🚨 Railway Harassment: TT & RPF Fined Me ₹330 Without Reason & Locked Me Up! 🚨

The Issue

मैं, Maurya Vikash, एक आम नागरिक हूं, जिसने भारतीय रेलवे की लापरवाही और मनमानी का शिकार हुआ।

📌 घटना का विवरण:

मैं अपने 60+ साल के बुजुर्ग नाना-नानी को ट्रेन में छोड़ने गया था।

रेलवे ने समर भीड़ नियंत्रण के कारण प्लेटफॉर्म टिकट बंद कर रखा था, इसलिए मैं टिकट नहीं खरीद सका।

फिर भी, रेलवे टीटी (Ticket Examiner - TT) ने बिना किसी वैध कारण के ₹330 का जुर्माना लगाया।

जब मैंने विरोध किया कि प्लेटफॉर्म टिकट बंद था, तो TT और RPF ने मेरी बात अनसुनी कर दी।

मुझे जबरन लॉकअप में डाल दिया गया और मानसिक उत्पीड़न (Mental Harassment) किया गया।

इस दौरान मेरे बुजुर्ग नाना-नानी स्टेशन पर परेशान होते रहे, लेकिन RPF ने उनकी भी मदद नहीं की।

मुझे घंटों तक रोका गया, जब तक कि मैंने जबरदस्ती जुर्माना नहीं भर दिया।

जुर्माने की कोई पक्की रसीद नहीं दी गई और मुझे जबरदस्ती स्टेशन से बाहर निकाल दिया गया।

🚨 यह अन्याय क्यों है?

1️⃣ प्लेटफॉर्म टिकट बंद था, तो मैं उसे खरीद भी नहीं सकता था – फिर फाइन क्यों?

2️⃣ मुझे जबरन लॉकअप में रखना पूरी तरह गैरकानूनी है।

3️⃣ बुजुर्ग यात्रियों की मदद करने की बजाय, RPF और TT ने उन्हें भी परेशान किया।

4️⃣ यह रेलवे के भ्रष्टाचार और शक्ति के दुरुपयोग का स्पष्ट उदाहरण है।

5️⃣ अगर यह मेरे साथ हुआ, तो किसी और के साथ भी हो सकता है।

 

🔹 हमारी मांग:

✅ रेलवे मंत्री @AshwiniVaishnaw इस मामले की उच्च स्तरीय जांच करवाएं।

✅ RPF और TT के खिलाफ कार्रवाई की जाए, जिन्होंने गैरकानूनी तरीके से फाइन लिया।

✅ बिना गलती के वसूला गया ₹330 का रिफंड दिया जाए।

✅ यात्रियों के अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए रेलवे प्लेटफॉर्म पर कड़े नियम लागू किए जाएं।

✅ भविष्य में किसी यात्री को इस तरह मानसिक उत्पीड़न न सहना पड़े।

📢 अगर आप भी इस अन्याय के खिलाफ हैं, तो इस पेटिशन को साइन करें और इसे अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाएं!

🔗 #JusticeForPassengers #RailwayHarassment #IndianRailways

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Alex DevilPetition Starter

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मैं, Maurya Vikash, एक आम नागरिक हूं, जिसने भारतीय रेलवे की लापरवाही और मनमानी का शिकार हुआ।

📌 घटना का विवरण:

मैं अपने 60+ साल के बुजुर्ग नाना-नानी को ट्रेन में छोड़ने गया था।

रेलवे ने समर भीड़ नियंत्रण के कारण प्लेटफॉर्म टिकट बंद कर रखा था, इसलिए मैं टिकट नहीं खरीद सका।

फिर भी, रेलवे टीटी (Ticket Examiner - TT) ने बिना किसी वैध कारण के ₹330 का जुर्माना लगाया।

जब मैंने विरोध किया कि प्लेटफॉर्म टिकट बंद था, तो TT और RPF ने मेरी बात अनसुनी कर दी।

मुझे जबरन लॉकअप में डाल दिया गया और मानसिक उत्पीड़न (Mental Harassment) किया गया।

इस दौरान मेरे बुजुर्ग नाना-नानी स्टेशन पर परेशान होते रहे, लेकिन RPF ने उनकी भी मदद नहीं की।

मुझे घंटों तक रोका गया, जब तक कि मैंने जबरदस्ती जुर्माना नहीं भर दिया।

जुर्माने की कोई पक्की रसीद नहीं दी गई और मुझे जबरदस्ती स्टेशन से बाहर निकाल दिया गया।

🚨 यह अन्याय क्यों है?

1️⃣ प्लेटफॉर्म टिकट बंद था, तो मैं उसे खरीद भी नहीं सकता था – फिर फाइन क्यों?

2️⃣ मुझे जबरन लॉकअप में रखना पूरी तरह गैरकानूनी है।

3️⃣ बुजुर्ग यात्रियों की मदद करने की बजाय, RPF और TT ने उन्हें भी परेशान किया।

4️⃣ यह रेलवे के भ्रष्टाचार और शक्ति के दुरुपयोग का स्पष्ट उदाहरण है।

5️⃣ अगर यह मेरे साथ हुआ, तो किसी और के साथ भी हो सकता है।

 

🔹 हमारी मांग:

✅ रेलवे मंत्री @AshwiniVaishnaw इस मामले की उच्च स्तरीय जांच करवाएं।

✅ RPF और TT के खिलाफ कार्रवाई की जाए, जिन्होंने गैरकानूनी तरीके से फाइन लिया।

✅ बिना गलती के वसूला गया ₹330 का रिफंड दिया जाए।

✅ यात्रियों के अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए रेलवे प्लेटफॉर्म पर कड़े नियम लागू किए जाएं।

✅ भविष्य में किसी यात्री को इस तरह मानसिक उत्पीड़न न सहना पड़े।

📢 अगर आप भी इस अन्याय के खिलाफ हैं, तो इस पेटिशन को साइन करें और इसे अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाएं!

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