उत्तर प्रदेश: मनरेगा के तहत मज़दूरों को 100 की बजाय 150 दिनों का रोज़गार दिया जाए


उत्तर प्रदेश: मनरेगा के तहत मज़दूरों को 100 की बजाय 150 दिनों का रोज़गार दिया जाए
समस्या
मै एक मजदूर महिला हूं और बहुत ही गरीब परिवार से आती हूं। मज़दूरी ही मेरे परिवार की रोज़ीरोटी एवं आजीविका का साधन रहा है। जिस दिन मज़दूरी नहीं मिलती हमारा परिवार भूखे पेट सोने को मजबूर हुआ है। मुझे वो दिन भी याद है जब मैं कुछ पैसों के लिए लोगों के पास गयी थी, तो लोगों ने कई तरह से मेरा शोषण करना चाहा और पैसे भी नहीं दिये। मैंने अपने भूख से तड़पते बच्चों को पानी पिलाकर सुला दिया।
मुझे किसी से मनरेगा योजना की जानकारी मिली और तुरंत इस योजना के बारें में मैंने ग्राम पंचायत में पता लगाया। मैंने अपना जॉब कार्ड बनवाया, बैंक में अपना खाता खोला और बेहद हिम्मत से गांव में हो रहे तालाब खुदाई, सड़क पटाई व खड़ँजा पर काम करना शुरू कर दिया। मैंने महीने भर लगातार काम किया और मुझे 100/- रुपये प्रतिदिन के हिसाब से कुल 3000/- रुपये की मज़दूरी मिली।
धीरे धीरे मनरेगा की कमाई से बच्चों को स्कूल भेजना शुरू कर दिया। मनरेगा ने मज़दूरों को मजबूर होने से बचाया। खासकर मेरे जैसी लाखों महिलाओं के लिए ये जीवन निर्वाह का आधार बना। पर कोरोना ने हमसे सब कुछ छीन लिया। इस महामारी ने भारत के मिडिल क्लास की कमर तोड़ दी, तो सोचिए जो मज़दूर तबके के लोग थे उनपर क्या बीत रही होगी।
अमीर और अमीर होते जा रहा है और गरीब को अपना और बच्चों का पेट काटकर जीना पड़ रहा है। अगर सरकार गरीबों के हाथ में मनरेगा के ज़रिए चार पैसे रखेगी तो ना केवल कई घरों में खुशियाँ आएंगी बल्कि हमारा देश भी खुशहाली के रास्ते पर आगे बढ़ेगा। मेरी पेटीशन से मैं यही प्रयास कर रही हूँ। साइन करें और शेयर करें ताकि गरीब का भला हो।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून देश के करोड़ों मजदूरों, महिलाओं, युवाओं के सपने को साकार करने की योजना है। खासकर गरीब परिवार एवं मज़दूर वर्ग की महिलाओं को आर्थिक मज़बूती देने एवं घरेलू हिंसा से छुटकारा दिलाने का रास्ता है। इसलिए खुद हमारे माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने कहा कि वो इसको और बेहतर बनाएंगे।
इसको बेहतर बनाने की शुरुआत मैं अपने राज्य उत्तर प्रदेश से करना चाहती हूं। जो मुहिम यूपी से उठती है उसका असर पूरे देश में होता है। मैं उत्तर प्रदेश सरकार से विनम्र अनुरोध करती हूँ कि कृपया मनरेगा के अंतर्गत मज़दूरों को 100 दिन की बजाय 150 दिन का काम दिया जाए। इस एक कदम से पूरे प्रदेश में खुशहाली आ जाएगी। खासतौर पर हम जैसी लाखों गरीब महिलाओं को बड़ी राहत मिलेगी।
मेरी पेटीशन साइन और शेयर करें ताकि मनरेगा में 150 दिन का रोज़गार मिले।
हो सकता है कि कुछ लोगों को इस कदम का महत्व नहीं समझ आए, पर मैं जानती हूँ कि गरीब व मज़दूरी कर के पेट पालने वालों के लिए 50 और दिन का रोज़गार कितना महत्व रखता है। 50 और दिन का रोज़गार मतलब 50 और दिन पेट में रोटी होगी, बच्चों के पास दूध होगा।
आशा करती हूँ आप इस मुहिम का साथ देकर हमारी बात को सरकार तक पहुँचाएंगे ताकि सरकार जल्द से जल्द इसपर सकारात्मक कदम उठाए।
