

उत्तर प्रदेश के पुलिस थानों में पुलिस हिरासत में हो रही मौतों पर कब लगेगी लगाम?
समस्या
UP बना क्राइम कैपिटल : हर साल 400 लोगों की पुलिस कस्टडी में मौतें, NHRC की रिपोर्ट में हुआ खुलासा, हत्या-अपहरण में देश में नंबर-1
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो यानी NCRB की रिपोर्ट से पता चलता है कि देश में क़त्ल यानी हत्या के मामले सबसे ज़्यादा उत्तर प्रदेश में है. साल 2020 में यूपी में मर्डर के कुल 3779 मामले दर्ज हुए. यानी प्रति दिन औसतन 11 लोगों की हत्या हो रही है. ये है उत्तम प्रदेश का दावा करने वाले
Uttar Pradesh Crime news : उत्तर प्रदेश और जुर्म दोनों का पुराना रिश्ता है. चाहे वो क़त्ल हो या फिर महिलाओं के ख़िलाफ जुर्म. कई मामलों में उत्तर प्रदेश दूसरे राज्यों से टॉप पर है. हाल में ही यूपी के गोरखपुर (Gorakhpur news) में कानपुर के कारोबारी मनीष गुप्ता (Kanpur Manish Gupta Murder case) की बर्बरता से जिस तरह से एक तरह से पुलिस हिरासत में हत्या हुई, उसने पूरे प्रदेश की कानून-व्यवस्था की पोल खोल दी है.
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग यानी NHRC की हाल में आई एक रिपोर्ट उत्तर प्रदेश में ख़ाकी वर्दी की दरिंदगी की असलियत उजागर करने के लिए काफी है. देश में अगर सबसे ज्यादा किसी राज्य में पुलिस हिरासत में मौत होती है, तो वो है उत्तर प्रदेश.
प्रति दिन पुलिस हिरासत में 5 मौतें
हर साल उत्तर प्रदेश में औसतन 400 लोगों की पुलिस हिरासत में मौत हो रही है. हाल में ही मार्च 2021 में लोकसभा में तत्कालीन केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने एक रिपोर्ट पेश की थी. वो रिपोर्ट बताती है कि देश में पुलिस हिरासत में रोज़ाना 5 लोगों की मौत हो रही है.
इस रिपोर्ट में बताया गया है कि साल 2020 से 28 फरवरी 2021 तक देशभर में कुल 1645 मौतें हुईं हैं. इनमें सबसे ज़्यादा पुलिस कस्टडी में उत्तर प्रदेश में मौतें हुईं. रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में एक साल के भीतर कुल 398 मौतें हुईं.
इनमें 3 पुलिस कस्टडी और 395 ज्यूडिशयल कस्टडी में मौत शामिल हैं. यहां पुलिस हिरासत का मतलब ये होता है कि अगर किसी को शक़ के आधार पर पुलिस हिरासत में लिया जाए और कोर्ट में पेश करने से पहले ही उसकी मौत हो जाए.
वहीं, न्यायिक हिरासत में मौत का मतलब ये होता है कि आरोपी को कोर्ट में पेश करने के बाद चाहे वो जेल में रहे या फिर कोर्ट से जेल के बीच आवाजाही के दौरान उसकी जान चली जाए. दोनों दशा में ज्यूडिशियल यानी न्यायिक हिरासत में मौत माना जाता है.
NHRC की रिपोर्ट में UP में मौत के आंकड़ें
साल पुलिस हिरासत (मौत) ज्यूडिशियल (मौत)
2017-18 10 390
2018-19 12 452
2019-2020 03 400
2020-2021 03 395
(फरवरी)
NCRB के आंकड़ों में सिर्फ़ 1 मौत
NHRC यानी राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की जिस रिपोर्ट में यूपी में रोज़ाना पुलिस हिरासत में 1 लोगों की मौत की बात सामने आती हैं वहीं पुलिस की लिखापढ़ी वाले रिकॉर्ड में साल 2020 में सिर्फ 1 मौत की रिपोर्ट है. ये आंकड़ा NCRB यानी नेशनल रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट में है. इस रिपोर्ट को हर साल केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से जारी किया जाता है. इसमें वही रिकॉर्ड होता है देश के थाने स्तर पर रिकॉर्ड में दर्ज किया जाता है.
