10 लाख बैंकर्स व 5 लाख बैंक पेंशनर्स को सेंट्रल पे कमीशन मिले तथा गैरकानूनी BPS बन्द हो


10 लाख बैंकर्स व 5 लाख बैंक पेंशनर्स को सेंट्रल पे कमीशन मिले तथा गैरकानूनी BPS बन्द हो
समस्या
10 लाख भारतीय पीएसयू बैंकर्स और 5 लाख बैंक पेंशनर्स दशकों से अपने वैध अधिकारों से वंचित हैं। बैंकर, सबसे अधिक मेहनती और ईमानदार श्रमिक वर्ग होने के बावजूद, अधिक जोखिम और देनदारियों के साथ, सबसे अधिक काम के बोझ के बावजूद बेहद कम वेतन के साथ काम कर रहे हैं, शाखाओं में सुरक्षा की कमी, खराब काम करने की स्थिति और बैंक पेंशनर्स बहुत कम पेंशन पर जी रहे है और उनका पेंशन आज तक अपडेट नहीं किया गया।
बैंकिंग उद्योग में बीपीएस (BIPARTITE SETTLEMENT SYSTEM) नामक अवैध व्यवस्था जो कि दो असंवैधानिक - अपंजीकृत, भ्रष्ट, गैर-सार्वजनिक संगठन IBA (भारतीय बैंक संघ) और UFBU (यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियनों) के बीच दशकों से चली आ रही है। ये दोनों गैरकानूनी संगठन, बिना किसी जवाबदेही के चल रहे हैं, दोनों आरटीआई में भी नहीं आते लेकिन 10 लाख बैंकरों और 5 लाख बैंक पेंशनरों के अधिकारों को बेचकर कई सौ- हजारों करोड़ो में अवैध कमीशन कमा रहे हैं।
यह अस्तित्व, गरिमा, लगभग 50 लाख लोगों (बैंकरों और उनके परिवार के सदस्यों) के जीवन की गुणवत्ता का सवाल है। 10 लाख पीएसयू बैंकर्स द्वारा सभी सरकार द्वारा शुरू की गई सामाजिक कल्याण योजनाओं को लागू की गई है। हम केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों के वेतन और पेंशन के बराबर के हमारे वैध अधिकार से वंचित हैं। इसलिए सभी बैंकर पीएम श्री नरेंद्र मोदी जी से हाथ जोड़कर मौजूदा भ्रष्ट बीपीएस प्रणाली को समाप्त करने की गुहार लगाते है और केंद्रीय वेतन आयोग के तहत 10 लाख बैंकरों और 5 लाख बैंक पेंशनरों को शामिल करने की अपील करते है।
जय हिन्द ! जय जवान! जय किसान! जय बैंकर्स !

समस्या
10 लाख भारतीय पीएसयू बैंकर्स और 5 लाख बैंक पेंशनर्स दशकों से अपने वैध अधिकारों से वंचित हैं। बैंकर, सबसे अधिक मेहनती और ईमानदार श्रमिक वर्ग होने के बावजूद, अधिक जोखिम और देनदारियों के साथ, सबसे अधिक काम के बोझ के बावजूद बेहद कम वेतन के साथ काम कर रहे हैं, शाखाओं में सुरक्षा की कमी, खराब काम करने की स्थिति और बैंक पेंशनर्स बहुत कम पेंशन पर जी रहे है और उनका पेंशन आज तक अपडेट नहीं किया गया।
बैंकिंग उद्योग में बीपीएस (BIPARTITE SETTLEMENT SYSTEM) नामक अवैध व्यवस्था जो कि दो असंवैधानिक - अपंजीकृत, भ्रष्ट, गैर-सार्वजनिक संगठन IBA (भारतीय बैंक संघ) और UFBU (यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियनों) के बीच दशकों से चली आ रही है। ये दोनों गैरकानूनी संगठन, बिना किसी जवाबदेही के चल रहे हैं, दोनों आरटीआई में भी नहीं आते लेकिन 10 लाख बैंकरों और 5 लाख बैंक पेंशनरों के अधिकारों को बेचकर कई सौ- हजारों करोड़ो में अवैध कमीशन कमा रहे हैं।
यह अस्तित्व, गरिमा, लगभग 50 लाख लोगों (बैंकरों और उनके परिवार के सदस्यों) के जीवन की गुणवत्ता का सवाल है। 10 लाख पीएसयू बैंकर्स द्वारा सभी सरकार द्वारा शुरू की गई सामाजिक कल्याण योजनाओं को लागू की गई है। हम केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों के वेतन और पेंशन के बराबर के हमारे वैध अधिकार से वंचित हैं। इसलिए सभी बैंकर पीएम श्री नरेंद्र मोदी जी से हाथ जोड़कर मौजूदा भ्रष्ट बीपीएस प्रणाली को समाप्त करने की गुहार लगाते है और केंद्रीय वेतन आयोग के तहत 10 लाख बैंकरों और 5 लाख बैंक पेंशनरों को शामिल करने की अपील करते है।
जय हिन्द ! जय जवान! जय किसान! जय बैंकर्स !

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29 नवंबर 2019 पर पेटीशन बनाई गई