NPS को खत्म कर पुरानी पेंशन बहाल की जाये: #पेंशनअधिकारयात्रा


NPS को खत्म कर पुरानी पेंशन बहाल की जाये: #पेंशनअधिकारयात्रा
समस्या
विधायक, सांसद, मंत्री, इत्यादि को आज भी सरकार पुरानी गारन्टीड पेंशन दे रही है। वहीं देश की रक्षा के लिये शहीद होने वाले अर्धसैनिक बलों और 30 से 35 साल सेवा करने वाले सरकारी कर्मचारियों को पुरानी पेंशन का कोई लाभ नहीं मिल रहा है। उनपर नई पेंशन योजना (NPS) का बोझ लाद दिया गया है।
एक विधायक यदि सांसद और मंत्री बन जाता है तो वह तीन तीन पेंशन ले सकता है और जीवनभर सेवा करने वाले कर्मचारी का बुढ़ापा अंधकारमय कर दिया गया है। उसे NPS लाकर बेसहारा कर दिया गया है। हमारी पेटीशन पर अभी हस्ताक्षर कर इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि पुरानी पेंशन योजना बहाल हो।
01 जनवरी 2004 से केंद्र सरकार एवं अन्य राज्यों ने सरकारी कर्मचारियों के लिये पुरानी गारन्टीड पेन्शन व्यवस्था (OPS) को खत्म कर शेयर बाजार पर आधारित न्यू पेंशन स्कीम (NPS) की शुरुआत की थी। आज 15 साल बीत जाने के बाद भी NPS के तहत कर्मचारियों के रिटायर होने पर न तो सामाजिक सुरक्षा की गारन्टी है, ना उनके भविष्य का निर्धारण हो सका है।
नई पेंशन योजना (NPS) में प्रत्येक कर्मचारी के वेतन का 10% सरकार हर माह काट लेती है और स्वयं 14% मिलाकर यानी कुल वेतन का 24% हर महीने पेंशन के नाम पर अलग अलग कम्पनियों मे निवेशित कर देती है। पूरी सेवा (लगभग 30से 35साल ) के बाद भी यह स्पष्ट नहीं है कि रिटायरमेंट के बाद कर्मचारी को अन्तिम वेतन के अनुपात में कितनी पेंशन मिलेगी? यही नहीं कर्मचारी अपने ही हिस्से को भी जरूरत पड़ने पर शोषणकारी नियमों के चलते निकाल पाने में असमर्थ है।
दुःखद स्थिति यह है कि सेवाकाल के दौरान कर्मचारी की मृत्यु हो जाने पर पारिवारिक पेंशन की उपयुक्त व्यवस्था भी नहीं की गयी है। आज स्थिति यह है कि कर्मचारी की सेवा काल में मृत्यु हो जाने पर पारिवारिक पेंशन देने के नाम पर सरकार, कर्मचारी के समस्त निवेशित अंशदान (10% + 14%+रिटर्न) को जबरन हड़प रही है, यही नही कर्मचारी के 10% अंशदान को GPF का दर्जा देने की जगह जबरन शेयर बाजार में लगाया जा रहा है।
NPS के तहत रिटायर होने पर कुल जमा राशि की 40% राशि से पेन्शन तय की जायेगी। चूंकि इसमें महंगाई भत्ता और पे रिवीजन का कांसेप्ट नही है इसलिए पेंशन में कभी कोई वृद्धि नही होगी चाहे पेंशनर कितने ही साल जिंदा रहे!
इसके अलावा इस स्कीम में मिनिमम पेंशन का प्रावधान भी नही है जैसे पुरानी स्कीम में होता था। पुरानी पेंशन व्यवस्था में किसी भी पेंशनर को 9000रुपये+D•A• की मिनिमम पेंशन की गारन्टी प्राप्त थी, उसकी पेंशन इससे कम नही हो सकती थी। जबकि आज NPS के अंतर्गत रिटायर होने पर 400 से 2500 रुपये की पेंशन मिल रही है, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है, जबकी उसने 60वर्ष की उम्र तक विभाग की सेवा की है।
इसलिए NMOPS मध्य प्रदेश की टीम परमानंद डेहरिया जी के नेतृत्व में 1 दिसंबर से पूरे मध्यप्रदेश में पेंशन अधिकार यात्रा का शुभारंभ कर रही है यह यात्रा मध्य प्रदेश के सभी छह 6:30 लाख एनपीएस कर्मचारी और उनके परिवारों को जगाने का काम करेगी। इस पेटीशन पर हस्ताक्षर कर आप भी इस अभियान का हिस्सा बनें।
सरकार या तो NPS को रद्द करे या फिर कर्मचारी के शेयर (10%) को GPF यानी General Provident Fund का दर्जा दे और 20साल की सेवा होने पर उसके अन्तिम वेतन के 50% को पेंशन की गारंटी दे और उस पर महंगाई भत्ता व पे रिवीजन की सुविधा दे। इसके साथ साथ सेवाकाल में मृत्यु की दशा में फैमिली पेंशन के नाम पर कर्मचारी के शेयर को हड़पना बंद करे।
पेंशनविहीन साथियों से अनुरोध है कि इस आंदोलन को एक जन आंदोलन में बदलें। इस पेटीशन पर हस्ताक्षर करें और इसे Facebook, Twitter और Whatapp पर इतना शेयर करें ताकि हमारा आंदोलन देश के हर नागरिक तक पहुँचे।
मन्जीत सिंह पटेल
www.nmops.org.in
delhi@nmops.org.in

