Petition updateRemoval of Sheldon Pollock as mentor and Chief Editor of Murty Classical LibraryA Para on Sheldon Pollock (in Hindi) - Pls spread this message
Prof. Ganesh Ramakrishnan, Department of Computer Science and Engineering, IIT Bombay
Mar 14, 2016
शेल्डन पोलाक के अनुसार.......(नविता वशिष्ठ द्वारा लिखित) १. संस्कृत शास्त्र बौद्धिक विकास को पीछे ले जाने वाले एवं हठधर्मी दृष्टिकोण वाले हैं. यह शास्त्र मानसिक एवं बौद्धिक स्तर पर पंगु करने वाले ग्रन्थ हैं जो व्यक्तिगत रचनात्मकता को उबरने नहीं देते. २. संस्कृत शास्त्रों का उपयोग राजनीतिक एवं सामाजिक उत्पीड़न के लिए किया गया और केवल उन जैसे (अर्थात पोलाक जैसे विद्वान) ही इन बुराइयों को उजागर कर सकते हैं और भारतियों को (इन उत्पीड़क विचारों से) “मुक्ति” दिला सकते हैं ३. राम की पूजा एक नए पंथ के तौर पर करीब बारहवीं शताब्दी में लोकप्रिय करवाई गयी. ऐसा इसलिए किया गया ताकि राम-रावण युद्ध की तरह भारतीय शासक को राम के सामान पूजनीय और बाहरी आक्रान्ता को एक राक्षस की तरह दिखाया जाये. ४. महाभारत विश्व इतिहास की सबसे खतरनाक राजनीतिक कथा है क्योंकि इसमें गृहयुद्ध की दशा में भ्रातृघात (Fratricide: भाइयों को मार देना) के विषय पर गंभीर चिंतन हुआ है ५. संस्कृत एक मृत भाषा है और असल में बाहरी आक्रमणकारी ((अर्थात मुसलमान आक्रान्ता) इसको बढ़ावा देना चाहते थे ६. द्वितीय विश्वयुद्ध में जर्मन लोगों ने जो यहूदियों का नरसंहार किया था वो नाज़ी विचारधारा के संस्कृत अध्ययन का नतीजा था. उपरोक्त बिन्दुओं को पढ़कर हम सभी यह आत्म मंथन करें कि यदि शेल्डन पोलाक के विचार संस्कृत के प्रति इस स्तर तक नकारात्मक हैं तो “मूर्ति क्लासिकल लाइब्रेरी” के मुख्य संपादक रहते हुए क्या वे गहन वैदिक विचारों एवं प्राचीन भारत की उपलब्धियों को सही तरीके से प्रस्तुत कर पाएंगे? आप सब से अनुरोध है कि शेल्डन पोलाक के द्वारा लिखे हुए लेखों को आप स्वयं पढ़ें और तब निर्णय लें. (केवल उनकी प्रशंसा, जो मुख्यतः पश्चिमी विद्वान करते हैं, से प्रभावित हो कर कोई मत न बनाएं)
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