

कृपया रेलवे के अग्रिम अारक्षण की समयसीमा को 120 दिन से घटा कर 30 दिन करें।
समस्या
भारतीय रेलवे ने पहले अग्रिम अारक्षण के नियम को 60 दिन से बढ़ाकर 120 दिन किया अौर अब टिकट रद्द करने का शुल्क दोगुना कर दिया है।
अापको पता है क्यों? दरअसल रेलवे के अफसरों ने इसकी योजना काफी पहले ही बना ली थी क्योंकि उन्हें पता था कि 95 % यात्री 120 दिन पहले अपनी यात्रा का कार्यक्रम कतई निर्धारित नहीं कर सकेंगे लिहाजा टिकट रद्द करने की रफ्तार बढ़ेगी। जिससे रेलवे को टिकट रद्दीकरण के मद में भारी अाय होगी।
क्या अाप 120 दिन यानी 4 माह पहले अपनी यात्रा का कार्यक्रम बना सकते हैं? क्या किसी कर्मचारी का बॉस 4 माह पहले उसकी छुट्टी की मंजूरी दे सकता है? ऐसा बिल्कुल संभव नहीं, फिर भी अापके पास 4 माह पहले रेल टिकट अारक्षित करवाने के अलावा कोई अौर विकल्प नहीं वरना अापको सुनिश्चित (कंफर्म) टिकट नहीं मिलेगा। यहीं पर असली खेल शुरू होता है। रेलवे के लिए कमाई पर कमाई।
12 नवंबर 2015 से रेलवे ने टिकट रद्द करने का शुल्क बढ़ा कर दोगुना कर दिया है और 24 दिसम्बर 2015 से तत्काल आरक्षण का शुल्क भी दोगुना कर दिया है। जानते हैं क्यों? ताकि रद्दीकरण और तत्काल टिकट के रास्ते दोहरी कमाई की जा सके। अगर अाप 4 माह पहले रेलवे का टिकट बुक कर रहे हैं तो इसकी 95 % संभावना है कि अाप अगले 4 माह में उसे रद्द कर देंगे अौर उस सेवा के लिए ज्यादा भुगतान करने को विवश होंगे जिसका अापने इस्तेमाल ही नहीं किया!
रेलवे का उद्देश्य लोगों की सेवा करना था अौर न कि कमाई करना लेकिन अब हो उलटा रहा है। यदि अग्रिम अारक्षण सिर्फ 30 दिन पहले खोला जाए तो लाखों रेल यात्रियों को इसका लाभ मिलेगा अौर टिकट भी कम रद्द होंगे। हम सभी अपनी यात्रा की सही तरह से योजना बना पाएँगे न कि अऩुमान के अाधार पर अग्रिम अारक्षण करवाया करेंगे।
“वही लोग टिकट बुक करेंगे जिन्हें वाकई यात्रा करनी है अौर न कि वे जो सोचते हैं कि चलो यार बुक कर लेते हैं अौर अगर नहीं गए तो रद्द कर देंगे।”
माननीय रेल मंत्री से मेरी मांग है कि :
1. रेलवे के अग्रिम अारक्षण की समयसीमा को घटा कर 120 दिन से 30 दिन किया जाए
2. टिकट रद्द करने के शुल्क में दोगुनी बढ़ोतरी को वापस लिया जाए
कृपया मेरी याचिका पर हस्ताक्षर करके समर्थन करें, ट्विटर, मूषक, व्हाट्स एप , हाइक और फेसबुक आदि सामाजिक संचार माध्यमों पर इसे साझा करना ना भूलें, याचिका पर 50,000 हस्ताक्षर हो जाने पर इसे माननीय रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभु एवं अध्यक्ष, रेलवे बोर्ड को प्रस्तुत किया जाएगा।
आपका एक हस्ताक्षर न केवल इस मनमाने फैसले पर रोक लगाएगा बल्कि आने वाले समय में रेलवे के द्वारा लिए जाने वाले जनहित विरोधी फैसलों पर भी रोक लगा सकता है।

