

आदरणीय,
कृपया CPGRAMS portal.gov.in के माध्यम से आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी को प्रेषित पत्राचार का संदर्भ लेने की कृपा करें।
मेरे द्वारा प्रेषित पत्रो को संदर्भ संख्या DPG/B/2018/00579(2)DEAB दिनांक 10 जुलाई 2018 एवम् DARPG/E/2019/17199 दिनांक 24 जुलाई 2019 के तहत पंजीकृत कर सचिव( वित्तीय सेवाओं) को प्रेषित किये जाने की सूचना प्रदान की गई थी।
प्रधानमंत्री जी को सम्बोधित पत्रो मे मैंने बैंक आँफ इंडिया के उच्च अधिकारियों द्वारा ग्राहक शिकायत निराकरण प्रणाली की पालना नहीं करने की विस्तृत जानकारी प्रदान करते हुए उनके द्वारा घोषित पारदर्शिता और व्यक्तिगत जवाबदेही नीति के तहत जांच हेतु प्रार्थना की थी किन्तु पोर्टल अधिकारियों द्वारा वित्त मंत्रालय द्वारा पंजीकृत शिकायतों को बन्द किये जाने पर समुचित ध्यान नहीं दिया।
यदि देश के सर्वोच्च लोक सेवक को उसके द्वारा घोषित नीति के तहत शिकायत करने पर भी सार्थक जांच के पंजीकृत शिकायतो को बन्द करना है तो सरकार द्वारा ऐसी घोषणाएं क्यों की जाती है ?
और क्यों ऐसे पोर्टल का गठन क्या ओचित्य है?
अतः मेरी आप सभी से प्रार्थना है कि आप इस जनहित के विषय की गंभीरता को समझते हुए मेरी पीटिशन पर अधिक से अधिक हस्ताक्षर प्राप्त करने की कृपा करें ताकि बैंक आँफ इंडिया में वर्तमान में व्याप्त अनियमितताओ की सच्चाई सामने आ सके।
मैं आप सभी के लिये मेरी पीटीशन से सम्बन्धित तथ्य प्रस्तुत कर रहा हूँ।
पीटीशन सम्बन्धित तथ्य
मै एक सेवा निवृत्त अधिकारी हूँ और पिछले तीन वर्षों से बैंक ऑफ इंडिया में ग्राहक शिकायत निवारण प्रणाली की निष्पक्ष जांच के लिये घोषित पारदर्शिता और व्यक्तिगत जिम्मेदारी नीति के तहत जांच के लिये संघर्ष कर रहा हूँ ।
सरकार द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र में पारदर्शिता लाने हेतु व्यापक प्रयास किये जा रहे हैं वहीं दूसरी ओर सझम अधिकारियों की संवेदनहीनता के कारण आम उपभोक्ताओ को सरकारी दिशा निर्देशों के तहत घोषित सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है ।
बैंकऑफइंडिया मुरलीपुरा शाखा द्वारा वरिष्ठ नागरिकों को प्राप्त विशेष लाभ एवं सुविधाओं से वंचित किया जा रहा है किन्तु विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने के बावजूद भी आज दिनांक तक किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया प्रदान जांच प्रारंभ कर वास्तविक स्थिति का मूल्यांकन करने के स्थान पर बार-बार विषय को सम्बंधित बैंक को ही प्रेषित किया जा रहा है जोकि निश्चित ही जांच का विषय है।
अतः मेरी आपसे विनम्र प्रार्थना है कि आप व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करते हुए विषय की विस्तृत जांच के आदेश प्रदान करने की कृपा करें।