विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से निवेदन: हिंदी को स्वास्थ्य जागरूकता और जन-ज्ञान की वैश्विक

समस्या

हम, भारत और विश्वभर के हिंदी भाषी नागरिक, यह याचिका प्रस्तुत करते हैं कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) अपनी आधिकारिक वेबसाइट और स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों में हिंदी भाषा को भी शामिल करे।

हिंदी दुनिया की तीसरी सबसे अधिक बोले जाने वाली भाषा है। यह न केवल भारत की आत्मा है, बल्कि एशिया, अफ्रीका, अमेरिका और यूरोप के कई हिस्सों में भी बोली और समझी जाती है।

WHO के दिशा-निर्देशों और स्वास्थ्य सामग्री का हिंदी में अनुवाद लाखों लोगों तक जीवनरक्षक जानकारी पहुँचाने का कार्य कर सकता है। कोविड-19 महामारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि "भाषा जीवन बचा सकती है।"

हम WHO से आग्रह करते हैं कि वह:

  • हिंदी को अपनी वेबसाइट और एप्स में विकल्प के रूप में शामिल करे।
    स्वास्थ्य संबंधी दिशा-निर्देशों का हिंदी में अनुवाद प्रदान करे।
  • जागरूकता अभियानों में हिंदी को अन्य वैश्विक भाषाओं की तरह प्राथमिकता दे।
  • अब समय आ गया है कि हिंदी को उसका वैश्विक स्वास्थ्य मंच पर उचित स्थान मिले।

यहाँ एक FAQ सेक्शन है, जिसमें ऐसे आम सवालों के जवाब शामिल हैं जो लोग पूछ सकते हैं। 

 
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. क्या आप ट्रांसलेशन टूल्स का इस्तेमाल नहीं कर सकते थे?
उत्तर: ट्रांसलेशन टूल्स उपलब्ध हैं, लेकिन वे हमेशा सटीक और सांस्कृतिक रूप से उपयुक्त अनुवाद नहीं कर पाते। खासकर मेडिकल और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी में गलत अनुवाद खतरनाक हो सकता है। हमारी मांग है कि हिंदी भाषा में आधिकारिक, प्रमाणित और भरोसेमंद सामग्री उपलब्ध कराई जाए।

 
2. क्या यह सिर्फ भाषा का मामला है? क्यों पेटीशन चलानी जरूरी है?
उत्तर: यह केवल भाषा का मामला नहीं है, बल्कि अधिकार, समानता और स्वास्थ्य शिक्षा का मुद्दा है। भारत में लाखों लोग केवल हिंदी समझते हैं और उनकी पहुंच स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी तक सीमित है। इसलिए हिंदी को आधिकारिक भाषा के रूप में शामिल करना जरूरी है।

 
3. क्या ट्रांसलेशन टूल्स से काम नहीं चल सकता?
उत्तर: ट्रांसलेशन टूल्स से काम चलना मुश्किल है क्योंकि वे भाव, संदर्भ और तकनीकी शब्दावली को सही तरीके से अनुवादित नहीं कर पाते। इससे गलतफहमी और भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है, जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकती है।

 
4. क्या आपकी मांग सरकारी संस्थानों को अतिरिक्त बोझ नहीं देगी?
उत्तर: हमारी मांग स्वास्थ्य सेवा को सभी के लिए सुलभ बनाने की है। हिंदी भाषा को आधिकारिक रूप से शामिल करने से स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच बढ़ेगी और गलतफहमियों से बचाव होगा। यह लंबे समय में स्वस्थ समाज और सरकारी तंत्र के लिए फायदेमंद होगा।

 
5. क्या इस पहल से हिंदी भाषी क्षेत्र के लोगों को फायदा होगा?
उत्तर: बिल्कुल। यह पहल हिंदी भाषी लोगों को स्वास्थ्य सेवा की सही जानकारी सीधे उनकी भाषा में उपलब्ध कराएगी, जिससे वे बेहतर निर्णय ले सकेंगे और स्वास्थ्य संबंधित सेवाओं का सही लाभ उठा सकेंगे।

