Petition updateNo House Tax to GNN - We demand Civic Facilities for Rajnagar Extension & Ganga Jal SupplyThank you for your support, 1 request to you �
Amit Kumar TanwarGhaziabad, India
18 Jul 2020

My Dear Friends and Neighbours,

With folded hands, I would like to say THANK YOU for your support against Tax Notice of Ghaziabad Nagar Nigam.

This is a process which will take time and I request you to stay positive and focused,  We have waited for 10 years and we should keep trying through various means till the time, success is not achieved. 

One Request to you: Please ask 1 more person who lives on your floor or below or above to sign this petition. Engaged more if you wish... But 1 is minimum to start with. I think we all can ask 1 person and make them understand the importance of this petition. 

Read the story below to understand the importance of coming together. 

Regards

Amit Kumar Tanwar 

99103509999 

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Motivation

सवाल ये है कि सौ साल से भी पहले जन्मी (फ़रवरी 1913 में) स्त्री की कहानी कोई क्यों सुनना चाहेगा?

क्योंकि ये कहानी प्रासंगिक है।
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अमेरिका में रहने वाली ये स्त्री कोई रानी-महारानी भी नहीं थी। ये अश्वेत स्त्री थी, हम-आप जैसे साधारण भूरे-काले रंग की स्त्री। नहीं, नहीं! कोई चुनाव जीतकर प्रधानमंत्री-राष्ट्रपति बनी स्त्री की कहानी भी नहीं है। ये बिलकुल ही आम सी स्त्री की कहानी है, जो क्लर्क-सेक्रेटरी जैसी नौकरियां किया करती थी।

तो एक दिन हुआ यूँ कि रोज की तरह काम से लौटते वक्त इस स्त्री बस में चढ़ी और टिकट लेकर बैठने की जगह ढूँढने लगी। क्लीवलैंड बस सर्विस की ये बस उस दिन भी शाम के करीब छह बजे अपने रोज के रास्ते से जा रही थी। उस दौर में मोंट्गोमेरी की बस में कालों के लिए एक अलग सीट होती थी और गोरों के लिए अलग। धीरे धीरे गोरों के लिए अलग की गयी सीटें भर गयीं और बस अपने तीसरे स्टॉप पर एम्पायर थिएटर के सामने जा पहुंची जहाँ से कई गोरे लोग और भी बस में चढ़े।

बस के ड्राईवर जेम्स ऍफ़ ब्लेक ने देखा कि सीट न मिलने के कारण दो तीन गोरे खड़े हैं जबकि गोरों के लिए अरक्षित सीटों की ठीक पीछे वाली कतार में वो स्त्री और कुछ दूसरे लोग बैठे थे।

ड्राईवर ने गोरों के लिए आरक्षित का निशान दो सीट पीछे खिसका दिया और कालों को खड़े हो जाने कहा। बाकी के तीन लोग उठ खड़े हुए लेकिन उस स्त्री ने अपनी सीट छोड़ने से इंकार कर दिया!

ड्राईवर ने शायद तब तक “सविनय अवज्ञा” का नाम नहीं सुना था। उसने पुलिस बुलाने की धमकी दी, लेकिन वो स्त्री नहीं मानी तो नहीं मानी।

मोंट्गोमेरी सिटी कोड के कानूनों के मुताबिक उस स्त्री को गिरफ्तार कर लिया गया और उस शाम उनके एक मित्र ने उनकी जमानत करवाई। उस स्त्री का नाम रोजा पार्क्स था।

*सिर्फ उसके लिए, उसके शहर के लिए ही नहीं, पूरी दुनियां के लिए सन 1955 की वो शाम अनोखी थी।* बस की सीटें गोरों के लिए न छोड़ने की वजह से उससे पहले भी गिरफ्तारियां हुई थीं लेकिन रोजा पार्क्स की गिरफ़्तारी ने एक आन्दोलन शुरू कर दिया। अगले दिन जब पार्क्स पर मुकदमा चला तो उसे कानून तोड़ने का दोषी बताकर जुर्माना लगाया गया। रोजा ने अदालत की रंगभेद नीति को ही चुनौती दे डाली!

अगली 4 दिसम्बर को रविवार था और उस दिन तक चर्च, अख़बारों और दूसरे माध्यमों से मोंट्गोमेरी बस बायकाट शुरू हो चुका था। पांच दिसम्बर को जब पार्क्स का मुकदमा चलना था विमेंस पोलिटिकल कौंसिल 35000 पर्चे बाँट चुकी थी।

*इनपर लिखा था कि अगर आप छुट्टी ले सकते हैं तो छुट्टी लीजिये, पैदल चलिए, लेकिन सोमवार को बसों में न चढ़ें! उस दिन बारिश हो रही थी लेकिन करीब चालीस हज़ार की अश्वेत आबादी ने मोंट्गोमेरी की बसों का साफ़ बहिष्कार करके पैदल चलना चुना।*

रोजा पार्क्स का मुकदमा बहिष्कार आंदोलनों की शुरुआत नहीं थी। उसने सिर्फ प्रक्रिया को तेज कर दिया था।

...

*हमारा यह प्रयत्न भी ऐसा ही है, बहुत सारे प्रयत्नों में से एक। एक दिन अनोखा होगा और हम सभी उस दिन जश्न मना सकते है।*

उस जश्न के लिए, अपने अधिकारों के लिए लोगो को जगाना होगा।

*जब हम जागरुक हो जाएंगे तो वह एक सच्ची शुरुआत होगी, राजनगर एक्सटेंशन की खुशहाली के लिए और हम सभी के लिए।*

गाजियाबाद नगर निगम की हितलरशाही टैक्स डिमांड के खिलाफ, राजनगर एक्सटेंशन में civic facilities के लिए पेटिशन sign करे।

Link--- http://chng.it/rSytYC6p


जनता की आवाज बुलंद करे।
जय हिंद।

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