

SSC परीक्षाओं में हिंदी माध्यम के छात्रों को समान अवसर दो।
The Issue

छोटे से गाँव में रहने वाला एक गरीब किसान का बेटा बचपन से ही सरकारी नौकरी करने का सपना देखता है। उसने अपनी पूरी पढ़ाई गाँव के सरकारी स्कूल से हिंदी माध्यम में की होती है। स्कूल में अंग्रेज़ी सिर्फ किताबों तक सीमित रहती है। न वहाँ अच्छे अंग्रेज़ी शिक्षक होते हैं और न ही ऐसा माहौल जहाँ वह अंग्रेज़ी सही तरीके से सीख सके। इसलिए बचपन से उसे न अंग्रेज़ी बोलनी आती है और न ही ठीक से समझनी।
लेकिन वह पढ़ाई में कमजोर नहीं होता। गणित, रीजनिंग और सामान्य ज्ञान में उसकी पकड़ बहुत अच्छी होती है। जब उसे पता चलता है कि SSC CGL और CHSL जैसी परीक्षाओं से अच्छी सरकारी नौकरी मिल सकती है, तो वह अपने सपनों को पूरा करने के लिए गाँव छोड़कर शहर आ जाता है।
घर से दूर रहकर वह किराए के छोटे से कमरे में रहने लगता है। दिन-रात मेहनत करता है। लाइब्रेरी में घंटों बैठकर पढ़ाई करता है। उसके माता-पिता भी उम्मीद लगाकर बैठे रहते हैं कि उनका बेटा एक दिन सरकारी अफसर बनेगा और घर की गरीबी खत्म करेगा।
तैयारी शुरू करने के बाद उसे पता चलता है कि SSC की बड़ी पोस्टों में अंग्रेज़ी के 25 नंबर आते हैं और वही मेरिट में जुड़ते हैं। यह सुनकर वह अंदर से टूट जाता है। क्योंकि जिस भाषा को उसने कभी सही से सीखा ही नहीं, अब वही उसके भविष्य का फैसला करने वाली होती है।
फिर भी मजबूरी में वह अंग्रेज़ी पढ़ना शुरू करता है।
रोज Vocabulary याद करता है, Grammar पढ़ता है, YouTube पर अंग्रेज़ी की क्लास देखता है। लेकिन जिस भाषा को वह न बोल पाता है और न समझ पाता है, उस पर पकड़ बनाना उसके लिए बहुत मुश्किल होता है। दूसरी तरफ जिन बच्चों की अंग्रेज़ी पहले से अच्छी होती है, वे आसानी से अच्छे नंबर ले आते हैं।
वह 3 साल… 4 साल… यहाँ तक कि 5 साल तक SSC की तैयारी करता रहता है। हर बार गणित, रीजनिंग और GK में अच्छे नंबर लाता है, लेकिन अंग्रेज़ी की वजह से उसकी मेरिट नहीं बन पाती। उसका चयन नहीं हो पाता।
धीरे-धीरे उसके जैसे लाखों हिंदी माध्यम के छात्र SSC छोड़कर रेलवे की तरफ जाने लगते हैं। लेकिन वहाँ भी नौकरियाँ बहुत कम हैं। कई सालों तक परीक्षा की तारीख नहीं आती, रिजल्ट नहीं आता, और भर्तियाँ अटक जाती हैं।
ऐसे में लाखों गरीब और गाँव से आने वाले छात्र अपनी जिंदगी के कई साल सिर्फ इसलिए बर्बाद कर देते हैं क्योंकि SSC जैसी परीक्षाओं में अंग्रेज़ी को मेरिट में जोड़ दिया गया है।
उनकी लड़ाई अंग्रेज़ी भाषा से नहीं है, बल्कि समान अवसरों से है। वे सिर्फ इतना चाहते हैं कि उनकी मेहनत, उनका ज्ञान और उनकी योग्यता भाषा से छोटी न मानी जाए।
आज देश के लाखों छात्र इसी दर्द के साथ संघर्ष कर रहे हैं। और अब समय आ गया है कि वे अपनी आवाज उठाएँ और इस मुहिम से जुड़कर समान अवसर की माँग करें।
राजस्थान के एक ग्रामीण क्षेत्र में पला-बढ़ा होने के कारण, मेरे मन में हमेशा अपने देश की सेवा एक सरकारी अधिकारी बनकर करने का सपना रहा है।
SSC CGL और CHSL परीक्षाओं की तैयारी में मैंने पूरी मेहनत और समर्पण के साथ काम किया है—ऐसे गुण जो मेरे जैसे लाखों हिंदी माध्यम के छात्रों में देखने को मिलते हैं। लेकिन दुर्भाग्यवश, एक बड़ी बाधा हमारे रास्ते में खड़ी है: इन परीक्षाओं में अंग्रेज़ी भाषा को अत्यधिक महत्व दिया जाना।
स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (SSC) की Combined Graduate Level (CGL) और Combined Higher Secondary Level (CHSL) परीक्षाएँ भारत में अनेक सरकारी नौकरियों का मुख्य द्वार हैं। लेकिन वर्तमान परीक्षा प्रणाली में अंग्रेज़ी विषय को अधिक अंक दिए जाने के कारण हिंदी माध्यम के छात्रों को नुकसान उठाना पड़ता है। इससे न केवल हमारे प्रदर्शन पर असर पड़ता है, बल्कि हमें निष्पक्ष रूप से प्रतिस्पर्धा करने के अवसर भी सीमित हो जाते हैं।
