बिहार के लोगों के लिए आपके अमर्यादित वक्तव्यों की #शब्दवापसी #TakeBackYourWords


बिहार के लोगों के लिए आपके अमर्यादित वक्तव्यों की #शब्दवापसी #TakeBackYourWords
समस्या
माननीय मोदी जी,
25 जुलाई को आपने मुजफ्फरपुर की रैली में बिहार के मुख्यमंत्री, श्री नीतीश कुमार जी के DNA पर एक अमर्यादित टिप्पणी की थी. आपने हमारे चुने हुए नेता के वंश और उनकी विरासत की अवमानना तो की ही, साथ ही सभी बिहार वासियों के गर्व और अस्मिता को चोट पहुंचाई. आपके वक्तव्य से हम सब की भावनाओं को गहरी ठेस पहुँची है.
हमारे मुख्यमंत्री जी ने आपको एक खुला पत्र लिख कर आपके संज्ञान में लाया कि आपके वक्तव्य ने उनके वंश पर सवाल उठाकर “बिहार की विरासत और बिहारी अस्मिता को भी ठेस पहुंचाई है”. उन्होंने बहुत शालीनता से विनम्र शब्दों में आपसे गुज़ारिश की कि आप अपने अपमानजनक शब्दों को वापस लें. पर हमारी इन विनम्र कोशिशों का संज्ञान लेने के बजाये आपने इस बार की गया रैली में दुबारा बिहार और बिहारवासियों के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया. आपने हमारे राज्य को न केवल “बिमारू” बताया बल्कि हम सब को “दुर्भाग्यशाली” भी कह दिया.
अब, हम एक हस्ताक्षर अभियान शुरू करने जा रहे हैं. हमारा यह मानना है कि आपका वक्तव्य आपके पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है. लोकतंत्र में जब चुने हुए नेता जन मानस की भावनाओं की उपेक्षा करते हैं, तो लोगों का यह कर्तव्य होता है कि वे लोकतान्त्रिक तरीके से अपनी बातों को पुरज़ोर तरीके से रखें. हम सभी जो बिहार में रहते हैं और बिहार से प्यार करते हैं, एक साथ खड़े हैं और हस्ताक्षर अभियान पर अपना हस्ताक्षर दर्ज कर आपसे अनुरोध करते हैं कि आप #शब्दवापसी कर लें.
आपका विश्वासी,
बिहार का एक आम नागरिक

समस्या
माननीय मोदी जी,
25 जुलाई को आपने मुजफ्फरपुर की रैली में बिहार के मुख्यमंत्री, श्री नीतीश कुमार जी के DNA पर एक अमर्यादित टिप्पणी की थी. आपने हमारे चुने हुए नेता के वंश और उनकी विरासत की अवमानना तो की ही, साथ ही सभी बिहार वासियों के गर्व और अस्मिता को चोट पहुंचाई. आपके वक्तव्य से हम सब की भावनाओं को गहरी ठेस पहुँची है.
हमारे मुख्यमंत्री जी ने आपको एक खुला पत्र लिख कर आपके संज्ञान में लाया कि आपके वक्तव्य ने उनके वंश पर सवाल उठाकर “बिहार की विरासत और बिहारी अस्मिता को भी ठेस पहुंचाई है”. उन्होंने बहुत शालीनता से विनम्र शब्दों में आपसे गुज़ारिश की कि आप अपने अपमानजनक शब्दों को वापस लें. पर हमारी इन विनम्र कोशिशों का संज्ञान लेने के बजाये आपने इस बार की गया रैली में दुबारा बिहार और बिहारवासियों के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया. आपने हमारे राज्य को न केवल “बिमारू” बताया बल्कि हम सब को “दुर्भाग्यशाली” भी कह दिया.
अब, हम एक हस्ताक्षर अभियान शुरू करने जा रहे हैं. हमारा यह मानना है कि आपका वक्तव्य आपके पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है. लोकतंत्र में जब चुने हुए नेता जन मानस की भावनाओं की उपेक्षा करते हैं, तो लोगों का यह कर्तव्य होता है कि वे लोकतान्त्रिक तरीके से अपनी बातों को पुरज़ोर तरीके से रखें. हम सभी जो बिहार में रहते हैं और बिहार से प्यार करते हैं, एक साथ खड़े हैं और हस्ताक्षर अभियान पर अपना हस्ताक्षर दर्ज कर आपसे अनुरोध करते हैं कि आप #शब्दवापसी कर लें.
आपका विश्वासी,
बिहार का एक आम नागरिक

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