सरकारी बैंक या तो मुनाफा कमाने के साधन बनाए जाएं या सरकारी योजनाओं को घर घर पहुंचाने के

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समस्या

भारत के समस्त सरकारी बैंक मूलतः किसी राजपरिवार या फिर किसी धनवान व्यक्ति के अपने बैंक थे उनका राष्ट्रीयकरण सिर्फ और सिर्फ इस मकसद से किया गया की भारत के आम नागरिकों को बैंकिंग सुविधा मिल सके साथ ही सरकार की समस्त नीतियां गतिविधियां और सरकारी योजनाएं आम जनता तक पहुंच सके बैंकों के राष्ट्रीयकरण से लेकर पिछले कुछ दिनों तक सरकारी बैंक भारत की जनता और समस्त बुद्धिजीवी लोग ऐसा ही मानते आए हैं कि सरकारी बैंकों का मकसद सिर्फ और सिर्फ प्रत्येक सरकारी बैंक संबंधी या अर्थव्यवस्था संबंधी योजना और उसका लाभ देश के किसी कोने में बसे आम जनता तक भली-भांति पहुंचे.|

 8नवंबर 2016 को अचानक आदेशित हुए विमुद्रीकरण के प्रयास को और इस समस्त योजना को संपूर्ण भारत भू भाग पर भलीभांति ढांचागत रुप से आयोजित करने के साथ-साथ इसे सफल बनाने में इनका बहुत बड़ा योगदान रहा है साथ ही डिजिटल भारत के प्रतीक आयोजन जैसे जन धन योजना को अभूतपूर्व तरीके से सरकारी बैंकों ने ही सफल बनाया है खाता खोलने के एक फोन से लेकर बैंक के सर्वर में इसके अध्ययन और खाताधारक को डेबिट कार्ड जारी करने के साथ साथ अन्य समस्त प्रत्यक्ष और परोक्ष क्रियाविधि में कितना ही खर्चा हुआ होगा लेकिन सरकारी बैंकों ने आम भारतीय जनता के करोड़ों खाते 0 बैलेंस पर खोले हैं जिनमें से आज 3 साल बाद तक भी अधिकांश खाते 0 आजकल के नियमानुसार न्यूनतम बैलेंस से भी कम रकम जमा वाले हैं फिर भी सरकार के एक आदेश की पालना के लिए सरकारी बैंकों ने अपने टॉप मैनेजमेंट से लेकर छोटे-छोटे गांव में स्थित अपनी शाखा को और अपने समस्त स्टाफ को इस काम में लगा दिया कि उक्त सरकारी योजना और उसका लाभ प्रत्येक आम नागरिक तक पहुंचे इस समस्त आयोजन में कभी भी बैंक ने अपने लिए लाभ या हानि का सौदा न समझा बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ होने के नाते इसे अपना दायित्व समझा और भली-भांति कर दिखाया जो कि भारत ही नहीं संपूर्ण विश्व के लिए एक बहुत बड़ा उदाहरण है.।

इसके साथ ही कई अनेक काम जिनका मकसद लाभ या हानि की कसौटी पर नहीं मापा जा सकता लेकिन राष्ट्र सेवा के लिए जिस तरह एक फौजी सरहद पर डटा रहता है उसी तरह आर्थिक मामलों में समस्त सरकारी बैंक और उनके कर्मचारी बैठे रहते हैं राष्ट्र सेवा में।

आजकल कुछ बुद्धिजीवी लोग सरकारी बैंकों की तुलना देश के उन नामी निजी बैंकों से करते हैं जिन बैंकों में खाता खुलवाने के लिए ₹10000 न्यूनतम बैलेंस रखना होता है साथ ही वह अलग-अलग चार्जेस के नाम पर बहुत बड़ी रकम ग्राहकों से वसूलते हैं तब जब के इतने सारे सरकारी बैंक प्रतिस्पर्धा में उनके सामने खड़े हैं वही समस्त सरकारी बैंक देश के करोड़ों पेंशनभोगियों के लिए विधवाओं के लिए BPL धारी परिवारों के लिए तथा समाज के समस्त दबे कुचले और आर्थिक रुप से कमजोर लोगों के लिए जीरो बैलेंस के खाते बड़ी मात्रा में खोल रहा है और उनको शानदार सेवा दे रहा है हर छोटे-बड़े क्षेत्र में अपनी शाखाएं खोल खोल कर अब जरा सोचिए अगर सरकारी बैंकों की उपयोगिता उनके लाभ या हानि की बैलेंस शीट पर की जाए तो हम पाएंगे कि आने वाले कुछ सालों में बैंक जो है वह सिमटकर सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित हो जाएंगे फिर ग्रामीण भारत के लिए कोई बैंकिंग सेवा ना होगी और हर जगह निजीकरण होने से बैंकों में प्रत्येक मामले में बहुत बड़ी मात्रा में चार्ज वसूले जाएंगे जो कि अभी सरकारी बैंकों की मौजूदगी और प्रतिस्पर्धा के कारण नहीं है साथ ही उक्त समस्त सरकारी बैंक बढ़-चढ़कर सरकारी योजनाओं जैसे वर्तमान में तीन प्रमुख सामाजिक सुरक्षा योजनाएं जैसे प्रधानमंत्री बीमा सुरक्षा योजना प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना और अटल पेंशन योजना आदि में बैंक के समस्त मशीनरी का इस्तेमाल तो होता है लेकिन फायदे के नाम पर या तो आम जनता को है या सरकार को बैंक को इसमें कोई बड़ा फायदा नहीं है फिर भी बैंक अपनी पूरी मशीनरी लगाकर इस काम को शानदार तरीके से अंजाम देता है जिसको आंकड़ों के हिसाब से देखा जा सकता है इससे पहले विमुद्रीकरण और उससे भी पहले प्रधानमंत्री जनधन योजना में ऐसा हो चुका है।

