सुपर-30 बायोपिक फ़िल्म की बुनियाद झूठी/गलत है, सुपर-30 फिल्म के निर्माण को तुरंत रोका जाए


सुपर-30 बायोपिक फ़िल्म की बुनियाद झूठी/गलत है, सुपर-30 फिल्म के निर्माण को तुरंत रोका जाए
समस्या
सामान्यतः फिल्में समाज का दर्पण होती है, वो भूत, भविष्य और वर्तमान से जुड़ी अनुभव, प्रेरणा और कल्पनाओं पर आधारित होती है। वर्तमान में बन रही एक बायोपिक फ़िल्म काफी चर्चा में है जिसके मुख्य किरदार के रूप में अभनेता हृतिक रोशन नजर आने वाले है। बायोपिक फिल्मो के निर्माण से ज्यादा वक्त विषयवस्तु के शोध पर लगता है। इस प्रकार की फिल्मों से समाज स्वाभाविक रूप से जुड़ा होता है व उसे पर्दे पर देखना उनके लिए एक सुखद अहसास होता है।
किंतु तब क्या, जब एक बहुप्रचारित बायोपिक फ़िल्म जिसकी बुनियाद ही झूठी/गलत हो?
'सुपर-30' हम बिहारियों के लिए बिहार की धरती से उपजी एक विचारधारा है जो वंचित वर्ग के लोगों के सपनों को साकार करता है, ना कि व्यक्ति विशेष के निजी संस्थान। 'सुपर-30' की धारणा, उसकी उपयोगिता, उसकी सफलता, समाज पर उसका सकारात्मक प्रभाव एवं अन्य क्षेत्रों में इसकी नींव की संभावनाओं पर फ़िल्म बननी चाहिए थी, ना कि किसी एक व्यक्ति की महिमामंडन पर। यह धारणा किसी व्यक्ति विशेष की छवि से इतर एक उत्कृष्ट शिक्षकों के टीम की बुनियाद, शिक्षक-छात्र के आपसी सामंजस्य, सामाजिक बदलाव और समाज के सफलता की कहानी है। जबकि श्री आनंद ने इसे मात्र अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि की तरह इस्तेमाल किया।
सर्वप्रथम श्री आनंद का यह दावा ही गलत है कि सुपर-30 की बुनियाद उन्होंने रखी थी, पूरा बिहार जानता है कि पूर्व पुलिस महानिदेशक श्री अभयानंद ही थे जिन्होंने इस सोच को उनके साथ साझा किया और तत्पश्चात सुपर-30 की नींव पड़ी। और श्री आनंद ने क्या किया, श्रेय देना तो दूर की बात है वो तो श्री अभयानंद का जिक्र भी नहीं करते।
हम बिहारियों के लिए यह गर्व की बात होगी कि बिहार जैसे ज्ञानस्थली से उपजी असीमित संभावनाओं एवं सामाजिक बदलाव लाने वाली 'सुपर-30' पर फ़िल्म बने, वैसे भी सम्पूर्ण विश्व को वंचित वर्गों के उत्थान के इस अभियान से रूबरू होना ही चाहिए और इसके लिए फ़िल्म एक सशक्त माध्यम है। फ़िल्म 'सुपर-30' धारणा की स्थापना, गठन की प्रक्रिया से शुरू होकर सफलता के माध्यम से एक सामाजिक संदेश देती हुई होनी चाहिए, ‘यदि समाज चाहे तो अपनी हर समस्या का निदान संयुक्त रूप से कर सकता है।'
जबकि अभी जो फ़िल्म निर्माणधीन है उसकी पृष्ठभूमि एक व्यक्ति विशेष कि कामयाबी का वर्णन मात्र है। इसलिए इस फ़िल्म पर आम बिहारियों का ऐतराज होना लाजमी है और हम इसके निर्माताओं / निर्देशक को समाज के तरफ से संदेश देना चाहते है कि फ़िल्म का सिर्फ व्यवसायिक दृष्टिकोण ना सोचें बल्कि हम सभी बिहारवासियों के अभिमान के पर्याय 'सुपर-30' को उचित मान-सम्मान दे। मुझे यकीन है की निर्माताओं / लेखक / निर्देशक ने इस विषय पर शोध ज़रूर किया होगा परन्तु कहीं न कहीं जमीनी स्तर पर शोध की कमी जान पड़ती है, वरना 'सुपर-30' जैसे क्रांतिकारी विचारधारा को एक व्यक्ति की कहानी के रूप में सिमटा देने की भूल कदापि नहीं करते। इसलिए अनुरोध है की 'मूल आत्मा' से छेड़-छाड़ कर हमारी भावनाएं आहत न करे।
श्री आनंद की नीयत व चरित्र पर संदेह निम्न कारणों से है:-
- सुपर-30 की सफ़लता एक उत्कृष्ट शिक्षकों के समूह का आपसी सामंजस्य की बानगी है इसलिए इसका श्रेय श्री आनंद के साथ सभी को भी मिलना चाहिए?
