Regulate School Uniforms, Notebooks, Teacher Salaries & Textbook Monopoly in Haldwani


Regulate School Uniforms, Notebooks, Teacher Salaries & Textbook Monopoly in Haldwani
The Issue
https://www.instagram.com/reel/DGc3F3QvFFU/?igsh=NGN0eTF1aWU3NTZr
हल्द्वानी(Haldwani) और पूरे भारत में माता-पिता और शिक्षकों की समस्याएँ
जब मैं एक parent बना, तो मेरे मन में अपने बच्चे के future को लेकर ढेर सारी उम्मीदें और सपने थे। मैं चाहता था कि मेरे बच्चे को best education मिले, बिना किसी financial pressure के। लेकिन जब मेरा बच्चा स्कूल में दाखिल हुआ, तो मुझे उस system का burden महसूस होने लगा, जिसे education को promote करने के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन वही system अब इसका फायदा उठाने की कोशिश कर रहा था।
मुझे याद है जब मैंने पहली बार school uniform खरीदी थी। स्कूल वर्ष की शुरुआत थी और मैं अपने बच्चे को तैयार करने के लिए excited था। लेकिन जैसे ही मैंने uniform की कीमत देखी, मेरा उत्साह चिंता में बदल गया। सिर्फ uniform ही नहीं, school ने sports kit, shoes, belt, socks, और ribbons जैसे additional items भी mandatory कर दिए थे – और ये सब expensive थे। मुझे ऐसा लगा कि मुझे उन चीज़ों के लिए पैसे खर्च करने के लिए मजबूर किया जा रहा था, जिनकी मुझे बिलकुल भी ज़रूरत नहीं थी।
यह सच है कि जब school uniforms शुरू की गई थीं, तो इसका उद्देश्य बच्चों में social-economic disparity को खत्म करना था, ताकि सभी बच्चे एक समान feel करें। लेकिन अब यह एक trend बन गया है। स्कूल अपने brand को promote करने के लिए parents पर school logo वाली uniforms mandatory कर रहे हैं। Parents को अपने पैसे से स्कूल का नाम प्रचारित करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। क्या हमें सच में अपनी मेहनत की कमाई से school के brand का प्रचार करना चाहिए?
फिर, ये notebook का issue है। मुझे याद है कि जब मुझे अपने बच्चे के लिए school नाम वाली notebooks खरीदने को कहा गया, तो मुझे समझ में नहीं आया कि क्यों। क्या school का नाम उस notebook को better बनाता है? क्या इससे बच्चे के अच्छे marks और तेज़ learning की संभावना बढ़ती है? नहीं। एक regular notebook वही काम कर सकती है। लेकिन ये "branded" notebooks सिर्फ parents की pocket light करने का तरीका बन गई हैं। क्या किसी को भी यह समझने का मौका मिला कि यह सिर्फ parents पर extra financial pressure डालने का तरीका है? हम क्यों मान लें कि सिर्फ school का नाम उस notebook को खास बना देता है?
हमें यह option होना चाहिए कि हम किसी भी shop से standard, affordable notebooks खरीद सकें, न कि उन branded notebooks को, जिनका कोई special benefit नहीं है। Parents पर इस तरह का pressure डालना गलत है।
फिर, books supply का issue है। Haldwani जैसे city में जहां 10 लाख से ज्यादा लोग रहते हैं, वहाँ सिर्फ एक ही authorized supplier है। हर साल parents को long lines में खड़ा होकर expensive prices पर books खरीदनी पड़ती हैं। यह एक type of monopoly है। क्यों हम कई suppliers से books नहीं खरीद सकते, ताकि हमें competitive prices मिल सकें? यह एक fraud की तरह है, जो सिर्फ suppliers को फायदा पहुंचाता है, parents को नहीं।
But it didn’t end there.