#100Nahin150
समस्या
मै एक मजदूर महिला हूं और बहुत ही गरीब परिवार से आती हूं। मज़दूरी ही मेरे परिवार की रोज़ीरोटी एवं आजीविका का साधन रहा है। जिस दिन मज़दूरी नहीं मिलती हमारा परिवार भूखे पेट सोने को मजबूर हुआ है। मुझे वो दिन भी याद है जब मैं कुछ पैसों के लिए लोगों के पास गयी थी, तो लोगों ने कई तरह से मेरा शोषण करना चाहा और पैसे भी नहीं दिये। मैंने अपने भूख से तड़पते बच्चों को पानी पिलाकर सुला दिया।
मुझे किसी से मनरेगा योजना की जानकारी मिली और तुरंत इस योजना के बारें में मैंने ग्राम पंचायत में पता लगाया। मैंने अपना जॉब कार्ड बनवाया, बैंक में अपना खाता खोला और बेहद हिम्मत से गांव में हो रहे तालाब खुदाई, सड़क पटाई व खड़ँजा पर काम करना शुरू कर दिया। मैंने महीने भर लगातार काम किया और मुझे 100/- रुपये प्रतिदिन के हिसाब से कुल 3000/- रुपये की मज़दूरी मिली।
धीरे धीरे मनरेगा की कमाई से बच्चों को स्कूल भेजना शुरू कर दिया। मनरेगा ने मज़दूरों को मजबूर होने से बचाया। खासकर मेरे जैसी लाखों महिलाओं के लिए ये जीवन निर्वाह का आधार बना। पर कोरोना ने हमसे सब कुछ छीन लिया। इस महामारी ने भारत के मिडिल क्लास की कमर तोड़ दी, तो सोचिए जो मज़दूर तबके के लोग थे उनपर क्या बीत रही होगी।
अमीर और अमीर होते जा रहा है और गरीब को अपना और बच्चों का पेट काटकर जीना पड़ रहा है। अगर सरकार गरीबों के हाथ में मनरेगा के ज़रिए चार पैसे रखेगी तो ना केवल कई घरों में खुशियाँ आएंगी बल्कि हमारा देश भी खुशहाली के रास्ते पर आगे बढ़ेगा। मेरी पेटीशन से मैं यही प्रयास कर रही हूँ। साइन करें और शेयर करें ताकि गरीब का भला हो।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून देश के करोड़ों मजदूरों, महिलाओं, युवाओं के सपने को साकार करने की योजना है। खासकर गरीब परिवार एवं मज़दूर वर्ग की महिलाओं को आर्थिक मज़बूती देने एवं घरेलू हिंसा से छुटकारा दिलाने का रास्ता है। इसलिए खुद हमारे माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने कहा कि वो इसको और बेहतर बनाएंगे।
इसको बेहतर बनाने की शुरुआत मैं अपने राज्य उत्तर प्रदेश से करना चाहती हूं। जो मुहिम यूपी से उठती है उसका असर पूरे देश में होता है। मैं उत्तर प्रदेश सरकार से विनम्र अनुरोध करती हूँ कि कृपया मनरेगा के अंतर्गत मज़दूरों को 100 दिन की बजाय 150 दिन का काम दिया जाए। इस एक कदम से पूरे प्रदेश में खुशहाली आ जाएगी। खासतौर पर हम जैसी लाखों गरीब महिलाओं को बड़ी राहत मिलेगी।
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हो सकता है कि कुछ लोगों को इस कदम का महत्व नहीं समझ आए, पर मैं जानती हूँ कि गरीब व मज़दूरी कर के पेट पालने वालों के लिए 50 और दिन का रोज़गार कितना महत्व रखता है। 50 और दिन का रोज़गार मतलब 50 और दिन पेट में रोटी होगी, बच्चों के पास दूध होगा।
आशा करती हूँ आप इस मुहिम का साथ देकर हमारी बात को सरकार तक पहुँचाएंगे ताकि सरकार जल्द से जल्द इसपर सकारात्मक कदम उठाए।
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18 जुलाई 2021 पर पेटीशन बनाई गई