

दिव्यांग जन अधिकार अधिनियम-2016 की धारा 89, 92, 93 में संशोधन के प्रस्ताव को वापस लें -DHF
The Issue
श्री निदेशक
दिव्यांग सशक्तिकरण विभाग
(समाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय) के संबंद्ध पत्र http://disabilityaffairs.gov.in/content/Decriminalisation.docx के द्वारा दिव्यांग जन अधिकार अधिनियम- 2016 (RPwD Act-2016) की धारा 89, 92 एवं 93 को संशोधित करने 95A बनाये जाने का प्रस्ताव हेतु जो सुझाव आपत्ति मांगी गई हैं । उन्ही के क्रम में अवगत कराया जाता है कि यह विचार भी बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं । धारा 89, 92, 93 दिव्यांग जन अधिकार अधिनियम का सबसे मजबूत भाग हैं । जो विकलांगता ग्रसित जनों को सामाजिक सुरक्षा, निजी संरक्षण आदि प्रदान करता हैं । उन्हें कानूनी अधिकार देता हैं । साथ ही इस धारा में लिखे प्रवाधानों से दिव्यांग जनों को सुरक्षा का अहसास होता हैं । श्रीमान एक तो पहले भी इस अधिनियम का क्रियान्वयन, प्रचार-प्रसार प्रारंभ भी नहीं हो पाया हैं की संशोधन का विचार विभाग तक पहुंचा दिया गया हैं । आज भी अधिकांश दिव्यांग जन इस अधिनियम के बारे में अच्छे से नही जानते, दिव्यांग जनों के और सशक्तिकरण, सुरक्षित बनाने के बजाय सरकार जो कानून लागू हैं उसे भी संशोधित करने जा रही हैं । ये बेहद भेदभाव पूर्ण और अप्रसंसनीय हैं । सजा का प्रवाधान हटने से ये एक्ट सिर्फ एक कागज का पुलिदा ही रह जायेगा । हम देश भर के दिव्यांग जन, सामाजिक संगठन आपसे आग्रह करते हैं कि इस प्रस्ताव को वापस लिया जाएँ और RPwD Act- 2016 की मूलभावना के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ न कि जाएं । धारा 89 ,92 व 93 को यथोस्थिति बनाये रखा जाएं और संशोधन लाना हैं तो सजा और जुर्माने को और भी सख्त करने, सामाजिक न्याय, राजनीतिक भागीदारी को लाने, दिव्यांग जनों के लिए संवैधानिक अधिकारों से परिपूर्ण 'राष्ट्रीय दिव्यांग जन आयोग' के गठन आदि को लेकर लाया जाएं ।
धन्यवाद !
~ (पं.) विकास शर्मा, राष्ट्रीय अध्यक्ष, डिसएबल्ड हेल्पलाइन फाउंडेशन, इंडिया +91-9818630988
एवं समस्त दिव्यांग जन भारत वर्ष

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श्री निदेशक
दिव्यांग सशक्तिकरण विभाग
(समाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय) के संबंद्ध पत्र http://disabilityaffairs.gov.in/content/Decriminalisation.docx के द्वारा दिव्यांग जन अधिकार अधिनियम- 2016 (RPwD Act-2016) की धारा 89, 92 एवं 93 को संशोधित करने 95A बनाये जाने का प्रस्ताव हेतु जो सुझाव आपत्ति मांगी गई हैं । उन्ही के क्रम में अवगत कराया जाता है कि यह विचार भी बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं । धारा 89, 92, 93 दिव्यांग जन अधिकार अधिनियम का सबसे मजबूत भाग हैं । जो विकलांगता ग्रसित जनों को सामाजिक सुरक्षा, निजी संरक्षण आदि प्रदान करता हैं । उन्हें कानूनी अधिकार देता हैं । साथ ही इस धारा में लिखे प्रवाधानों से दिव्यांग जनों को सुरक्षा का अहसास होता हैं । श्रीमान एक तो पहले भी इस अधिनियम का क्रियान्वयन, प्रचार-प्रसार प्रारंभ भी नहीं हो पाया हैं की संशोधन का विचार विभाग तक पहुंचा दिया गया हैं । आज भी अधिकांश दिव्यांग जन इस अधिनियम के बारे में अच्छे से नही जानते, दिव्यांग जनों के और सशक्तिकरण, सुरक्षित बनाने के बजाय सरकार जो कानून लागू हैं उसे भी संशोधित करने जा रही हैं । ये बेहद भेदभाव पूर्ण और अप्रसंसनीय हैं । सजा का प्रवाधान हटने से ये एक्ट सिर्फ एक कागज का पुलिदा ही रह जायेगा । हम देश भर के दिव्यांग जन, सामाजिक संगठन आपसे आग्रह करते हैं कि इस प्रस्ताव को वापस लिया जाएँ और RPwD Act- 2016 की मूलभावना के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ न कि जाएं । धारा 89 ,92 व 93 को यथोस्थिति बनाये रखा जाएं और संशोधन लाना हैं तो सजा और जुर्माने को और भी सख्त करने, सामाजिक न्याय, राजनीतिक भागीदारी को लाने, दिव्यांग जनों के लिए संवैधानिक अधिकारों से परिपूर्ण 'राष्ट्रीय दिव्यांग जन आयोग' के गठन आदि को लेकर लाया जाएं ।
धन्यवाद !
~ (पं.) विकास शर्मा, राष्ट्रीय अध्यक्ष, डिसएबल्ड हेल्पलाइन फाउंडेशन, इंडिया +91-9818630988
एवं समस्त दिव्यांग जन भारत वर्ष

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Petition created on 8 July 2020