जैसे ही मैं school में ज्यादा involved हुआ, मैंने देखा कि teachers भी problems का सामना कर रहे हैं। मेरी एक close friend जो एक private school में teacher है, वह दिन-रात काम करती है, school के बाद भी देर रात तक lectures prepare करती है, लेकिन उसकी salary इतनी low थी कि मुश्किल से अपना खर्च चला पाती थी। Teachers को बिना proper payment के काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा था।
मैंने यह भी देखा कि कुछ private schools में admission के time donations की मांग की जाती है। यह parents पर extra pressure डालता है। कुछ schools में यह donation mandatory कर दिया जाता है, और जो parents यह नहीं दे सकते, उन्हें disrespect किया जाता है। यह बहुत दुखद है कि ऐसे कई parents सिर्फ अपने बच्चों को good education दिलाने के लिए ये donations देने के लिए मजबूर होते हैं।
Finally, मैंने यह महसूस किया कि education system में एक important gap है – moral education और yoga। हमारे बच्चे books पढ़ने और calculations याद करने में busy हैं, लेकिन उनकी mental और physical well-being का क्या? क्या उन्हें यह सिखाया जा रहा है कि compassion, honesty और physical health कितने important हैं? यह वह aspect था जो curriculum में missing था।
इन personal experiences और other parents और teachers की stories को जानने के बाद, मुझे यह realization हुआ कि जिस system पर हम depend करते हैं, वह हमारे लिए fair नहीं है। यह parents पर unnecessary financial burden डालता है, teachers का exploitation करता है, और हमारे बच्चों की mental और physical well-being की अनदेखी करता है।
इसलिए मैंने step लेने का decision लिया। मुझे change देखना है। मैं यह ensure करना चाहता हूँ कि कोई भी parent अपने बच्चे की education और financial security के बीच choice न करे। मुझे यह देखना है कि teachers को सम्मान मिले और उनके hard work के लिए proper payment किया जाए। मुझे एक ऐसी education system देखनी है जो holistic development को promote करे – एक ऐसी system जो हमारे बच्चों को सिर्फ पढ़ाई नहीं, बल्कि honesty और self-confidence भी सिखाए।
यह petition सिर्फ मेरी आवाज़ नहीं है; यह हर parent, teacher, और बच्चे की आवाज़ है, जो ऐसी system में फंसा हुआ है जो उन्हें service देने के लिए बनाई गई थी, लेकिन अब वह उन्हें दबा रही है। इस cause का support करके, आप हमारे बच्चों और teachers के better future के लिए खड़े हो रहे हैं।
आइए, एक साथ बदलाव लाने के लिए हाथ मिलाते हैं। इस petition पर हस्ताक्षर करें। अपनी कहानी share करें। हम सब मिलकर दिखा सकते हैं कि हम education, justice और हमारे बच्चों के future के लिए कितने serious हैं।

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The Issue
https://www.instagram.com/reel/DGc3F3QvFFU/?igsh=NGN0eTF1aWU3NTZr
हल्द्वानी(Haldwani) और पूरे भारत में माता-पिता और शिक्षकों की समस्याएँ
जब मैं एक parent बना, तो मेरे मन में अपने बच्चे के future को लेकर ढेर सारी उम्मीदें और सपने थे। मैं चाहता था कि मेरे बच्चे को best education मिले, बिना किसी financial pressure के। लेकिन जब मेरा बच्चा स्कूल में दाखिल हुआ, तो मुझे उस system का burden महसूस होने लगा, जिसे education को promote करने के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन वही system अब इसका फायदा उठाने की कोशिश कर रहा था।
मुझे याद है जब मैंने पहली बार school uniform खरीदी थी। स्कूल वर्ष की शुरुआत थी और मैं अपने बच्चे को तैयार करने के लिए excited था। लेकिन जैसे ही मैंने uniform की कीमत देखी, मेरा उत्साह चिंता में बदल गया। सिर्फ uniform ही नहीं, school ने sports kit, shoes, belt, socks, और ribbons जैसे additional items भी mandatory कर दिए थे – और ये सब expensive थे। मुझे ऐसा लगा कि मुझे उन चीज़ों के लिए पैसे खर्च करने के लिए मजबूर किया जा रहा था, जिनकी मुझे बिलकुल भी ज़रूरत नहीं थी।
यह सच है कि जब school uniforms शुरू की गई थीं, तो इसका उद्देश्य बच्चों में social-economic disparity को खत्म करना था, ताकि सभी बच्चे एक समान feel करें। लेकिन अब यह एक trend बन गया है। स्कूल अपने brand को promote करने के लिए parents पर school logo वाली uniforms mandatory कर रहे हैं। Parents को अपने पैसे से स्कूल का नाम प्रचारित करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। क्या हमें सच में अपनी मेहनत की कमाई से school के brand का प्रचार करना चाहिए?
