना हो सके शेयर करें अगर आप भारत को महिलाओं के लिए दुनिया का सबसे अच्छा देश बनाना चाहते हैं।

महिलाओं के मुद्दे सुर्खियों में रहें, उसपर चर्चा हो और राजनीति में महिलाओं के विश्वास को दुबारा स्थापित करने के लिए महिलाओं के मुद्दे और उनकी समस्याओं पर संसद में सालाना दो दिन का सत्र होना चाहिए। इस सत्र में सदन में महिलाओं की सुरक्षा, उनकी शिक्षा और उनकी स्थिति पर चर्चा हो जिससे महिला सशक्तिकरण का एक बड़ा संदेश जाएगा।

अगर महिलाओं के मुद्दों पर संसद में सालाना दो दिन का सत्र होता है तो ये ऐतिहासिक निर्णय होगा। संसदीय प्रणाली के इतिहास में महिलाओं के हितों की रक्षा के लिए ये सबसे बड़ा, सबसे अहम और सबसे ज़रूरी कदम होगा।

इस पेटीशन को साइन और शेयर करें और इतिहास में अपना नाम दर्ज कराएं।

धन्यवाद!

#NaariKe2Din 

#MahilaSansad

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Yogita Bhayanaपेटीशन स्टार्टर

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महिलाएं समाज का अभिन्न अंग हैं और हमें उनके हितों को प्राथमिकता देनी होगी, साथ ही अन्याय से उनकी रक्षा को सुनिश्चित करना होगा। ये दुर्भाग्य है कि पिछले एक दशक में हमारे देश ने महिलाओं के अधिकारों का केवल दमन देखा है। महिलाओं के हितों की रक्षा के मामले भारत ने अपनी बेटियों को निराश किया है। बहुत दुख के साथ लिख रही हूँ कि दुनिया ने हमें ‘महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित देश’ की उपाधि दी है। विश्व ने हमारे देश को ‘रेप कैपिटल ऑफ़ द वर्ल्ड’ तक कहा है।

बेसिक शिक्षा हो, वित्तीय या निजी स्वतंत्रता, भारतीय महिलाओं को हर क्षेत्र में हर बार बस दबाया ही गया है। इसपर से हमारा समाज भी महिलाओं के रास्ते में अनगिनत रोड़े अटकाता है। महिलाएं पितृसत्ता, नफ़रत और समाज के बोझ तले दब ना जाएं, इसके लिए सोच और सिस्टम दोनों में परिवर्तन की आवश्यकता है।

महिलाओं को उनके अधिकार दिलाने के लिए राजनीति एक अहम दिशा दे सकती है। देश की राजनिती महिला अधिकारों को लेकर हमारी गिरती साख को बचा सकती है।

जब तक देश की महिलाओं की आवाज़ नहीं सुनी जाएगी, उन्हें दरकिनार करते रहा जाएगा, तब तक हम एक आदर्श समाज की कल्पना ही नहीं कर पाएंगे। राजनीतिक नेतृत्व ने महिलाओं की समस्याओं के समाधान के लिए ज़रूर कुछ अच्छे निर्णय लिए हैं, पर अधिकांश महिलाएं आज भी अपनी समस्या के समाधान, अपने अधिकारों की बाट जोह रही हैं।

हम ये पेटीशन इसलिए लिख रहे हैं ताकि भारत की संसद “भारत को महिलाओं के लिए एक आदर्श देश” बनाने की दिशा में पहला कदम लेगी। हम भारतीय लोकतंत्र के सबसे बड़े अंग से उम्मीद करते हैं कि वो महिलाओं को हिंसा, भय, बहिष्कार और अपराध से मुक्त करने के लिए सामाजिक और आर्थिक बदलाव की मुहिम की अगुआई करेगी।

कृपया ये पेटीशन साइन करें और जितना हो सके शेयर करें अगर आप भारत को महिलाओं के लिए दुनिया का सबसे अच्छा देश बनाना चाहते हैं।

महिलाओं के मुद्दे सुर्खियों में रहें, उसपर चर्चा हो और राजनीति में महिलाओं के विश्वास को दुबारा स्थापित करने के लिए महिलाओं के मुद्दे और उनकी समस्याओं पर संसद में सालाना दो दिन का सत्र होना चाहिए। इस सत्र में सदन में महिलाओं की सुरक्षा, उनकी शिक्षा और उनकी स्थिति पर चर्चा हो जिससे महिला सशक्तिकरण का एक बड़ा संदेश जाएगा।

अगर महिलाओं के मुद्दों पर संसद में सालाना दो दिन का सत्र होता है तो ये ऐतिहासिक निर्णय होगा। संसदीय प्रणाली के इतिहास में महिलाओं के हितों की रक्षा के लिए ये सबसे बड़ा, सबसे अहम और सबसे ज़रूरी कदम होगा।

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