2020 में पुलिस हिरासत में हुई एक की मौत को रिमांड के दौरान आत्महत्या करने की रिपोर्ट है. यानी पूरे साल में सिर्फ एक मौत होती है. लेकिन मानवाधिकार की रिपोर्ट जिसे देश की संसद में पेश किया गया, उसमें बिल्कुल अलग आंकड़े हैं. दोनों रिपोर्ट से ये बात तो साफ है कि उत्तर प्रदेश में पुलिस हिरासत में होने वाली मौत के आंकड़ों को किसी ना किसी रूप में छुपा दिया जाता है.
गोरखपुर में पुलिसवालों का आतंक : आधी रात में चेकिंग करने आए तो इस शख्स ने पूछा, आतंकी हैं क्या? फिर राइफल की बट से पीटकर मार डाला
UP देश का क्राइम कैपिटल
UP में 3 साल के क्राइम के आंकड़े
साल 2018 2019 2020
हत्या 4018 3806 3779
रेप 4322 3131 2796
महिला 59445 59853 49385
अपहरण 21711 16590 12913
इन क्राइम में नंबर-1 है UP
1- हत्या :
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो यानी NCRB की रिपोर्ट से पता चलता है कि देश में क़त्ल यानी हत्या के मामले सबसे ज़्यादा उत्तर प्रदेश में है. साल 2020 में यूपी में मर्डर के कुल 3779 मामले दर्ज हुए. यानी प्रति दिन औसतन 11 लोगों की हत्या हो रही है. ये है उत्तम प्रदेश का दावा करने वाले राज्य की असलियत.
Gorakhpur Murder : मृत कारोबारी की पत्नी से बेटा बार-बार पूछ रहा है पापा कहां हैं, कब आएंगे? "विनय कुमार पांडे एडवोकेट मानवाधिकार कार्यकर्ता एवंंंंंं उत्तर प्रदेश के समस्त पुलिस थानों में सीसीटीवीी कैमरा लगवानेे वाले अधिवक्ता" जिलाा एवं सत्र न्यायालय जनपद महाराजगंज उत्तर प्रदेश मोबाइल नंबर 98 399 24605

समस्या
UP बना क्राइम कैपिटल : हर साल 400 लोगों की पुलिस कस्टडी में मौतें, NHRC की रिपोर्ट में हुआ खुलासा, हत्या-अपहरण में देश में नंबर-1
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो यानी NCRB की रिपोर्ट से पता चलता है कि देश में क़त्ल यानी हत्या के मामले सबसे ज़्यादा उत्तर प्रदेश में है. साल 2020 में यूपी में मर्डर के कुल 3779 मामले दर्ज हुए. यानी प्रति दिन औसतन 11 लोगों की हत्या हो रही है. ये है उत्तम प्रदेश का दावा करने वाले
Uttar Pradesh Crime news : उत्तर प्रदेश और जुर्म दोनों का पुराना रिश्ता है. चाहे वो क़त्ल हो या फिर महिलाओं के ख़िलाफ जुर्म. कई मामलों में उत्तर प्रदेश दूसरे राज्यों से टॉप पर है. हाल में ही यूपी के गोरखपुर (Gorakhpur news) में कानपुर के कारोबारी मनीष गुप्ता (Kanpur Manish Gupta Murder case) की बर्बरता से जिस तरह से एक तरह से पुलिस हिरासत में हत्या हुई, उसने पूरे प्रदेश की कानून-व्यवस्था की पोल खोल दी है.
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग यानी NHRC की हाल में आई एक रिपोर्ट उत्तर प्रदेश में ख़ाकी वर्दी की दरिंदगी की असलियत उजागर करने के लिए काफी है. देश में अगर सबसे ज्यादा किसी राज्य में पुलिस हिरासत में मौत होती है, तो वो है उत्तर प्रदेश.
प्रति दिन पुलिस हिरासत में 5 मौतें
हर साल उत्तर प्रदेश में औसतन 400 लोगों की पुलिस हिरासत में मौत हो रही है. हाल में ही मार्च 2021 में लोकसभा में तत्कालीन केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने एक रिपोर्ट पेश की थी. वो रिपोर्ट बताती है कि देश में पुलिस हिरासत में रोज़ाना 5 लोगों की मौत हो रही है.
