
sexual assault का मुकद्दमा या आरोप हमेशा पुरुष पर ही क्यों लगता है?!! सोचने वाली बात है। कभी किसी स्त्री पर क्यों नहीं लगाया गया?
जवानी इन दोनों को ही आती है और रोमांस दोनों की ही ज़रूरत है। तो आज तक न्यूज़ में एक भी स्त्री पर किसी का यौन शोषण करने का आरोप क्योंकर नहीं बताया गया?
एक और बात: गुप्तांग पुरुषों के भी होते हैं, इज़्ज़त उनकी भी होती है। तो उनकी इज़्ज़त बचाने के लिए कोई भी कानून क्यों नहीं?!!
यदि किसी पुरुष के कपड़े जबरन उतारे जाएँ (शर्मीले, कमज़ोर, नेकदिल पुरुष भी होते हैं; ध्यान रहे), तो वह किसके सामने गुहार लगाए?! कोई शरारती लड़की किसी लड़के के साथ गंदा काम भी कर जाए और झूठ केस डालने का कहकर उसे ब्लैकमेल करे और बार-बार उसके साथ संभोग करती रहे। तो ऐसे में न्याय कैसे हो?
जनता झूठे वायदों और सपनों में है कि सरकार ने महिलाओं की इज़्ज़त बचाने के लिए पर्याप्त कानून बना रखे हैं। सच तक यह है कि मुजरिमों में पुरुष व स्त्री में भेदभाव करके उसने स्त्री की इज़्ज़त को रक्षा में ही कमी कर छोड़ी है। कोई दबंग महिला किसी कमज़ोर महिला की इज़्ज़त से खेले, उसके कपड़े जबरन उतरवाए, या अनेक महिलाओं के सामने उसे नंगा करके अपमानित करे, तो बचाने के लिए कोई व्यक्ति नहीं और न्याय दिलाने के लिए कोई भी कानून नहीं।
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