इसके विपरीत, UPSC और SSC GD जैसी परीक्षाओं में उम्मीदवारों को अपनी मातृभाषा चुनने या केवल क्वालिफाइंग स्तर पर भाषा परीक्षा देने का विकल्प मिलता है। ऐसे समावेशी कदमों ने विभिन्न भाषाई पृष्ठभूमि से आने वाले छात्रों को अपनी वास्तविक प्रतिभा दिखाने का अवसर प्रदान किया है।
यदि अंग्रेज़ी सेक्शन को केवल क्वालिफाइंग बना दिया जाए या हिंदी को वैकल्पिक भाषा के रूप में शामिल किया जाए, तो स्थिति में बहुत बड़ा सुधार हो सकता है। यह बदलाव समान अवसरों को बढ़ावा देगा और हिंदी माध्यम के छात्रों को बराबरी के स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने तथा देश की सेवा में प्रभावी योगदान देने का मौका देगा।
हम संबंधित अधिकारियों से विनम्र आग्रह करते हैं कि वे SSC CGL और CHSL परीक्षाओं की वर्तमान नीति पर पुनर्विचार करें। इन आवश्यक बदलावों को लागू करके यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि किसी उम्मीदवार की सफलता उसकी भाषा दक्षता नहीं, बल्कि उसकी प्रतिभा, मेहनत और समर्पण के आधार पर तय हो।
हर व्यक्ति को अपने भविष्य को सुरक्षित करने का समान अवसर मिलना चाहिए, विशेष रूप से उन छात्रों को जो सामाजिक, आर्थिक और भाषाई बाधाओं को पार कर अपने सपनों को पूरा करने का प्रयास कर रहे हैं।
कृपया इस याचिका पर हस्ताक्षर करके अपना समर्थन दें और पूरे भारत के हिंदी माध्यम के छात्रों के लिए इस जरूरी बदलाव को लाने में मदद करें। आपका एक हस्ताक्षर लाखों छात्रों के भविष्य को बेहतर बनाने और उन्हें समान अवसर दिलाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है।


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छोटे से गाँव में रहने वाला एक गरीब किसान का बेटा बचपन से ही सरकारी नौकरी करने का सपना देखता है। उसने अपनी पूरी पढ़ाई गाँव के सरकारी स्कूल से हिंदी माध्यम में की होती है। स्कूल में अंग्रेज़ी सिर्फ किताबों तक सीमित रहती है। न वहाँ अच्छे अंग्रेज़ी शिक्षक होते हैं और न ही ऐसा माहौल जहाँ वह अंग्रेज़ी सही तरीके से सीख सके। इसलिए बचपन से उसे न अंग्रेज़ी बोलनी आती है और न ही ठीक से समझनी।
लेकिन वह पढ़ाई में कमजोर नहीं होता। गणित, रीजनिंग और सामान्य ज्ञान में उसकी पकड़ बहुत अच्छी होती है। जब उसे पता चलता है कि SSC CGL और CHSL जैसी परीक्षाओं से अच्छी सरकारी नौकरी मिल सकती है, तो वह अपने सपनों को पूरा करने के लिए गाँव छोड़कर शहर आ जाता है।
घर से दूर रहकर वह किराए के छोटे से कमरे में रहने लगता है। दिन-रात मेहनत करता है। लाइब्रेरी में घंटों बैठकर पढ़ाई करता है। उसके माता-पिता भी उम्मीद लगाकर बैठे रहते हैं कि उनका बेटा एक दिन सरकारी अफसर बनेगा और घर की गरीबी खत्म करेगा।
तैयारी शुरू करने के बाद उसे पता चलता है कि SSC की बड़ी पोस्टों में अंग्रेज़ी के 25 नंबर आते हैं और वही मेरिट में जुड़ते हैं। यह सुनकर वह अंदर से टूट जाता है। क्योंकि जिस भाषा को उसने कभी सही से सीखा ही नहीं, अब वही उसके भविष्य का फैसला करने वाली होती है।
फिर भी मजबूरी में वह अंग्रेज़ी पढ़ना शुरू करता है।
रोज Vocabulary याद करता है, Grammar पढ़ता है, YouTube पर अंग्रेज़ी की क्लास देखता है। लेकिन जिस भाषा को वह न बोल पाता है और न समझ पाता है, उस पर पकड़ बनाना उसके लिए बहुत मुश्किल होता है। दूसरी तरफ जिन बच्चों की अंग्रेज़ी पहले से अच्छी होती है, वे आसानी से अच्छे नंबर ले आते हैं।
