

दिल्ली यूनिवर्सिटी: दूसरे राज्य के छात्रों को ऑनलाइन क्लास जारी रखने का अवसर दें
समस्या
दिल्ली यूनिवर्सिटी के कॉलेज, छात्रों के लिए फिर खुलने वाले हैं। इस फ़ैसले के कारण दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले दूसरे राज्य के हज़ारों छात्र बेहद चिंता में हैं। यूनिवर्सिटी के खुलने की ख़ुशी के बीच हमारी आवाज़ डूब रही हैं।
मेरे जैसे कई ग्रैजूएट और पोस्ट ग्रैजूएट छात्र हैं जो DU में अपनी पढ़ाई के अंतिम वर्ष में हैं। ऑफलाइन क्लासेज़ फिर से शुरू करने का आदेश 9 फरवरी को आया था। नोटिस में छात्रों को सलाह दी गई है कि वे दिल्ली ऐसे दिन पर पहुँचे ताकि वे 3 दिन का क्वॉरंटीन कर के, 17 फरवरी से कॉलेज में आना शुरू कर सकें। दूसरे राज्य के छात्रों के पास ये सब करने के लिए सिर्फ़ 3-4 दिन है। इतने कम समय में उन्हें अपनी टिकट बुक कर दिल्ली तक सफ़र करना है, अपने बजट के अनुसार दिल्ली में अपने लिए रहने का इंतज़ाम करना है, क्यूँकि कॉलेज हॉस्टल अगले एक महीने के लिए तैयार नहीं होंगे।
दूसरे राज्य के छात्र, जो अपने कोर्स के अंतिम वर्ष में हैं, उनके पास अपनी बाक़ी की पढ़ाई ऑनलाइन जारी रखने का विकल्प होना चाहिए। इतनी सारी व्यवस्थाओं का इतने कम समय में इंतज़ाम करना व्यर्थ है। और अगर अगले महीने से कोविड के मामले वापस बढ़ने लगें तो क्या हमें फिर से अपना बैग पैक कर के घर जाने के लिए बोला जाएगा?
दिल्ली में स्थित एक और प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी, जामिया मिलिया इस्लामिया ने कहाँ है कि छात्रों के लिए कॉलेज धीरे धीरे खोला जाएगा। सबसे पहले उन छात्रों को बुलाया जाएगा जिनके पीएचडी सबमिशन नज़दीक आ रहें हैं और वे जिनके प्रैक्टिकल की परीक्षा होनी है। जब जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी तक ने ये फ़ैसला लिया है तो फिर दिल्ली यूनिवर्सिटी इतने शॉर्ट नोटिस पर एक साथ सभी छात्रों को वापस क्यूँ बुला रही है?
फ़ाइनल वर्ष के कई छात्रों ने तो अपने शहरों में आगे की पढ़ाई के लिए कोचिंग भी शुरू कर दी थी इस उम्मीद में कि यह समेस्टर ऑनलाइन ही लिया जाएगा। अब उन्हें वो पढ़ाई रोक कर, बचे हुए बस 1.5 महीनो के लिए फिर अपना समय और पैसा खर्च कर के दिल्ली लौटना पड़ेगा। क्या ये सही है?
मेरी पेटीशन साइन व शेयर करें और हमारी इस मांग को वाइस चैन्सेलर, प्रॉक्टर और यूनिवर्सिटी के सभी शिक्षण विभागों के प्रमुखों तक पहुँचाने में हमारी मदद करें।
चित्र साभार: लाइवमिंट

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दिल्ली यूनिवर्सिटी के कॉलेज, छात्रों के लिए फिर खुलने वाले हैं। इस फ़ैसले के कारण दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले दूसरे राज्य के हज़ारों छात्र बेहद चिंता में हैं। यूनिवर्सिटी के खुलने की ख़ुशी के बीच हमारी आवाज़ डूब रही हैं।
मेरे जैसे कई ग्रैजूएट और पोस्ट ग्रैजूएट छात्र हैं जो DU में अपनी पढ़ाई के अंतिम वर्ष में हैं। ऑफलाइन क्लासेज़ फिर से शुरू करने का आदेश 9 फरवरी को आया था। नोटिस में छात्रों को सलाह दी गई है कि वे दिल्ली ऐसे दिन पर पहुँचे ताकि वे 3 दिन का क्वॉरंटीन कर के, 17 फरवरी से कॉलेज में आना शुरू कर सकें। दूसरे राज्य के छात्रों के पास ये सब करने के लिए सिर्फ़ 3-4 दिन है। इतने कम समय में उन्हें अपनी टिकट बुक कर दिल्ली तक सफ़र करना है, अपने बजट के अनुसार दिल्ली में अपने लिए रहने का इंतज़ाम करना है, क्यूँकि कॉलेज हॉस्टल अगले एक महीने के लिए तैयार नहीं होंगे।
दूसरे राज्य के छात्र, जो अपने कोर्स के अंतिम वर्ष में हैं, उनके पास अपनी बाक़ी की पढ़ाई ऑनलाइन जारी रखने का विकल्प होना चाहिए। इतनी सारी व्यवस्थाओं का इतने कम समय में इंतज़ाम करना व्यर्थ है। और अगर अगले महीने से कोविड के मामले वापस बढ़ने लगें तो क्या हमें फिर से अपना बैग पैक कर के घर जाने के लिए बोला जाएगा?
दिल्ली में स्थित एक और प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी, जामिया मिलिया इस्लामिया ने कहाँ है कि छात्रों के लिए कॉलेज धीरे धीरे खोला जाएगा। सबसे पहले उन छात्रों को बुलाया जाएगा जिनके पीएचडी सबमिशन नज़दीक आ रहें हैं और वे जिनके प्रैक्टिकल की परीक्षा होनी है। जब जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी तक ने ये फ़ैसला लिया है तो फिर दिल्ली यूनिवर्सिटी इतने शॉर्ट नोटिस पर एक साथ सभी छात्रों को वापस क्यूँ बुला रही है?
फ़ाइनल वर्ष के कई छात्रों ने तो अपने शहरों में आगे की पढ़ाई के लिए कोचिंग भी शुरू कर दी थी इस उम्मीद में कि यह समेस्टर ऑनलाइन ही लिया जाएगा। अब उन्हें वो पढ़ाई रोक कर, बचे हुए बस 1.5 महीनो के लिए फिर अपना समय और पैसा खर्च कर के दिल्ली लौटना पड़ेगा। क्या ये सही है?
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