समस्या
भारतीय रेलवे ने पहले अग्रिम अारक्षण के नियम को 60 दिन से बढ़ाकर 120 दिन किया अौर अब टिकट रद्द करने का शुल्क दोगुना कर दिया है।
अापको पता है क्यों? दरअसल रेलवे के अफसरों ने इसकी योजना काफी पहले ही बना ली थी क्योंकि उन्हें पता था कि 95 % यात्री 120 दिन पहले अपनी यात्रा का कार्यक्रम कतई निर्धारित नहीं कर सकेंगे लिहाजा टिकट रद्द करने की रफ्तार बढ़ेगी। जिससे रेलवे को टिकट रद्दीकरण के मद में भारी अाय होगी।
क्या अाप 120 दिन यानी 4 माह पहले अपनी यात्रा का कार्यक्रम बना सकते हैं? क्या किसी कर्मचारी का बॉस 4 माह पहले उसकी छुट्टी की मंजूरी दे सकता है? ऐसा बिल्कुल संभव नहीं, फिर भी अापके पास 4 माह पहले रेल टिकट अारक्षित करवाने के अलावा कोई अौर विकल्प नहीं वरना अापको सुनिश्चित (कंफर्म) टिकट नहीं मिलेगा। यहीं पर असली खेल शुरू होता है। रेलवे के लिए कमाई पर कमाई।
12 नवंबर 2015 से रेलवे ने टिकट रद्द करने का शुल्क बढ़ा कर दोगुना कर दिया है और 24 दिसम्बर 2015 से तत्काल आरक्षण का शुल्क भी दोगुना कर दिया है। जानते हैं क्यों? ताकि रद्दीकरण और तत्काल टिकट के रास्ते दोहरी कमाई की जा सके। अगर अाप 4 माह पहले रेलवे का टिकट बुक कर रहे हैं तो इसकी 95 % संभावना है कि अाप अगले 4 माह में उसे रद्द कर देंगे अौर उस सेवा के लिए ज्यादा भुगतान करने को विवश होंगे जिसका अापने इस्तेमाल ही नहीं किया!
रेलवे का उद्देश्य लोगों की सेवा करना था अौर न कि कमाई करना लेकिन अब हो उलटा रहा है। यदि अग्रिम अारक्षण सिर्फ 30 दिन पहले खोला जाए तो लाखों रेल यात्रियों को इसका लाभ मिलेगा अौर टिकट भी कम रद्द होंगे। हम सभी अपनी यात्रा की सही तरह से योजना बना पाएँगे न कि अऩुमान के अाधार पर अग्रिम अारक्षण करवाया करेंगे।
“वही लोग टिकट बुक करेंगे जिन्हें वाकई यात्रा करनी है अौर न कि वे जो सोचते हैं कि चलो यार बुक कर लेते हैं अौर अगर नहीं गए तो रद्द कर देंगे।”
माननीय रेल मंत्री से मेरी मांग है कि :
1. रेलवे के अग्रिम अारक्षण की समयसीमा को घटा कर 120 दिन से 30 दिन किया जाए
2. टिकट रद्द करने के शुल्क में दोगुनी बढ़ोतरी को वापस लिया जाए
कृपया मेरी याचिका पर हस्ताक्षर करके समर्थन करें, ट्विटर, मूषक, व्हाट्स एप , हाइक और फेसबुक आदि सामाजिक संचार माध्यमों पर इसे साझा करना ना भूलें, याचिका पर 50,000 हस्ताक्षर हो जाने पर इसे माननीय रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभु एवं अध्यक्ष, रेलवे बोर्ड को प्रस्तुत किया जाएगा।
आपका एक हस्ताक्षर न केवल इस मनमाने फैसले पर रोक लगाएगा बल्कि आने वाले समय में रेलवे के द्वारा लिए जाने वाले जनहित विरोधी फैसलों पर भी रोक लगा सकता है।

फैसला लेने वाले
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4 दिसंबर 2015 पर पेटीशन बनाई गई