समस्या
विधायक, सांसद, मंत्री, इत्यादि को आज भी सरकार पुरानी गारन्टीड पेंशन दे रही है। वहीं देश की रक्षा के लिये शहीद होने वाले अर्धसैनिक बलों और 30 से 35 साल सेवा करने वाले सरकारी कर्मचारियों को पुरानी पेंशन का कोई लाभ नहीं मिल रहा है। उनपर नई पेंशन योजना (NPS) का बोझ लाद दिया गया है।
एक विधायक यदि सांसद और मंत्री बन जाता है तो वह तीन तीन पेंशन ले सकता है और जीवनभर सेवा करने वाले कर्मचारी का बुढ़ापा अंधकारमय कर दिया गया है। उसे NPS लाकर बेसहारा कर दिया गया है। हमारी पेटीशन पर अभी हस्ताक्षर कर इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि पुरानी पेंशन योजना बहाल हो।
01 जनवरी 2004 से केंद्र सरकार एवं अन्य राज्यों ने सरकारी कर्मचारियों के लिये पुरानी गारन्टीड पेन्शन व्यवस्था (OPS) को खत्म कर शेयर बाजार पर आधारित न्यू पेंशन स्कीम (NPS) की शुरुआत की थी। आज 15 साल बीत जाने के बाद भी NPS के तहत कर्मचारियों के रिटायर होने पर न तो सामाजिक सुरक्षा की गारन्टी है, ना उनके भविष्य का निर्धारण हो सका है।
नई पेंशन योजना (NPS) में प्रत्येक कर्मचारी के वेतन का 10% सरकार हर माह काट लेती है और स्वयं 14% मिलाकर यानी कुल वेतन का 24% हर महीने पेंशन के नाम पर अलग अलग कम्पनियों मे निवेशित कर देती है। पूरी सेवा (लगभग 30से 35साल ) के बाद भी यह स्पष्ट नहीं है कि रिटायरमेंट के बाद कर्मचारी को अन्तिम वेतन के अनुपात में कितनी पेंशन मिलेगी? यही नहीं कर्मचारी अपने ही हिस्से को भी जरूरत पड़ने पर शोषणकारी नियमों के चलते निकाल पाने में असमर्थ है।
दुःखद स्थिति यह है कि सेवाकाल के दौरान कर्मचारी की मृत्यु हो जाने पर पारिवारिक पेंशन की उपयुक्त व्यवस्था भी नहीं की गयी है। आज स्थिति यह है कि कर्मचारी की सेवा काल में मृत्यु हो जाने पर पारिवारिक पेंशन देने के नाम पर सरकार, कर्मचारी के समस्त निवेशित अंशदान (10% + 14%+रिटर्न) को जबरन हड़प रही है, यही नही कर्मचारी के 10% अंशदान को GPF का दर्जा देने की जगह जबरन शेयर बाजार में लगाया जा रहा है।
NPS के तहत रिटायर होने पर कुल जमा राशि की 40% राशि से पेन्शन तय की जायेगी। चूंकि इसमें महंगाई भत्ता और पे रिवीजन का कांसेप्ट नही है इसलिए पेंशन में कभी कोई वृद्धि नही होगी चाहे पेंशनर कितने ही साल जिंदा रहे!
इसके अलावा इस स्कीम में मिनिमम पेंशन का प्रावधान भी नही है जैसे पुरानी स्कीम में होता था। पुरानी पेंशन व्यवस्था में किसी भी पेंशनर को 9000रुपये+D•A• की मिनिमम पेंशन की गारन्टी प्राप्त थी, उसकी पेंशन इससे कम नही हो सकती थी। जबकि आज NPS के अंतर्गत रिटायर होने पर 400 से 2500 रुपये की पेंशन मिल रही है, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है, जबकी उसने 60वर्ष की उम्र तक विभाग की सेवा की है।
इसलिए NMOPS मध्य प्रदेश की टीम परमानंद डेहरिया जी के नेतृत्व में 1 दिसंबर से पूरे मध्यप्रदेश में पेंशन अधिकार यात्रा का शुभारंभ कर रही है यह यात्रा मध्य प्रदेश के सभी छह 6:30 लाख एनपीएस कर्मचारी और उनके परिवारों को जगाने का काम करेगी। इस पेटीशन पर हस्ताक्षर कर आप भी इस अभियान का हिस्सा बनें।
सरकार या तो NPS को रद्द करे या फिर कर्मचारी के शेयर (10%) को GPF यानी General Provident Fund का दर्जा दे और 20साल की सेवा होने पर उसके अन्तिम वेतन के 50% को पेंशन की गारंटी दे और उस पर महंगाई भत्ता व पे रिवीजन की सुविधा दे। इसके साथ साथ सेवाकाल में मृत्यु की दशा में फैमिली पेंशन के नाम पर कर्मचारी के शेयर को हड़पना बंद करे।
पेंशनविहीन साथियों से अनुरोध है कि इस आंदोलन को एक जन आंदोलन में बदलें। इस पेटीशन पर हस्ताक्षर करें और इसे Facebook, Twitter और Whatapp पर इतना शेयर करें ताकि हमारा आंदोलन देश के हर नागरिक तक पहुँचे।
मन्जीत सिंह पटेल
www.nmops.org.in
delhi@nmops.org.in

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