- उनका ज्यादातर वक़्त प्रदेश-देश-विदेशों में पुरस्कार अर्जित करने एवं भ्रमण पर गुजरता है तो वो सुपर-30 में गणित कब और कैसे पढ़ा लेते है?
- उनका यह दावा की उन्होंने गणित विषय में कुछ मौलिक शोध किया है जिसे कुछ विदेशी पत्रिकाओं ने प्रकाशित किया है। इन पत्रिकाओं से जब संपर्क किया गया तो उनका औपचारिक जवाब आया कि यह शोध कार्य नहीं है या उनका कोई आर्टिकल ही नहीं छपा है। जिस शोध के बल पर वो खुद को गणितज्ञ के रूप में प्रस्तुत करते है वो ही गलत है, इसका मतलब वो समाज को गुमराह करते आ रहे है। ऐसा क्यो?
- इतनी निर्धनता के बाबजूद कुछ दिन पूर्व एक स्थापित अखवार में छपी खबर से यह पता चलता है की श्री आनंद कुमार द्वारा काफी अचल संपत्ति (जमीन एवं मकान) का निबंधन करवाया गया है। ज्ञात हो कि अपने संयुक्त परिवार के वो एकमात्र आमदनी का जरिया है इसके पश्चात निबंधित अचल संपत्तियां के किये धन आया कहाँ से?
- 'रामानुजम स्कूल ऑफ मैथमेटिक्स' जो कि श्री आनंद के शिक्षण व्यवसाय का प्रमुख केंद्र है, से आज तक आईआईटी की प्रवेश परीक्षा में कितने छात्र सफल हुए इसकी सार्वजानिक जानकारी कहीं उपलब्ध नहीं है। जब श्री आनंद का पूरा समय सामाजिक कार्य यानि “Super-30” में लग जाता है तो दूसरी संस्थान जिसमे हजारों छात्र फीस देकर पढाई कर रहे हैं, का क्या औचित्य है? क्या इन दोनों संस्थानों में कोई आपसी संबंध है? अगर हाँ, तो क्या?
- आईआईटी-जेईई की प्रवेश परीक्षा के पूर्व सुपर-30 के परीक्षार्थियो की सूची क्यों नही जारी करते? साथ ही सफल बच्चों का दाखिला किन-किन आईआईटी कॉलेजों में हुआ है इसकी भी पूरी जानकारी कभी उपलब्ध नहीं कराया जाता है।
ये कुछ ऐसे सवाल है जिनके उत्तर हर कोई जानना चाहता है। श्री आनंद कुमार ने मीडिया के सामने आज तक सिर्फ उपलब्धियां बताई है वो भी बिना किसी साक्ष्य के, अपने ऊपर लगने वाले आरोपो का भी वो कोई जवाब नहीं देते है। शायद उनकी चुप्पी उनकी मौन स्वीकृति दिखाती है।"
अतः मैं विनम्रता पूर्वक प्रोड्यूसर रिलायंस एंटरटेनमेंट , निर्देशक श्री विकास बहल और मुख्य कलाकार श्री हृतिक रौशन जी से समस्त बिहारिवासीयों के तरफ से निवेदन करता हूं कि इस फिल्म के निर्माण को तुरंत रोका जाए एवं इसके पटकथा पर पूर्ण: रिसर्च के आधार पर विचार करे। किसी ऐसे वयक्ति को फिल्म के माध्यम से महिमामंडित ना करें जिनका दावा और आचरण ही संदेहास्पद है।
Annexure-
Real Hero award function by Reliance 2008,
List of Awardees of Math Fest 2003 Programme in USA!
Super 30: True Or False?
