Ek kadam prithvi ke oor


Ek kadam prithvi ke oor
The Issue
एक कदम पृथ्वी की ओर
हमारी पृथ्वी अनमोल खजाना है, यह हमारे लिए अत्यधिक मूल्यवान है। आजकल मनुष्य इस खजाने का अत्यधिक उपयोग कर रहा है और अपने जीवन को प्रकाश की ओर से अंधकार की ओर आकर्षित कर रहा है।
हमारी पृथ्वी का अनमोल खजाना जल और वन हैं। आजकल मनुष्य दोनों का अत्यधिक उपयोग कर रहा है। इससे आने वाली नई पीढ़ी के लिए खतरा बन सकता है। अगर इसका सही इस्तेमाल और सोच-समझकर नहीं किया जाए, तो इस संसार का अंत करीब है।
जल ही हमारे जीवन का आधार है। जल के बिना हमारा जीवन असंभव है। "जल नहीं रहेगा तो वन नहीं रहेगा, वन नहीं रहेगा तो जीवन नहीं रहेगा।" आजकल हम अत्यधिक संसाधनों का उपयोग कर रहे हैं और जल व पर्यावरण को दूषित कर रहे हैं, जिसका परिणाम हमें अभी तो नहीं दिखेगा, लेकिन कुछ वर्षों बाद यह अत्यधिक भयानक होगा। जगह-जगह सूखा पड़ जाएगा, भुखमरी होने लगेगी, फसलें बर्बाद होने लगेंगी और पशु-पक्षियों के लिए भी खतरा बन सकता है। अगर हम इस पर ध्यान नहीं देंगे और निजी स्वार्थ के कारण प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण नहीं करेंगे, तो मनुष्य और जीव-जंतुओं का अंत निश्चित है। इसलिए हमें अपनी पृथ्वी के लिए बहुत कुछ करना होगा। आइए, "एक कदम पृथ्वी की ओर" मिशन में शामिल होकर संसाधनों और जीवन को सुरक्षित करें तथा जनता को जागरूक करें।
मिशन: एक कदम पृथ्वी की ओर
मैं मिशन की शुरुआत जल जागरूकता मिशन के साथ करना चाहता हूं। जल जागरूकता मिशन 2025 के अंतर्गत हमें जल का उपयोग कम से कम करना चाहिए। हम अशुद्ध जल को शुद्ध करके पुनः उपयोग में ला सकते हैं। शुद्ध प्राकृतिक जल का उपयोग केवल पीने और अपने दैनिक कार्यों के लिए करें। मशीनों द्वारा शुद्ध किए गए जल और वर्षा के जल का उपयोग कृषि के लिए किया जा सकता है। इससे प्राकृतिक रूप से शुद्ध जल का उपयोग कम से कम होगा।
मिशन: एक परिवार, एक पेड़
इस मिशन पर हमें अत्यधिक ध्यान देना चाहिए क्योंकि आजकल वायुमंडल में विभिन्न प्रकार की हानिकारक गैसें हैं, जिनके कारण पृथ्वी का तापमान दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है। अगर इस मिशन पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वायुमंडलीय तापमान के कारण जीवन जीना असंभव हो जाएगा।
अगर प्रत्येक परिवार एक वृक्ष लगाए, तो हमारे देश में लाखों वृक्ष लगाए जा सकते हैं। इससे वायुमंडलीय तापमान नियंत्रित होगा, हमें शुद्ध ऑक्सीजन मिलेगी और पशु-पक्षियों को रहने के लिए आवास भी मिल जाएगा। हमें न केवल अपने लिए बल्कि पशु-पक्षियों के लिए भी सोचना चाहिए, क्योंकि हमारे खाद्य श्रृंखला में वे भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अगर पशु-पक्षी नहीं रहेंगे, तो मानव जीवन का अंत करीब होगा। इसलिए हमें उनका भी ध्यान रखना चाहिए।
हमें अपने गांव में एक तालाब खुदवाकर उसमें पानी भरना चाहिए, ताकि पशु-पक्षी और अन्य जानवर जाकर अपनी प्यास बुझा सकें।
यह बहुत ही दुखद है कि हम भारतवासी इस मिशन में एकजुट नहीं हो पाते। कुछ लोग इस मिशन को हल्के में लेंगे। इसलिए मैं भारत सरकार से अपील करता हूं कि "एक परिवार, एक पेड़" मिशन के अंतर्गत जो परिवार पेड़ लगाए और उसकी देखभाल करे, उन्हें विशेष प्रकार की पेंशन दी जाए, ताकि लोग इस मिशन की ओर अधिक आकर्षित हों। इसी तरह, हमारे देश में कई और मिशन लाए जाएं, जिससे हमारी पृथ्वी को शुद्ध वातावरण मिल सके।
मुझे विश्वास है कि इस मिशन में आप सभी लोग अत्यधिक सहयोग करेंगे और इसे हमारे देश के युवा तथा छोटे बच्चे संपूर्ण कर सकते हैं।
तो चलिए, एक दिन पृथ्वी को बच्चों के हाथों में सौंप दें।
आपका शुभचिंतक
अभय मौर्या
ग्राम: भुजेहुआं, पोस्ट: सौना, जिला: गाजीपुर
Email ID: compu
terabhaymaurya@gmail.com
1
The Issue