फिर, ये notebook का issue है। मुझे याद है कि जब मुझे अपने बच्चे के लिए school नाम वाली notebooks खरीदने को कहा गया, तो मुझे समझ में नहीं आया कि क्यों। क्या school का नाम उस notebook को better बनाता है? क्या इससे बच्चे के अच्छे marks और तेज़ learning की संभावना बढ़ती है? नहीं। एक regular notebook वही काम कर सकती है। लेकिन ये "branded" notebooks सिर्फ parents की pocket light करने का तरीका बन गई हैं। क्या किसी को भी यह समझने का मौका मिला कि यह सिर्फ parents पर extra financial pressure डालने का तरीका है? हम क्यों मान लें कि सिर्फ school का नाम उस notebook को खास बना देता है?
हमें यह option होना चाहिए कि हम किसी भी shop से standard, affordable notebooks खरीद सकें, न कि उन branded notebooks को, जिनका कोई special benefit नहीं है। Parents पर इस तरह का pressure डालना गलत है।
फिर, books supply का issue है। Haldwani जैसे city में जहां 10 लाख से ज्यादा लोग रहते हैं, वहाँ सिर्फ एक ही authorized supplier है। हर साल parents को long lines में खड़ा होकर expensive prices पर books खरीदनी पड़ती हैं। यह एक type of monopoly है। क्यों हम कई suppliers से books नहीं खरीद सकते, ताकि हमें competitive prices मिल सकें? यह एक fraud की तरह है, जो सिर्फ suppliers को फायदा पहुंचाता है, parents को नहीं।
But it didn’t end there.
जैसे ही मैं school में ज्यादा involved हुआ, मैंने देखा कि teachers भी problems का सामना कर रहे हैं। मेरी एक close friend जो एक private school में teacher है, वह दिन-रात काम करती है, school के बाद भी देर रात तक lectures prepare करती है, लेकिन उसकी salary इतनी low थी कि मुश्किल से अपना खर्च चला पाती थी। Teachers को बिना proper payment के काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा था।
मैंने यह भी देखा कि कुछ private schools में admission के time donations की मांग की जाती है। यह parents पर extra pressure डालता है। कुछ schools में यह donation mandatory कर दिया जाता है, और जो parents यह नहीं दे सकते, उन्हें disrespect किया जाता है। यह बहुत दुखद है कि ऐसे कई parents सिर्फ अपने बच्चों को good education दिलाने के लिए ये donations देने के लिए मजबूर होते हैं।
Finally, मैंने यह महसूस किया कि education system में एक important gap है – moral education और yoga। हमारे बच्चे books पढ़ने और calculations याद करने में busy हैं, लेकिन उनकी mental और physical well-being का क्या? क्या उन्हें यह सिखाया जा रहा है कि compassion, honesty और physical health कितने important हैं? यह वह aspect था जो curriculum में missing था।
इन personal experiences और other parents और teachers की stories को जानने के बाद, मुझे यह realization हुआ कि जिस system पर हम depend करते हैं, वह हमारे लिए fair नहीं है। यह parents पर unnecessary financial burden डालता है, teachers का exploitation करता है, और हमारे बच्चों की mental और physical well-being की अनदेखी करता है।
इसलिए मैंने step लेने का decision लिया। मुझे change देखना है। मैं यह ensure करना चाहता हूँ कि कोई भी parent अपने बच्चे की education और financial security के बीच choice न करे। मुझे यह देखना है कि teachers को सम्मान मिले और उनके hard work के लिए proper payment किया जाए। मुझे एक ऐसी education system देखनी है जो holistic development को promote करे – एक ऐसी system जो हमारे बच्चों को सिर्फ पढ़ाई नहीं, बल्कि honesty और self-confidence भी सिखाए।
यह petition सिर्फ मेरी आवाज़ नहीं है; यह हर parent, teacher, और बच्चे की आवाज़ है, जो ऐसी system में फंसा हुआ है जो उन्हें service देने के लिए बनाई गई थी, लेकिन अब वह उन्हें दबा रही है। इस cause का support करके, आप हमारे बच्चों और teachers के better future के लिए खड़े हो रहे हैं।
आइए, एक साथ बदलाव लाने के लिए हाथ मिलाते हैं। इस petition पर हस्ताक्षर करें। अपनी कहानी share करें। हम सब मिलकर दिखा सकते हैं कि हम education, justice और हमारे बच्चों के future के लिए कितने serious हैं।

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The Decision Makers
Petition created on 23 February 2025