HrithikRoshan, you better read what Super 30 co-founder has to say about Anand Kumar
‘HrithikRoshan should find out the truth himself’, says 'Super 30' co-founder
रितिक रोशन की फिल्म को बताया झूठ का पुलिंदा
सुपर 30 फेम आनंद का सोशल मीडिया पर कसा जा रहा तंज
सुपर-30 के आनंद को लालू जी के छूने पड़े पैर

समस्या
सामान्यतः फिल्में समाज का दर्पण होती है, वो भूत, भविष्य और वर्तमान से जुड़ी अनुभव, प्रेरणा और कल्पनाओं पर आधारित होती है। वर्तमान में बन रही एक बायोपिक फ़िल्म काफी चर्चा में है जिसके मुख्य किरदार के रूप में अभनेता हृतिक रोशन नजर आने वाले है। बायोपिक फिल्मो के निर्माण से ज्यादा वक्त विषयवस्तु के शोध पर लगता है। इस प्रकार की फिल्मों से समाज स्वाभाविक रूप से जुड़ा होता है व उसे पर्दे पर देखना उनके लिए एक सुखद अहसास होता है।
किंतु तब क्या, जब एक बहुप्रचारित बायोपिक फ़िल्म जिसकी बुनियाद ही झूठी/गलत हो?
'सुपर-30' हम बिहारियों के लिए बिहार की धरती से उपजी एक विचारधारा है जो वंचित वर्ग के लोगों के सपनों को साकार करता है, ना कि व्यक्ति विशेष के निजी संस्थान। 'सुपर-30' की धारणा, उसकी उपयोगिता, उसकी सफलता, समाज पर उसका सकारात्मक प्रभाव एवं अन्य क्षेत्रों में इसकी नींव की संभावनाओं पर फ़िल्म बननी चाहिए थी, ना कि किसी एक व्यक्ति की महिमामंडन पर। यह धारणा किसी व्यक्ति विशेष की छवि से इतर एक उत्कृष्ट शिक्षकों के टीम की बुनियाद, शिक्षक-छात्र के आपसी सामंजस्य, सामाजिक बदलाव और समाज के सफलता की कहानी है। जबकि श्री आनंद ने इसे मात्र अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि की तरह इस्तेमाल किया।
सर्वप्रथम श्री आनंद का यह दावा ही गलत है कि सुपर-30 की बुनियाद उन्होंने रखी थी, पूरा बिहार जानता है कि पूर्व पुलिस महानिदेशक श्री अभयानंद ही थे जिन्होंने इस सोच को उनके साथ साझा किया और तत्पश्चात सुपर-30 की नींव पड़ी। और श्री आनंद ने क्या किया, श्रेय देना तो दूर की बात है वो तो श्री अभयानंद का जिक्र भी नहीं करते।
हम बिहारियों के लिए यह गर्व की बात होगी कि बिहार जैसे ज्ञानस्थली से उपजी असीमित संभावनाओं एवं सामाजिक बदलाव लाने वाली 'सुपर-30' पर फ़िल्म बने, वैसे भी सम्पूर्ण विश्व को वंचित वर्गों के उत्थान के इस अभियान से रूबरू होना ही चाहिए और इसके लिए फ़िल्म एक सशक्त माध्यम है। फ़िल्म 'सुपर-30' धारणा की स्थापना, गठन की प्रक्रिया से शुरू होकर सफलता के माध्यम से एक सामाजिक संदेश देती हुई होनी चाहिए, ‘यदि समाज चाहे तो अपनी हर समस्या का निदान संयुक्त रूप से कर सकता है।'
जबकि अभी जो फ़िल्म निर्माणधीन है उसकी पृष्ठभूमि एक व्यक्ति विशेष कि कामयाबी का वर्णन मात्र है। इसलिए इस फ़िल्म पर आम बिहारियों का ऐतराज होना लाजमी है और हम इसके निर्माताओं / निर्देशक को समाज के तरफ से संदेश देना चाहते है कि फ़िल्म का सिर्फ व्यवसायिक दृष्टिकोण ना सोचें बल्कि हम सभी बिहारवासियों के अभिमान के पर्याय 'सुपर-30' को उचित मान-सम्मान दे। मुझे यकीन है की निर्माताओं / लेखक / निर्देशक ने इस विषय पर शोध ज़रूर किया होगा परन्तु कहीं न कहीं जमीनी स्तर पर शोध की कमी जान पड़ती है, वरना 'सुपर-30' जैसे क्रांतिकारी विचारधारा को एक व्यक्ति की कहानी के रूप में सिमटा देने की भूल कदापि नहीं करते। इसलिए अनुरोध है की 'मूल आत्मा' से छेड़-छाड़ कर हमारी भावनाएं आहत न करे।
श्री आनंद की नीयत व चरित्र पर संदेह निम्न कारणों से है:-
- सुपर-30 की सफ़लता एक उत्कृष्ट शिक्षकों के समूह का आपसी सामंजस्य की बानगी है इसलिए इसका श्रेय श्री आनंद के साथ सभी को भी मिलना चाहिए?