 

आपसे अनुरोध है की मेरी इस पिटीशन पर साइन करें ताकि हम संबंधित समस्त सक्षम अधिकारियों और निर्णय लेने में सक्षम पदाधिकारियों तक अपनी मांग पहुंचा सके की अगर सरकारी बैंकों को मुनाफा कमाने के लिए माना जा रहा है तो कृपया करके बैंक के लिए हानिकारक और कम लाभ दें समस्त योजनाओं को ना थोपा जाए अथवा ऐसी योजनाओं के लिए बैंकिंग व्यवस्था मशीनरी सिस्टम आदि का इस्तेमाल करने के बदले बैंकों को भुगतान किया जाए तथा इन योजनाओं के प्रचार प्रसार के लिए सरकारिया कोई भी संस्था अलग से कर्मचारी रखें जिससे कि बैंक का अपना पारंपरिक मूल काम में बाधा उत्पन्न ना हो और अगर बैंकों को समाज सेवा तथा समाज के प्रत्येक वर्ग तक सरकारी तथा बैंकिंग संबंधित सेवा पहुंचाने का जिम्मा दिया गया है तो फिर इसके सफल और असफल होने की गणना लाभ या हानि के आंकड़ों पर ना करके योजना के लागू होने  के आंकड़ों के अनुसार होनी चाहिए जिससे कि लाखों बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों के वेतन और सुविधाओं के मामलों में समस्या उत्पन्न हो तथा वर्षों तक उनके वेतन समझौता को सिर्फ इसलिए न लटका के रखा जाए कि बैंक मुनाफा नहीं कमा रहे हैं।

 

साथ ही पिछले कुछ वर्षों में बैंकिंग व्यवस्था में कुछ बहुत बड़े फ्रॉड हुए हैं जिनमें फ्रॉड की रकम अचंभित करने वाली और बहुत बड़ी है साथ ही ऐसे फ्रॉड और बड़े-बड़े एनपीए में एक और समानता यह पाई गई है कि ऐसे मामलों में निर्णायक प्राधिकारी बहुत ही उच्च स्तर के होते हैं लेकिन वेतन समझौता और सामान्य मूलभूत सुविधाओं संबंधी द्विपक्षीय समझौतों को लटका कर परेशान निचले स्तर के कर्मचारियों और अधिकारियों को किया जाता है जो कि सही नहीं है जिस किसी भी कक्षा के अधिकारी द्वारा किसी फ्रॉड या खराब खाते के स्वीकृति संबंधी प्रक्रिया को किया गया हो मात्र उसे या उससे संबंधित विभाग और कर्मचारियों को ही निशाने पर लिया जाना चाहिए नाकी समस्त अन्य बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों को जो कि दिन-रात अपनी मेहनत और लगन से अपने संस्थान के लिए सेवा देने के लिए घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर परिवार से बहुत दूर अपनी जिंदगी गुजार रहे होते हैं।

 अगर 5   7 बैंक कर्मचारियों अधिकारियों द्वारा किसी असामान्य और अनैतिक घटना को अंजाम दिया जाता है तथा इसके लिए समस्त बैंक के कर्मचारियों और अधिकारियों को प्रताड़ित किया जाता है तो भारतीय संविधान के समानता के अधिकार के अनुसार यह यह न्याय पूर्ण होगा कि 5 या 7 सांसदों या नेताओं के भ्रष्ट होने की स्थिति में समस्त संसद या विधानसभा के सदस्यों के वेतन संबंधी विधेयकों और कानूनों को लटकाया जाए जाहिर है ऐसा नहीं होगा क्योंकि भारतीय न्याय व्यवस्था और संविधान यह कहता है किसी भी गलती के लिए सजा उस गलती को करने वाले को ही मिलनी चाहिए अन्य किसी को नहीं।

साथ ही सरकार और संबंध प्राधिकारियों से निवेदन है कि वह एक ऐसा बिल लाएं जिससे कि कोई एनपीए धारक अथवा ऐसा ग्राहक जो किसी बैंक का लोन चुकता नहीं कर रहा उसे किसी और बैंक में बैंकिंग सेवा न मिलनी चाहिए तथा समस्त सरकारी सेवाएं जो की कम कीमत पर मिल रही होती है उन्हें बंद कर दिया जाए ताकि देश के समस्त व्यक्ति जो कि विलफुल डिफॉल्टर है वह बैंक का भुगतान समय पर करें तथा सरकार से निवेदन है कि समस्त सक्षम न्यायालय में बैंक के वसूली संबंधी मामलों पर जल्द से जल्द कार्यवाही करवाने की व्यवस्था करवाएं जिससे कि भारतीय सरकारी बैंकों की दशा सुधर सके।

 

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SADDAM HUSSAIN DARSHपेटीशन स्टार्टर

फैसला लेने वाले

Indian president,
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Loksabha speaker,
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Prime Minister  Narendra Modi,
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Finance Ministry Govt of India,
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