एक कदम पृथ्वी की ओर
हमारी पृथ्वी अनमोल खजाना है, यह हमारे लिए अत्यधिक मूल्यवान है। आजकल मनुष्य इस खजाने का अत्यधिक उपयोग कर रहा है और अपने जीवन को प्रकाश की ओर से अंधकार की ओर आकर्षित कर रहा है।
हमारी पृथ्वी का अनमोल खजाना जल और वन हैं। आजकल मनुष्य दोनों का अत्यधिक उपयोग कर रहा है। इससे आने वाली नई पीढ़ी के लिए खतरा बन सकता है। अगर इसका सही इस्तेमाल और सोच-समझकर नहीं किया जाए, तो इस संसार का अंत करीब है।
जल ही हमारे जीवन का आधार है। जल के बिना हमारा जीवन असंभव है। "जल नहीं रहेगा तो वन नहीं रहेगा, वन नहीं रहेगा तो जीवन नहीं रहेगा।" आजकल हम अत्यधिक संसाधनों का उपयोग कर रहे हैं और जल व पर्यावरण को दूषित कर रहे हैं, जिसका परिणाम हमें अभी तो नहीं दिखेगा, लेकिन कुछ वर्षों बाद यह अत्यधिक भयानक होगा। जगह-जगह सूखा पड़ जाएगा, भुखमरी होने लगेगी, फसलें बर्बाद होने लगेंगी और पशु-पक्षियों के लिए भी खतरा बन सकता है। अगर हम इस पर ध्यान नहीं देंगे और निजी स्वार्थ के कारण प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण नहीं करेंगे, तो मनुष्य और जीव-जंतुओं का अंत निश्चित है। इसलिए हमें अपनी पृथ्वी के लिए बहुत कुछ करना होगा। आइए, "एक कदम पृथ्वी की ओर" मिशन में शामिल होकर संसाधनों और जीवन को सुरक्षित करें तथा जनता को जागरूक करें।
मिशन: एक कदम पृथ्वी की ओर
मैं मिशन की शुरुआत जल जागरूकता मिशन के साथ करना चाहता हूं। जल जागरूकता मिशन 2025 के अंतर्गत हमें जल का उपयोग कम से कम करना चाहिए। हम अशुद्ध जल को शुद्ध करके पुनः उपयोग में ला सकते हैं। शुद्ध प्राकृतिक जल का उपयोग केवल पीने और अपने दैनिक कार्यों के लिए करें। मशीनों द्वारा शुद्ध किए गए जल और वर्षा के जल का उपयोग कृषि के लिए किया जा सकता है। इससे प्राकृतिक रूप से शुद्ध जल का उपयोग कम से कम होगा।
मिशन: एक परिवार, एक पेड़
इस मिशन पर हमें अत्यधिक ध्यान देना चाहिए क्योंकि आजकल वायुमंडल में विभिन्न प्रकार की हानिकारक गैसें हैं, जिनके कारण पृथ्वी का तापमान दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है। अगर इस मिशन पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वायुमंडलीय तापमान के कारण जीवन जीना असंभव हो जाएगा।
अगर प्रत्येक परिवार एक वृक्ष लगाए, तो हमारे देश में लाखों वृक्ष लगाए जा सकते हैं। इससे वायुमंडलीय तापमान नियंत्रित होगा, हमें शुद्ध ऑक्सीजन मिलेगी और पशु-पक्षियों को रहने के लिए आवास भी मिल जाएगा। हमें न केवल अपने लिए बल्कि पशु-पक्षियों के लिए भी सोचना चाहिए, क्योंकि हमारे खाद्य श्रृंखला में वे भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अगर पशु-पक्षी नहीं रहेंगे, तो मानव जीवन का अंत करीब होगा। इसलिए हमें उनका भी ध्यान रखना चाहिए।
हमें अपने गांव में एक तालाब खुदवाकर उसमें पानी भरना चाहिए, ताकि पशु-पक्षी और अन्य जानवर जाकर अपनी प्यास बुझा सकें।
यह बहुत ही दुखद है कि हम भारतवासी इस मिशन में एकजुट नहीं हो पाते। कुछ लोग इस मिशन को हल्के में लेंगे। इसलिए मैं भारत सरकार से अपील करता हूं कि "एक परिवार, एक पेड़" मिशन के अंतर्गत जो परिवार पेड़ लगाए और उसकी देखभाल करे, उन्हें विशेष प्रकार की पेंशन दी जाए, ताकि लोग इस मिशन की ओर अधिक आकर्षित हों। इसी तरह, हमारे देश में कई और मिशन लाए जाएं, जिससे हमारी पृथ्वी को शुद्ध वातावरण मिल सके।
मुझे विश्वास है कि इस मिशन में आप सभी लोग अत्यधिक सहयोग करेंगे और इसे हमारे देश के युवा तथा छोटे बच्चे संपूर्ण कर सकते हैं।
तो चलिए, एक दिन पृथ्वी को बच्चों के हाथों में सौंप दें।
आपका शुभचिंतक
अभय मौर्या
ग्राम: भुजेहुआं, पोस्ट: सौना, जिला: गाजीपुर
Email ID: compu
terabhaymaurya@gmail.com
1
Petition Updates
Share this petition
Petition created on 15 March 2025