"Reel नहीं, Real बचपन चाहिए – Instagram पर गंदी रील्स को तुरंत रोको"

"Reel नहीं, Real बचपन चाहिए – Instagram पर गंदी रील्स को तुरंत रोको"

The Issue

"Reel नहीं, Real बचपन चाहिए" – एक राष्ट्रीय अपील

आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया हमारे जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है। Instagram जैसे प्लेटफॉर्म्स जहां एक ओर रचनात्मकता और कनेक्टिविटी का साधन हो सकते हैं, वहीं दूसरी ओर इनका एक अंधेरा और खतरनाक चेहरा भी सामने आ रहा है – बोल्ड और अश्लील रील्स का बेतहाशा प्रचार।

सबसे अधिक प्रभावित हो रही है हमारी अगली पीढ़ी – हमारे बच्चे।

 
🚨 समस्या क्या है?

📱 Instagram जैसे प्लेटफॉर्म पर बच्चे हर दिन ऐसे रील्स देख रहे हैं जिनमें:

अश्लील कपड़े पहनकर डांस,
यौन इशारे और एक्सप्रेशन,
रिश्तों और शरीर को गलत तरीके से दर्शाया जा रहा है।
और ये सब कुछ "ट्रेंडिंग" टैब और एक्सप्लोर पेज पर बार-बार सामने आ रहा है।
👦 10 से 16 साल तक के बच्चे जो सीखने और समझने की उम्र में हैं, वो इन वीडियोस को देखकर:

कम उम्र में ही अश्लील चीजों के प्रति आकर्षित हो रहे हैं,
सोशल मीडिया पर वायरल होने के लिए खुद भी वैसा बनने की कोशिश कर रहे हैं,
और धीरे-धीरे उनकी मासूमियत, संस्कार और सोच खत्म हो रही है।
 
❗ ये सिर्फ एक डिजिटल समस्या नहीं है — ये एक सामाजिक आपदा है।

जब एक बच्चा लाइक्स और फॉलोअर्स के चक्कर में गलत राह चुनता है,
जब उसे लगता है कि अश्लीलता ही पहचान और पैसे का रास्ता है,
जब वो माता-पिता, स्कूल और समाज की बातों से ज्यादा Instagram के ट्रेंड्स पर भरोसा करता है, तो हम सबको एकजुट होकर सोचने और कुछ करने की ज़रूरत है।

 
🙏 हमारी मांगें:

हम Meta (Instagram की मालिक कंपनी) और भारत सरकार से निवेदन करते हैं कि वे:Instagram के एल्गोरिद्म को नियंत्रित करें, ताकि बोल्ड और अश्लील कंटेंट को वायरल न किया जाए।
18 साल से कम उम्र के यूज़र्स के लिए सख्त age-verification लागू करें।
Parent Control Tools और Safe Mode को ज़रूरी बनाया जाए।
भारत के सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों के अनुसार एक सोशल मीडिया कंटेंट गाइडलाइन बने।
 
📣 हमारा संदेश:

हमें Reels नहीं, Real बचपन चाहिए।बच्चों को लाइक्स और व्यूज़ नहीं,
प्यार, सुरक्षा और अच्छे संस्कार चाहिए।
 
✅ आप क्या कर सकते हैं?

इस याचिका पर हस्ताक्षर करें (Sign करें)
इसे अपने दोस्तों, परिवार और सोशल मीडिया पर शेयर करें
और एक आवाज़ बनें – उस बचपन के लिए, जो सिर्फ़ स्क्रीन पर नहीं, जिंदगी में भी मुस्कुराना चाहता है।
 
🔚 अंत में:

अगर अभी नहीं बोले, तो आने वाला समय सिर्फ बोल्ड रील्स का होगा — बचपन, संस्कार और संस्कृति — सब खो जाएगा।

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saurabh jaiswalPetition Starter

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"Reel नहीं, Real बचपन चाहिए" – एक राष्ट्रीय अपील

आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया हमारे जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है। Instagram जैसे प्लेटफॉर्म्स जहां एक ओर रचनात्मकता और कनेक्टिविटी का साधन हो सकते हैं, वहीं दूसरी ओर इनका एक अंधेरा और खतरनाक चेहरा भी सामने आ रहा है – बोल्ड और अश्लील रील्स का बेतहाशा प्रचार।

सबसे अधिक प्रभावित हो रही है हमारी अगली पीढ़ी – हमारे बच्चे।

 
🚨 समस्या क्या है?

📱 Instagram जैसे प्लेटफॉर्म पर बच्चे हर दिन ऐसे रील्स देख रहे हैं जिनमें:

अश्लील कपड़े पहनकर डांस,
यौन इशारे और एक्सप्रेशन,
रिश्तों और शरीर को गलत तरीके से दर्शाया जा रहा है।
और ये सब कुछ "ट्रेंडिंग" टैब और एक्सप्लोर पेज पर बार-बार सामने आ रहा है।
👦 10 से 16 साल तक के बच्चे जो सीखने और समझने की उम्र में हैं, वो इन वीडियोस को देखकर:

कम उम्र में ही अश्लील चीजों के प्रति आकर्षित हो रहे हैं,
सोशल मीडिया पर वायरल होने के लिए खुद भी वैसा बनने की कोशिश कर रहे हैं,
और धीरे-धीरे उनकी मासूमियत, संस्कार और सोच खत्म हो रही है।
 
❗ ये सिर्फ एक डिजिटल समस्या नहीं है — ये एक सामाजिक आपदा है।

जब एक बच्चा लाइक्स और फॉलोअर्स के चक्कर में गलत राह चुनता है,
जब उसे लगता है कि अश्लीलता ही पहचान और पैसे का रास्ता है,
जब वो माता-पिता, स्कूल और समाज की बातों से ज्यादा Instagram के ट्रेंड्स पर भरोसा करता है, तो हम सबको एकजुट होकर सोचने और कुछ करने की ज़रूरत है।

 
🙏 हमारी मांगें:

हम Meta (Instagram की मालिक कंपनी) और भारत सरकार से निवेदन करते हैं कि वे:Instagram के एल्गोरिद्म को नियंत्रित करें, ताकि बोल्ड और अश्लील कंटेंट को वायरल न किया जाए।
18 साल से कम उम्र के यूज़र्स के लिए सख्त age-verification लागू करें।
Parent Control Tools और Safe Mode को ज़रूरी बनाया जाए।
भारत के सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों के अनुसार एक सोशल मीडिया कंटेंट गाइडलाइन बने।
 
📣 हमारा संदेश:

हमें Reels नहीं, Real बचपन चाहिए।बच्चों को लाइक्स और व्यूज़ नहीं,
प्यार, सुरक्षा और अच्छे संस्कार चाहिए।
 
✅ आप क्या कर सकते हैं?

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और एक आवाज़ बनें – उस बचपन के लिए, जो सिर्फ़ स्क्रीन पर नहीं, जिंदगी में भी मुस्कुराना चाहता है।
 
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