इस रिपोर्ट में बताया गया है कि साल 2020 से 28 फरवरी 2021 तक देशभर में कुल 1645 मौतें हुईं हैं. इनमें सबसे ज़्यादा पुलिस कस्टडी में उत्तर प्रदेश में मौतें हुईं. रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में एक साल के भीतर कुल 398 मौतें हुईं.
इनमें 3 पुलिस कस्टडी और 395 ज्यूडिशयल कस्टडी में मौत शामिल हैं. यहां पुलिस हिरासत का मतलब ये होता है कि अगर किसी को शक़ के आधार पर पुलिस हिरासत में लिया जाए और कोर्ट में पेश करने से पहले ही उसकी मौत हो जाए.
वहीं, न्यायिक हिरासत में मौत का मतलब ये होता है कि आरोपी को कोर्ट में पेश करने के बाद चाहे वो जेल में रहे या फिर कोर्ट से जेल के बीच आवाजाही के दौरान उसकी जान चली जाए. दोनों दशा में ज्यूडिशियल यानी न्यायिक हिरासत में मौत माना जाता है.
NHRC की रिपोर्ट में UP में मौत के आंकड़ें
साल पुलिस हिरासत (मौत) ज्यूडिशियल (मौत)
2017-18 10 390
2018-19 12 452
2019-2020 03 400
2020-2021 03 395
(फरवरी)
NCRB के आंकड़ों में सिर्फ़ 1 मौत
NHRC यानी राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की जिस रिपोर्ट में यूपी में रोज़ाना पुलिस हिरासत में 1 लोगों की मौत की बात सामने आती हैं वहीं पुलिस की लिखापढ़ी वाले रिकॉर्ड में साल 2020 में सिर्फ 1 मौत की रिपोर्ट है. ये आंकड़ा NCRB यानी नेशनल रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट में है. इस रिपोर्ट को हर साल केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से जारी किया जाता है. इसमें वही रिकॉर्ड होता है देश के थाने स्तर पर रिकॉर्ड में दर्ज किया जाता है.
2020 में पुलिस हिरासत में हुई एक की मौत को रिमांड के दौरान आत्महत्या करने की रिपोर्ट है. यानी पूरे साल में सिर्फ एक मौत होती है. लेकिन मानवाधिकार की रिपोर्ट जिसे देश की संसद में पेश किया गया, उसमें बिल्कुल अलग आंकड़े हैं. दोनों रिपोर्ट से ये बात तो साफ है कि उत्तर प्रदेश में पुलिस हिरासत में होने वाली मौत के आंकड़ों को किसी ना किसी रूप में छुपा दिया जाता है.
गोरखपुर में पुलिसवालों का आतंक : आधी रात में चेकिंग करने आए तो इस शख्स ने पूछा, आतंकी हैं क्या? फिर राइफल की बट से पीटकर मार डाला
UP देश का क्राइम कैपिटल
UP में 3 साल के क्राइम के आंकड़े
साल 2018 2019 2020
हत्या 4018 3806 3779
रेप 4322 3131 2796
महिला 59445 59853 49385
अपहरण 21711 16590 12913
इन क्राइम में नंबर-1 है UP
1- हत्या :
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो यानी NCRB की रिपोर्ट से पता चलता है कि देश में क़त्ल यानी हत्या के मामले सबसे ज़्यादा उत्तर प्रदेश में है. साल 2020 में यूपी में मर्डर के कुल 3779 मामले दर्ज हुए. यानी प्रति दिन औसतन 11 लोगों की हत्या हो रही है. ये है उत्तम प्रदेश का दावा करने वाले राज्य की असलियत.
Gorakhpur Murder : मृत कारोबारी की पत्नी से बेटा बार-बार पूछ रहा है पापा कहां हैं, कब आएंगे? "विनय कुमार पांडे एडवोकेट मानवाधिकार कार्यकर्ता एवंंंंंं उत्तर प्रदेश के समस्त पुलिस थानों में सीसीटीवीी कैमरा लगवानेे वाले अधिवक्ता" जिलाा एवं सत्र न्यायालय जनपद महाराजगंज उत्तर प्रदेश मोबाइल नंबर 98 399 24605

फैसला लेने वाले
पेटीशन अपडेट
पेटीशन को शेयर करें
13 नवंबर 2021 पर पेटीशन बनाई गई