वह 3 साल… 4 साल… यहाँ तक कि 5 साल तक SSC की तैयारी करता रहता है। हर बार गणित, रीजनिंग और GK में अच्छे नंबर लाता है, लेकिन अंग्रेज़ी की वजह से उसकी मेरिट नहीं बन पाती। उसका चयन नहीं हो पाता।
धीरे-धीरे उसके जैसे लाखों हिंदी माध्यम के छात्र SSC छोड़कर रेलवे की तरफ जाने लगते हैं। लेकिन वहाँ भी नौकरियाँ बहुत कम हैं। कई सालों तक परीक्षा की तारीख नहीं आती, रिजल्ट नहीं आता, और भर्तियाँ अटक जाती हैं।
ऐसे में लाखों गरीब और गाँव से आने वाले छात्र अपनी जिंदगी के कई साल सिर्फ इसलिए बर्बाद कर देते हैं क्योंकि SSC जैसी परीक्षाओं में अंग्रेज़ी को मेरिट में जोड़ दिया गया है।
उनकी लड़ाई अंग्रेज़ी भाषा से नहीं है, बल्कि समान अवसरों से है। वे सिर्फ इतना चाहते हैं कि उनकी मेहनत, उनका ज्ञान और उनकी योग्यता भाषा से छोटी न मानी जाए।
आज देश के लाखों छात्र इसी दर्द के साथ संघर्ष कर रहे हैं। और अब समय आ गया है कि वे अपनी आवाज उठाएँ और इस मुहिम से जुड़कर समान अवसर की माँग करें।
राजस्थान के एक ग्रामीण क्षेत्र में पला-बढ़ा होने के कारण, मेरे मन में हमेशा अपने देश की सेवा एक सरकारी अधिकारी बनकर करने का सपना रहा है।
SSC CGL और CHSL परीक्षाओं की तैयारी में मैंने पूरी मेहनत और समर्पण के साथ काम किया है—ऐसे गुण जो मेरे जैसे लाखों हिंदी माध्यम के छात्रों में देखने को मिलते हैं। लेकिन दुर्भाग्यवश, एक बड़ी बाधा हमारे रास्ते में खड़ी है: इन परीक्षाओं में अंग्रेज़ी भाषा को अत्यधिक महत्व दिया जाना।
स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (SSC) की Combined Graduate Level (CGL) और Combined Higher Secondary Level (CHSL) परीक्षाएँ भारत में अनेक सरकारी नौकरियों का मुख्य द्वार हैं। लेकिन वर्तमान परीक्षा प्रणाली में अंग्रेज़ी विषय को अधिक अंक दिए जाने के कारण हिंदी माध्यम के छात्रों को नुकसान उठाना पड़ता है। इससे न केवल हमारे प्रदर्शन पर असर पड़ता है, बल्कि हमें निष्पक्ष रूप से प्रतिस्पर्धा करने के अवसर भी सीमित हो जाते हैं।
इसके विपरीत, UPSC और SSC GD जैसी परीक्षाओं में उम्मीदवारों को अपनी मातृभाषा चुनने या केवल क्वालिफाइंग स्तर पर भाषा परीक्षा देने का विकल्प मिलता है। ऐसे समावेशी कदमों ने विभिन्न भाषाई पृष्ठभूमि से आने वाले छात्रों को अपनी वास्तविक प्रतिभा दिखाने का अवसर प्रदान किया है।
यदि अंग्रेज़ी सेक्शन को केवल क्वालिफाइंग बना दिया जाए या हिंदी को वैकल्पिक भाषा के रूप में शामिल किया जाए, तो स्थिति में बहुत बड़ा सुधार हो सकता है। यह बदलाव समान अवसरों को बढ़ावा देगा और हिंदी माध्यम के छात्रों को बराबरी के स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने तथा देश की सेवा में प्रभावी योगदान देने का मौका देगा।
हम संबंधित अधिकारियों से विनम्र आग्रह करते हैं कि वे SSC CGL और CHSL परीक्षाओं की वर्तमान नीति पर पुनर्विचार करें। इन आवश्यक बदलावों को लागू करके यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि किसी उम्मीदवार की सफलता उसकी भाषा दक्षता नहीं, बल्कि उसकी प्रतिभा, मेहनत और समर्पण के आधार पर तय हो।
हर व्यक्ति को अपने भविष्य को सुरक्षित करने का समान अवसर मिलना चाहिए, विशेष रूप से उन छात्रों को जो सामाजिक, आर्थिक और भाषाई बाधाओं को पार कर अपने सपनों को पूरा करने का प्रयास कर रहे हैं।
कृपया इस याचिका पर हस्ताक्षर करके अपना समर्थन दें और पूरे भारत के हिंदी माध्यम के छात्रों के लिए इस जरूरी बदलाव को लाने में मदद करें। आपका एक हस्ताक्षर लाखों छात्रों के भविष्य को बेहतर बनाने और उन्हें समान अवसर दिलाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है।


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Petition created on 10 May 2026