 
6. क्या यह पहल केवल हिंदी भाषा तक सीमित है?
उत्तर: फिलहाल यह पहल हिंदी भाषा पर केंद्रित है क्योंकि हिंदी भारत की सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। भविष्य में अन्य भाषाओं के लिए भी समान अधिकार और सुविधा की मांग की जा सकती है।

 
7. क्या आपकी यह पहल केवल ऑनलाइन सूचना के लिए है या ऑफलाइन भी लागू होगी?
उत्तर: हमारी मांग स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी सभी जानकारियों के लिए है, चाहे वह ऑनलाइन हो या ऑफलाइन। दोनों ही माध्यमों पर हिंदी में स्पष्ट और भरोसेमंद जानकारी उपलब्ध होनी चाहिए।

 
8. अगर आपकी मांग पूरी हो जाती है, तो क्या इससे भाषा की गुणवत्ता प्रभावित होगी?
उत्तर: नहीं। हमारा उद्देश्य उच्च गुणवत्ता वाली, प्रमाणित और स्पष्ट हिंदी सामग्री उपलब्ध कराना है, जिससे सभी को सही और भरोसेमंद जानकारी मिले।

 
अगर आपके पास और सवाल हैं, तो आप हमें यहाँ कमेंट कर सकते हैं या संपर्क कर सकते हैं। हम आपकी सहायता के लिए हमेशा तैयार हैं।

avatar of the starter
Ajay Rajputपेटीशन स्टार्टर28 दिसंबर 1979 को भारत के मध्य प्रेदश के ह्रदय नगर इटारसी में जन्म | शैक्षणिक गतिविधि के अंतर्गत पॉलीटेक्निक में 2001 मैकेनिकल इंजीनियर में डिप्लोमा, ई-कामर्स व बैचलर स्नातक | 2003 से 2009 तक टेलीकॉम सेक्टर में सेवाकार्य | सामाजिक क्षेत्रों में कार्यरत|

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समस्या

हम, भारत और विश्वभर के हिंदी भाषी नागरिक, यह याचिका प्रस्तुत करते हैं कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) अपनी आधिकारिक वेबसाइट और स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों में हिंदी भाषा को भी शामिल करे।

हिंदी दुनिया की तीसरी सबसे अधिक बोले जाने वाली भाषा है। यह न केवल भारत की आत्मा है, बल्कि एशिया, अफ्रीका, अमेरिका और यूरोप के कई हिस्सों में भी बोली और समझी जाती है।

WHO के दिशा-निर्देशों और स्वास्थ्य सामग्री का हिंदी में अनुवाद लाखों लोगों तक जीवनरक्षक जानकारी पहुँचाने का कार्य कर सकता है। कोविड-19 महामारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि "भाषा जीवन बचा सकती है।"

हम WHO से आग्रह करते हैं कि वह:

  • हिंदी को अपनी वेबसाइट और एप्स में विकल्प के रूप में शामिल करे।
    स्वास्थ्य संबंधी दिशा-निर्देशों का हिंदी में अनुवाद प्रदान करे।
  • जागरूकता अभियानों में हिंदी को अन्य वैश्विक भाषाओं की तरह प्राथमिकता दे।
  • अब समय आ गया है कि हिंदी को उसका वैश्विक स्वास्थ्य मंच पर उचित स्थान मिले।

यहाँ एक FAQ सेक्शन है, जिसमें ऐसे आम सवालों के जवाब शामिल हैं जो लोग पूछ सकते हैं। 

 
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. क्या आप ट्रांसलेशन टूल्स का इस्तेमाल नहीं कर सकते थे?
उत्तर: ट्रांसलेशन टूल्स उपलब्ध हैं, लेकिन वे हमेशा सटीक और सांस्कृतिक रूप से उपयुक्त अनुवाद नहीं कर पाते। खासकर मेडिकल और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी में गलत अनुवाद खतरनाक हो सकता है। हमारी मांग है कि हिंदी भाषा में आधिकारिक, प्रमाणित और भरोसेमंद सामग्री उपलब्ध कराई जाए।

