

लोकतंत्र में आम उपभोक्ताओं को त्वरित न्याय प्रदान कराने के उदेश्य से सरकार द्वारा उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 बनाया गया।
सार्वजनिक श्रेत्र में कार्यरत संस्थाओं को आम उपभोक्ताओं के प्रति जवाबदेह बनाने हेतु व्यापक दिशा निर्देश जारी किये गये।
देश के विकास में बैंकों की महत्व पूर्ण भूमिका को ध्यान में रखते हुये सरकार द्वारा व्यापक दिशा निर्देश जारी किये गये और ग्राहक शिकायत निराकरण की प्रक्रिया सुनिश्चित की गई है किन्तु मेरे द्वारा पिछलें दो वर्षों से भी अधिक अवधि में सतत ध्यान आकर्षित करने के बावजूद भी सझम अधिकारियों द्वारा विषय की विस्तृत जांच प्रारम्भ कर वास्तवित मूल्यांकन करने से बचने का प्रयास किया जा रहा है।
सरकार द्वारा भी अपनी ही घोषित पारदर्शिता और व्यक्तिगत जवाबदेही नीति के प्रति त्वरित कार्यवाही के अभाव के कारण ही मेरे द्वारा यह पिटीशन प्रस्तुत की गई है ताकि वास्तवित सच्चाई सामने आ सके और समय रहते आवश्यक सुधारात्मक कार्यवाही सुनिश्चित की जा सके।
आपके सहयोग की अपेक्षा में।