- उनका ज्यादातर वक़्त प्रदेश-देश-विदेशों में पुरस्कार अर्जित करने एवं भ्रमण पर गुजरता है तो वो सुपर-30 में गणित कब और कैसे पढ़ा लेते है?
- उनका यह दावा की उन्होंने गणित विषय में कुछ मौलिक शोध किया है जिसे कुछ विदेशी पत्रिकाओं ने प्रकाशित किया है। इन पत्रिकाओं से जब संपर्क किया गया तो उनका औपचारिक जवाब आया कि यह शोध कार्य नहीं है या उनका कोई आर्टिकल ही नहीं छपा है। जिस शोध के बल पर वो खुद को गणितज्ञ के रूप में प्रस्तुत करते है वो ही गलत है, इसका मतलब वो समाज को गुमराह करते आ रहे है। ऐसा क्यो?
- इतनी निर्धनता के बाबजूद कुछ दिन पूर्व एक स्थापित अखवार में छपी खबर से यह पता चलता है की श्री आनंद कुमार द्वारा काफी अचल संपत्ति (जमीन एवं मकान) का निबंधन करवाया गया है। ज्ञात हो कि अपने संयुक्त परिवार के वो एकमात्र आमदनी का जरिया है इसके पश्चात निबंधित अचल संपत्तियां के किये धन आया कहाँ से?
- 'रामानुजम स्कूल ऑफ मैथमेटिक्स' जो कि श्री आनंद के शिक्षण व्यवसाय का प्रमुख केंद्र है, से आज तक आईआईटी की प्रवेश परीक्षा में कितने छात्र सफल हुए इसकी सार्वजानिक जानकारी कहीं उपलब्ध नहीं है। जब श्री आनंद का पूरा समय सामाजिक कार्य यानि “Super-30” में लग जाता है तो दूसरी संस्थान जिसमे हजारों छात्र फीस देकर पढाई कर रहे हैं, का क्या औचित्य है? क्या इन दोनों संस्थानों में कोई आपसी संबंध है? अगर हाँ, तो क्या?
- आईआईटी-जेईई की प्रवेश परीक्षा के पूर्व सुपर-30 के परीक्षार्थियो की सूची क्यों नही जारी करते? साथ ही सफल बच्चों का दाखिला किन-किन आईआईटी कॉलेजों में हुआ है इसकी भी पूरी जानकारी कभी उपलब्ध नहीं कराया जाता है।
ये कुछ ऐसे सवाल है जिनके उत्तर हर कोई जानना चाहता है। श्री आनंद कुमार ने मीडिया के सामने आज तक सिर्फ उपलब्धियां बताई है वो भी बिना किसी साक्ष्य के, अपने ऊपर लगने वाले आरोपो का भी वो कोई जवाब नहीं देते है। शायद उनकी चुप्पी उनकी मौन स्वीकृति दिखाती है।"
अतः मैं विनम्रता पूर्वक प्रोड्यूसर रिलायंस एंटरटेनमेंट , निर्देशक श्री विकास बहल और मुख्य कलाकार श्री हृतिक रौशन जी से समस्त बिहारिवासीयों के तरफ से निवेदन करता हूं कि इस फिल्म के निर्माण को तुरंत रोका जाए एवं इसके पटकथा पर पूर्ण: रिसर्च के आधार पर विचार करे। किसी ऐसे वयक्ति को फिल्म के माध्यम से महिमामंडित ना करें जिनका दावा और आचरण ही संदेहास्पद है।
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Real Hero award function by Reliance 2008,
List of Awardees of Math Fest 2003 Programme in USA!
Super 30: True Or False?
HrithikRoshan, you better read what Super 30 co-founder has to say about Anand Kumar
‘HrithikRoshan should find out the truth himself’, says 'Super 30' co-founder
रितिक रोशन की फिल्म को बताया झूठ का पुलिंदा
सुपर 30 फेम आनंद का सोशल मीडिया पर कसा जा रहा तंज
सुपर-30 के आनंद को लालू जी के छूने पड़े पैर

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