झारखण्ड में समाप्त न हो शास्त्रीय संगीत की "विशारद" एवं "प्रभाकर" की डिग्री


झारखण्ड में समाप्त न हो शास्त्रीय संगीत की "विशारद" एवं "प्रभाकर" की डिग्री
समस्या
सेवा में ,
श्री हेमंत सोरेन
माननीय मुख्यमंत्री
झारखण्ड
महाशय ,
सविनय निवेदन है की 4 जून को 2020 को प्रकाशित जमशेदपुर के दैनिक अख़बार “प्रभात खबर” से प्रकाशित एक खबर में झारखण्ड के शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी आदेश में प्रयाग संगीत समिति , प्रयागराज एवं प्राचीन कला केंद्र , चंडीगढ़ से प्राप्त “विशारद” डिग्री को “फर्जी” कहा गया है I इस खबर से पुरे झारखण्ड के लगभग 50,000 कलाकार गण काफी हतप्रभ एवं दुखी है जहाँ पुरे देश में इसकी मान्यता है सिर्फ अपने राज्य में ही क्यों डिग्री को फर्जी कहा गया एवं किन तथ्यों के आधार पर यह कहा गया है ?
विगत 40 -50 वर्षों से झारखण्ड ही नहीं पुरे देश में विद्यालयों एवं विश्व विद्यालयों में इन दोनों देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के डिग्री के आधार पर संगीत के गुरुजन अपनी सेवा दे चुके है और आज भी निरंतर अपनी सेवा दे रहे है . पुरे देश में इन दो प्रतिष्ठित संस्थानों के डिग्री के आधार पर कलाकार गण देश के प्रतिष्ठित संगीत विश्व विद्यालयों में अपनी सेवा दे रहे है .
महाशय आपका एक और महत्वपूर्ण विषय पर ध्यानाकर्षण करना चाहूँगा राज्य सरकार के सुबह सवेरे शास्त्रीय संगीत कार्यक्रम में भी जितने भी कलाकारों ने अपना प्रदर्शन दिया है कही न कही उन कलाकारों ने भी इन प्रतिष्ठित संस्थानों से डिग्री हासिल की है . भारत सरकार की संस्था Indian Council for Cultural Relations (ICCR) , New delhi के जितने भी मान्यता प्राप्त कलाकार है इनमे ज्यादातर कलाकारों ने इन प्रतिष्ठित संस्थानों से डिग्री हासिल की है I
अतः आप से अनुरोध है इस आदेश पर तमाम तथ्यों को जांच करते हुए इस पर पुनर्विचार करे एवं इस आदेश को ख़ारिज करने की अविलम्ब कृपा करें , शास्त्रीय संगीत को जीवित रखने के लिए इन कलाकारों ने काफी तपस्या की है . आप युवा एवं अनुभवी है हमें पूर्ण विश्वास है की झारखण्ड में किसी भी कलाकार के साथ अन्याय नहीं होगा I
( कौशिक घोष चौधरी )
कलाप्रेमी
जमशेदपुर

समस्या
सेवा में ,
श्री हेमंत सोरेन
माननीय मुख्यमंत्री
झारखण्ड
महाशय ,
सविनय निवेदन है की 4 जून को 2020 को प्रकाशित जमशेदपुर के दैनिक अख़बार “प्रभात खबर” से प्रकाशित एक खबर में झारखण्ड के शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी आदेश में प्रयाग संगीत समिति , प्रयागराज एवं प्राचीन कला केंद्र , चंडीगढ़ से प्राप्त “विशारद” डिग्री को “फर्जी” कहा गया है I इस खबर से पुरे झारखण्ड के लगभग 50,000 कलाकार गण काफी हतप्रभ एवं दुखी है जहाँ पुरे देश में इसकी मान्यता है सिर्फ अपने राज्य में ही क्यों डिग्री को फर्जी कहा गया एवं किन तथ्यों के आधार पर यह कहा गया है ?
विगत 40 -50 वर्षों से झारखण्ड ही नहीं पुरे देश में विद्यालयों एवं विश्व विद्यालयों में इन दोनों देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के डिग्री के आधार पर संगीत के गुरुजन अपनी सेवा दे चुके है और आज भी निरंतर अपनी सेवा दे रहे है . पुरे देश में इन दो प्रतिष्ठित संस्थानों के डिग्री के आधार पर कलाकार गण देश के प्रतिष्ठित संगीत विश्व विद्यालयों में अपनी सेवा दे रहे है .
महाशय आपका एक और महत्वपूर्ण विषय पर ध्यानाकर्षण करना चाहूँगा राज्य सरकार के सुबह सवेरे शास्त्रीय संगीत कार्यक्रम में भी जितने भी कलाकारों ने अपना प्रदर्शन दिया है कही न कही उन कलाकारों ने भी इन प्रतिष्ठित संस्थानों से डिग्री हासिल की है . भारत सरकार की संस्था Indian Council for Cultural Relations (ICCR) , New delhi के जितने भी मान्यता प्राप्त कलाकार है इनमे ज्यादातर कलाकारों ने इन प्रतिष्ठित संस्थानों से डिग्री हासिल की है I
अतः आप से अनुरोध है इस आदेश पर तमाम तथ्यों को जांच करते हुए इस पर पुनर्विचार करे एवं इस आदेश को ख़ारिज करने की अविलम्ब कृपा करें , शास्त्रीय संगीत को जीवित रखने के लिए इन कलाकारों ने काफी तपस्या की है . आप युवा एवं अनुभवी है हमें पूर्ण विश्वास है की झारखण्ड में किसी भी कलाकार के साथ अन्याय नहीं होगा I
( कौशिक घोष चौधरी )
कलाप्रेमी
जमशेदपुर

कामयाबी
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फैसला लेने वाले
14 जून 2020 पर पेटीशन बनाई गई