Raise the stipend for Rajasthan MBBS intern doctors to at least 20,000/-.

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कोविड-19 की इस महामारी के समय में राजस्थान के 1350 एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टर जी-जान से काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें दिन का मात्र 233 रू (7000/-प्रति माह) मिलता है। जो की संपूर्ण देश में सबसे कम है।

कोविड-19 से जुड़ी ड्यूटी करने वाले एक एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टर को एम्स अस्पतालों में 23,500, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में 20,000, हरियाणा में 17,000, पंजाब, बिहार और हिमाचल प्रदेश में 15,000, कर्नाटक और असम में 30,000 रुपए मासिक भत्ता (स्टाइपेंड) मिल रहा है जबकि राजस्थान में इंटर्न डॉक्टर को उसी काम के 7,000 रुपए दिए जा रहे हैं।

राजस्थान के इंटर्न पिछले 60 दिन से अपनी मांग उठा रहे हैं, हाथ पे काली पट्टी बांधकर काम कर रहे हैं,
ट्वीटर पे इंटर्न स्टाइपेंड का मुद्दा पिछले एक महीने में 4 बार राजस्थान में टॉप ट्रेंड में रहा है। BBC news, Dainik Bhaskar, Indian Express ने भी इस मुद्दे को विस्तार से प्रकाशित किया है।

हम में से ज्यादातर एमबीबीएस इंटर्न गरीब एवं किसान के घर से आते हैं, मेहनती एवं होनहार होने के बावजूद जिस काम के लिए अन्य राज्यों में 15,000 से 30,000 रू मिल रहे हैं राजस्थान में उस कार्य के लिए मात्र 7000 रू मिल रहे हैं। यह बताते हुए हमें बहुत दुख हो रहा है की हमें एक न्यूनतम मजदूरी भत्ते से भी कम स्टाइपेंड मिलता है अथवा हम जरूरी सुरक्षा सामान भी नहीं खरीद पाते जिसके चलते बहुत परेशानी हो रही है एवं इंटर्न खुद संक्रमित हो रहे हैं।

अतः आप से निवेदन है कि इस पेटिशन को साइन करके कोविड 19 में मरीजों की सेवा कर रहे MBBS इंटर्न डॉक्टर को उनके हक़ का स्टाइपेंड दिलवाने में मदद करें।

ताकि सरकार मामले पे संज्ञान लेवे एवं जल्द से जल्द इस भेदभाव को मिटाते हुए इंटर्न स्टाइपेंड अन्य राज्यों के बराबर करें।