प्राइवेट अस्पतालों के शुल्क को सरकारी अस्पतालों से 20 प्रतिशत से अधिक ना होने दिया जाए


प्राइवेट अस्पतालों के शुल्क को सरकारी अस्पतालों से 20 प्रतिशत से अधिक ना होने दिया जाए
समस्या
मेरी कहानी
सरकारी हॉस्पिटल केम हॉस्पिटल और वाडिया हॉस्पिटल में आईसीयू बेड उपलब्ध न होने कारण
अपने निमोनिया के रोगी बेटे को केजे सोमैया हॉस्पिटल में एडमिट करने की है, जहां हमें प्रतिदिन 15000 से 25000 रुपए खर्च करने पड़े। जबकि सरकारी अस्पताल में वही खर्च शायद ही 50 हजार रुपए पूरे होते।
प्राइवेट अस्पतालों के उच्च शुल्क हमारे देश के गरीब और मध्यवर्गीय परिवारों को ज्यादा प्रभावित करते हैं। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारी सरकार प्राइवेट अस्पतालों के शुल्क की निगरानी करे ताकि वे सरकारी अस्पतालों की तुलना में 20 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हों।
मैं आवेदन करता हूं कि हमारी सरकार एक ऐसा कानून पारित करे जो इसे अनिवार्य बनाए कि प्राइवेट अस्पतालों के शुल्क सरकारी अस्पतालों के शुल्क से 20 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हों। इस पेटीशन का समर्थन करें और हमारे बच्चों के अधिकारों के लिए खड़े होने में मदद करें। यह पेटीशन पर हस्ताक्षर करें।

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समस्या
मेरी कहानी
सरकारी हॉस्पिटल केम हॉस्पिटल और वाडिया हॉस्पिटल में आईसीयू बेड उपलब्ध न होने कारण
अपने निमोनिया के रोगी बेटे को केजे सोमैया हॉस्पिटल में एडमिट करने की है, जहां हमें प्रतिदिन 15000 से 25000 रुपए खर्च करने पड़े। जबकि सरकारी अस्पताल में वही खर्च शायद ही 50 हजार रुपए पूरे होते।
प्राइवेट अस्पतालों के उच्च शुल्क हमारे देश के गरीब और मध्यवर्गीय परिवारों को ज्यादा प्रभावित करते हैं। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारी सरकार प्राइवेट अस्पतालों के शुल्क की निगरानी करे ताकि वे सरकारी अस्पतालों की तुलना में 20 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हों।
मैं आवेदन करता हूं कि हमारी सरकार एक ऐसा कानून पारित करे जो इसे अनिवार्य बनाए कि प्राइवेट अस्पतालों के शुल्क सरकारी अस्पतालों के शुल्क से 20 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हों। इस पेटीशन का समर्थन करें और हमारे बच्चों के अधिकारों के लिए खड़े होने में मदद करें। यह पेटीशन पर हस्ताक्षर करें।

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फैसला लेने वाले
19 अक्टूबर 2024 पर पेटीशन बनाई गई