भारत के प्रत्येक हवाई अड्डों में एम्बुलेंस और मेडिकल सुबिधाए उपलब्ध कराने की आवश्यकता


भारत के प्रत्येक हवाई अड्डों में एम्बुलेंस और मेडिकल सुबिधाए उपलब्ध कराने की आवश्यकता
समस्या
मेरे पिता दिवंगत पद्मश्री डॉ. लालजी सिंह का 10 दिसंबर, 2017 को वाराणसी मे दिल का दौरा पड़ने के कारण निधन हो गया। वह वाराणसी हवाई अड्डे से हैदराबाद तक की यात्रा करने जा रहे थे। यदि उनको समय रहते पहियेदार कुर्सी (व्हीलचेयर) की सहायता दी गई होती, जोकि पहले से ही सुरक्षित की गई थी, अथवा समय से उनको चिकित्सक द्वारा चिकित्सा सहायता, ऑक्सीजन की सहायता या एम्बुलेंस के द्वारा अस्पताल ले जाने की सुबिधा प्रदान की गई होती, तो उनका जीवन बचाया जा सकता था। हवाई अड्डे पर बुनियादी चिकित्सा सुविधा मांगे जाने के पूरे 2 घंटे बाद चिकित्सा सुविधा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के दूरस्थ अस्पताल में प्राप्त हुई। उन्हें साँस लेने में भी समस्या हो रही थी तथा ऐसे महत्वपूर्ण समय मे भी उन्हें एक एम्बुलेंस भी उपलब्ध नहीं कराया गया था और उन्हें एक निजी वाहन में ले जाना पडा था| अस्पताल के डॉक्टरों का कहना था कि हवाई अड्डे पर पहले घंटे मे ही प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध करा दी गई होती तो डॉ. सिंह को बचाया जा सकता था।
यदि विश्व विख्यात वैज्ञानिक, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एवं पद्म श्री प्राप्तकर्ता के साथ ऐसा हो सकता है ,वह भी देश के प्रधान मंत्री के निर्वाचन क्षेत्र में, तो आम आदमी का ऐसी परिस्थिति में क्या होगा ?
प्रत्येक सप्ताह वरिष्ठ नागरिकों सहित लाखों लोग हमारे हवाई अड्डों से हवाई यात्रा करते है, फिर भी आपातकालीन स्थिति मे भी किसी बुनियादी चिकित्सा सहायता की कोई गारंटी नहीं है। हवाईअड्डो से उड़ रहे हवाई विमानो के द्वारा उत्पन्न किये जाने वाले आपातकालीन स्थितियों के लिए हवाईअड्डे तैयार हैं लेकिन यात्रा कर रहे यात्रियों के बारे में क्या? एक बार जब हम हवाई अड्डे में प्रवेश करते हैं, तो हमारा बहार निकलना व हमारी गतिविधियां प्रतिबंधित हो जाती है अतः यात्रियों के हवाई अड्डे पर पहुंचते ही यह हवाई अड्डे प्राधिकरण व हवाई विमान कंपनियों की जिम्मेदारी होनी चाहिए कि वह उनकी कुशलता व स्वास्थ्य की देखभाल का ध्यान रखे|
वर्षों से ऐसी बहुत सी घटनाये सामने आई है, जिनमे हवाई अड्डों पर समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध न होने
के कारण मृत्यु हो चुकी है, जिन्हे रोका जा सकता है| ऐसी घटनाओं की संख्या बढ़ रही है।
समाधान
भारत के प्रत्येक हवाई अड्डों में नागरिक उड्डयन मंत्रालय और हवाई अड्डा प्राधिकरण को आवश्यक रूप से यह सुबिधाए उपलब्ध कराने की आवश्यकता है-
1. हर घंटों में मेडिकल डॉक्टर कार्यकारी रूप से उपलब्ध होने चाहिये
2. एम्बुलेंस
3. न्यूनतम चिकित्सा सहायता (जैसे ऑक्सीजन सिलेंडर और डीफिब्रिलेटर)
4. प्रशिक्षित चिकित्सा कर्मी
5. आपातकालीन चिकित्सा सुविधा न केवल यात्रा कर रहे यात्रियों के लिए बल्की यात्रा करने जा रहे यात्रियों के लिए भी होनी चाहिए।
मैं सभी से, भारत में नागरिक हवाई अड्डों में इन सुविधाओं और मानक संचालन प्रक्रियाओं को अनिवार्य बनाने के लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय और भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण को प्रभावित करने के लिए इस याचिका पर हस्ताक्षर करने का अनुरोध करता हूँ। किसी को भी इन परिस्थितियों में अपने प्रियजनो को नही खोना चाहिये|

