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विषय: बेरोजगारी के संबंध में एक कारगार निती निर्माण करने हैतु आग्रह।

माननीय महोदय,
यह आपके समक्ष मैं अपने अच्छे विचार को प्रस्तुत करना चाहता हुँ कि हम बेरोजगारी को कम करने के लिए ऐसी नीति के सम्बंध मैं। विशेष रूप से भारत में बेरोजगारी की स्थिति खतरनाक है। सरकार से अधिक यह निजी क्षेत्र है जो नौकरियां बनाता है। इसलिए सरकार को निजी कम्नीयो को रोजगार निर्माण स्थीती मैं नीतीयो बना कर उसी नियमबद्ध करने के लिए एक कानुन निर्माण होना चाहिए निचे निम्नलिखीत विचार के अनुसार।वही यह चिंता का विषय है पुरे भारतवर्ष के लिए की हर साल, हमारे विश्वविद्यालयो से स्नातकों पास होकर बेरोजगारी के दोर मे शामील हो जाते है जो नौकरियों की तलाश करते हैं लेकिन उनकी बेरोजगारी दुर नहीं होती हैं और साल दर साल बेरोजगारो की संख्या मे बढ़ोतरी होती जाती हैं।
ऐसी स्थिति के बारे में बताते हुए मैं कुछ सुझाव रखना चाहता हूं आप सभी के समक्ष। मैं नीचे अपने विचार रख रहा हूं महोदय : -
दो अलग-अलग सर्वेक्षणों के आधार पर बेरोजगारो की गणना की जानी चाहिए। एन.एस.एस.ओ. द्वारा तकनिकी योग्यता वालो की सर्वेक्षण किया जाना चाहिए और दूसरा श्रम ब्यूरो का स्थापना सर्वेक्षण गेर तकनिकी योग्यता वाला का किया जाना चाहिए। उन बेरोजगार लोगों को हर साल श्रम ब्यूरो एवं एन.एस.एस.ओ. द्वारा प्रत्येक वर्ष बेरोजगारो की स्थापना सर्वेक्षण तेयार किया जाना चाहिए।

श्रमिक ब्यूरो एवं एन.एस.एस.ओ. के द्वारा बेरोजगारो का प्राप्त योग्यता अंकों और अनुभव के अनुसार एक सूची तैयार करनी चाहिए तथा निवीदा प्रक्रिया पुरा होने पर सफल निवीदातो को मजदूर ब्यूरो एवं एन.एस.एस.ओ.के द्वारा संबंधित ठेकेदारों या कंपनियों को सूची प्राप्त होने पर आवश्यकता अनुसार पर उस पर रोजगार प्रदान करने का कार्य किया जाना होगा। कार्यबल की आवश्यकता केवल तैयार सूची से ही चुना जाएगा। दूसरे शब्दों में उम्मीदवारों की सूची को कुल संख्या के अनुसार श्रम ब्यूरो एवं के डेटाबेस से लिया जाना चाहिए। रिक्ति को वह उसी डेटा बेस से पुरा किया जाने के लिए कंपनियों या ठेकेदारों के लिए अनिवार्य होना चाहिए। अद्वितीय कोड या स्टार रेटिंग प्रदर्शन के साथ उनके अनुभव और डिग्री के अनुसार जारी की जाए। वेतन अग्रिम में घोषित किया जाए ताकि कोई भी बाद में बदलाव नहीं कर सके।

अगर कोई कंपनी मैं नोकरी नहीं करना चाहता है। उन्हें अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने के लिए वित्तीय सहायता दी जाए। उनको दी गई वित्तीय सहायता 30 से 50% तक सब्सिडी दी जाए। सरकारी कंपनियों की आवश्यकता स्व-नियोजित व्यक्ति द्वारा पूरी की जाएगी। ( उदाहरन स्वरूप अगर पूर्व: रेलवे और भारत सरकार के किसी भी संस्थान को अगर नट बोल्ट की आवश्यकता है तो बेरोजगार की उद्योग द्वारा पूरी की जाए।)

हमें बेरोजगारी भत्ता की आवश्यकता नहीं है, हमें ऐसी नीति की आवश्यकता है जो हमे आत्म-सम्मान के साथ नौकरियों का अवसर पैदा करे।

हम अपने विश्व बैंक के लिए बहुत आभारी हैं, जिसने सरकारी निवीदाऔ मैं तीसरे पक्ष निगरानी की नीति शुरू की है, उसके संदर्भ में संशोधन की भी आवश्यकता है जिसे 10 करोड़ से शुरू किया जाना चाहिए।
जो बेरोजगार ठेकादारी का कार्य करना चाहता हो
उस व्यक्ति से संबंधित तकनीकी कुशल व्यक्ति के लिए 25% सरकारी निविदा आरक्षित की जानी चाहिए, उस निवीदाऔ पर काम करने के लिए मोबलाइजेशन सहायता व्यक्ति को केवल गारंटी शैक्षिक प्रमाणपत्र आधार पर बेरोजगारो को मोबलाइजेशन राशी दिया जाए। यह नीति सभी सरकारों पर लागू की जानी चाहिए। निविदाओं।
महोदय, बेरोजगार लोगों की ओर से मैं आपको बेरोजगारी को कम करने के लिए उपरोक्त नीति को लागू करने का आग्रह करता हूं। आपको धन्यवाद
हम आपसे अनुरोध करते हैं कि श्रीमान "इसे सर्मथन देने के लिए इस पहल" में शामिल हों



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