 
2. क्या यह सिर्फ भाषा का मामला है? क्यों पेटीशन चलानी जरूरी है?
उत्तर: यह केवल भाषा का मामला नहीं है, बल्कि अधिकार, समानता और स्वास्थ्य शिक्षा का मुद्दा है। भारत में लाखों लोग केवल हिंदी समझते हैं और उनकी पहुंच स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी तक सीमित है। इसलिए हिंदी को आधिकारिक भाषा के रूप में शामिल करना जरूरी है।

 
3. क्या ट्रांसलेशन टूल्स से काम नहीं चल सकता?
उत्तर: ट्रांसलेशन टूल्स से काम चलना मुश्किल है क्योंकि वे भाव, संदर्भ और तकनीकी शब्दावली को सही तरीके से अनुवादित नहीं कर पाते। इससे गलतफहमी और भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है, जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकती है।

 
4. क्या आपकी मांग सरकारी संस्थानों को अतिरिक्त बोझ नहीं देगी?
उत्तर: हमारी मांग स्वास्थ्य सेवा को सभी के लिए सुलभ बनाने की है। हिंदी भाषा को आधिकारिक रूप से शामिल करने से स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच बढ़ेगी और गलतफहमियों से बचाव होगा। यह लंबे समय में स्वस्थ समाज और सरकारी तंत्र के लिए फायदेमंद होगा।

 
5. क्या इस पहल से हिंदी भाषी क्षेत्र के लोगों को फायदा होगा?
उत्तर: बिल्कुल। यह पहल हिंदी भाषी लोगों को स्वास्थ्य सेवा की सही जानकारी सीधे उनकी भाषा में उपलब्ध कराएगी, जिससे वे बेहतर निर्णय ले सकेंगे और स्वास्थ्य संबंधित सेवाओं का सही लाभ उठा सकेंगे।

 
6. क्या यह पहल केवल हिंदी भाषा तक सीमित है?
उत्तर: फिलहाल यह पहल हिंदी भाषा पर केंद्रित है क्योंकि हिंदी भारत की सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। भविष्य में अन्य भाषाओं के लिए भी समान अधिकार और सुविधा की मांग की जा सकती है।

 
7. क्या आपकी यह पहल केवल ऑनलाइन सूचना के लिए है या ऑफलाइन भी लागू होगी?
उत्तर: हमारी मांग स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी सभी जानकारियों के लिए है, चाहे वह ऑनलाइन हो या ऑफलाइन। दोनों ही माध्यमों पर हिंदी में स्पष्ट और भरोसेमंद जानकारी उपलब्ध होनी चाहिए।

 
8. अगर आपकी मांग पूरी हो जाती है, तो क्या इससे भाषा की गुणवत्ता प्रभावित होगी?
उत्तर: नहीं। हमारा उद्देश्य उच्च गुणवत्ता वाली, प्रमाणित और स्पष्ट हिंदी सामग्री उपलब्ध कराना है, जिससे सभी को सही और भरोसेमंद जानकारी मिले।

 
अगर आपके पास और सवाल हैं, तो आप हमें यहाँ कमेंट कर सकते हैं या संपर्क कर सकते हैं। हम आपकी सहायता के लिए हमेशा तैयार हैं।

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Ajay Rajputपेटीशन स्टार्टर28 दिसंबर 1979 को भारत के मध्य प्रेदश के ह्रदय नगर इटारसी में जन्म | शैक्षणिक गतिविधि के अंतर्गत पॉलीटेक्निक में 2001 मैकेनिकल इंजीनियर में डिप्लोमा, ई-कामर्स व बैचलर स्नातक | 2003 से 2009 तक टेलीकॉम सेक्टर में सेवाकार्य | सामाजिक क्षेत्रों में कार्यरत|

फैसला लेने वाले

Dr. Tedros Adhanom Ghebreyesus
Dr. Tedros Adhanom Ghebreyesus
Director-General, WHO
पेटीशन अपडेट