समस्या
मेरे पिता दिवंगत पद्मश्री डॉ. लालजी सिंह का 10 दिसंबर, 2017 को वाराणसी मे दिल का दौरा पड़ने के कारण निधन हो गया। वह वाराणसी हवाई अड्डे से हैदराबाद तक की यात्रा करने जा रहे थे। यदि उनको समय रहते पहियेदार कुर्सी (व्हीलचेयर) की सहायता दी गई होती, जोकि पहले से ही सुरक्षित की गई थी, अथवा समय से उनको चिकित्सक द्वारा चिकित्सा सहायता, ऑक्सीजन की सहायता या एम्बुलेंस के द्वारा अस्पताल ले जाने की सुबिधा प्रदान की गई होती, तो उनका जीवन बचाया जा सकता था। हवाई अड्डे पर बुनियादी चिकित्सा सुविधा मांगे जाने के पूरे 2 घंटे बाद चिकित्सा सुविधा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के दूरस्थ अस्पताल में प्राप्त हुई। उन्हें साँस लेने में भी समस्या हो रही थी तथा ऐसे महत्वपूर्ण समय मे भी उन्हें एक एम्बुलेंस भी उपलब्ध नहीं कराया गया था और उन्हें एक निजी वाहन में ले जाना पडा था| अस्पताल के डॉक्टरों का कहना था कि हवाई अड्डे पर पहले घंटे मे ही प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध करा दी गई होती तो डॉ. सिंह को बचाया जा सकता था।
यदि विश्व विख्यात वैज्ञानिक, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एवं पद्म श्री प्राप्तकर्ता के साथ ऐसा हो सकता है ,वह भी देश के प्रधान मंत्री के निर्वाचन क्षेत्र में, तो आम आदमी का ऐसी परिस्थिति में क्या होगा ?
प्रत्येक सप्ताह वरिष्ठ नागरिकों सहित लाखों लोग हमारे हवाई अड्डों से हवाई यात्रा करते है, फिर भी आपातकालीन स्थिति मे भी किसी बुनियादी चिकित्सा सहायता की कोई गारंटी नहीं है। हवाईअड्डो से उड़ रहे हवाई विमानो के द्वारा उत्पन्न किये जाने वाले आपातकालीन स्थितियों के लिए हवाईअड्डे तैयार हैं लेकिन यात्रा कर रहे यात्रियों के बारे में क्या? एक बार जब हम हवाई अड्डे में प्रवेश करते हैं, तो हमारा बहार निकलना व हमारी गतिविधियां प्रतिबंधित हो जाती है अतः यात्रियों के हवाई अड्डे पर पहुंचते ही यह हवाई अड्डे प्राधिकरण व हवाई विमान कंपनियों की जिम्मेदारी होनी चाहिए कि वह उनकी कुशलता व स्वास्थ्य की देखभाल का ध्यान रखे|
वर्षों से ऐसी बहुत सी घटनाये सामने आई है, जिनमे हवाई अड्डों पर समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध न होने
के कारण मृत्यु हो चुकी है, जिन्हे रोका जा सकता है| ऐसी घटनाओं की संख्या बढ़ रही है।
समाधान
भारत के प्रत्येक हवाई अड्डों में नागरिक उड्डयन मंत्रालय और हवाई अड्डा प्राधिकरण को आवश्यक रूप से यह सुबिधाए उपलब्ध कराने की आवश्यकता है-
1. हर घंटों में मेडिकल डॉक्टर कार्यकारी रूप से उपलब्ध होने चाहिये
2. एम्बुलेंस
3. न्यूनतम चिकित्सा सहायता (जैसे ऑक्सीजन सिलेंडर और डीफिब्रिलेटर)
4. प्रशिक्षित चिकित्सा कर्मी
5. आपातकालीन चिकित्सा सुविधा न केवल यात्रा कर रहे यात्रियों के लिए बल्की यात्रा करने जा रहे यात्रियों के लिए भी होनी चाहिए।
मैं सभी से, भारत में नागरिक हवाई अड्डों में इन सुविधाओं और मानक संचालन प्रक्रियाओं को अनिवार्य बनाने के लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय और भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण को प्रभावित करने के लिए इस याचिका पर हस्ताक्षर करने का अनुरोध करता हूँ। किसी को भी इन परिस्थितियों में अपने प्रियजनो को नही खोना चाहिये|

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