मिलावट का हो अंत: साफ और सुरक्षित आहार, हर भारतीय का है अधिकार

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मैं अपनी सेहत को बहुत गंभीरता से लेती हूँ लेकिन फिर भी उसे बहुत बड़ा खतरा है।

योग से दिन की शुरुआत करना, मैराथन दौड़ना, रोज़ एक्सरसाइज़ करना और अपने खान-पान का ख्याल रखने के बावजूद भी मैं पूरी तरह स्वास्थ नहीं हो सकती। मेरी तरह लाखों-करोड़ों भारतीय कई तरह की बीमारियों, हर्ट-अटैक और यहाँ तक की कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी के शिकार बन सकते हैं। और वो भी बिना हमारी किसी गलती के।

इसका कारण है मिलावट--एक ऐसी समस्या जिससे शहर तो क्या गाँव भी नहीं बचे। एक ऐसी समस्या जिस पर पूरे देश को गंभीर होना चाहिए था, पर शायद ही कोई इसपर बात करता है। नेताओं को क्या दोष देना, आम नागरिक भी अपनी सेहत से जुड़े इतने गंभीर मुद्दे पर शायद ही चिंता जताते हैं।

मैंने ये पटीशन शुरू की है ताकि मिलावट के खिलाफ एक जन अभियान छिड़े। मेरी पेटीशन पर हस्ताक्षर करें ताकि इसके खिलाफ ठोस कदम उठाए जाएं।

आपने हिंदी में वो कहावत पढ़ी होगी--दाल में कुछ काला है पर अब ऐसा समय आ गया है कि हमारी दाल, हमारा चावल, फल-सब्ज़ियां सब काले पड़ गए हैं। ऊपर से देखने में सब चमकदार हैं पर वो हमारी सेहत को नुकसान पहुँचा रहे हैं। सच कहूँ तो मुझे ये भी नहीं पता कि बज़ार में ऐसी कौन सी चीज़ है, जिसमें मिलावट नहीं होती है।

सब्ज़ियों में कलर डालना, फलों में इंजेक्शन लगाकर उन्हें पकाना, खाने का तेल, इत्यादि सब में मिलावट होती है। यहाँ तक कि दूध, जो हम बड़े चाव से अपने बच्चों को पिलाते हैं, वो दूध भी अब सुरक्षित नहीं।

आपको लग रहा होगा कि मैं बात को बहुत बढ़ा-चढ़ा कर लिख रही हूँ, पर मैं केवल सच लिख रही हूँ। अगर आपको मेरी बातों पर भरोसा नहीं तो विज्ञान एवं प्रौद्दोगिकी मंत्री, हर्षवर्धन जी का 2016 में लेकसभा में दिया बयान पढ़िए। वो आपकी आँखें खोल देगा।

उन्होंने बताया कि देश में 3 में से 2 लोग डिटेर्जेंट, यूरिया, कॉस्टिक सोडा और पेंट मिला दूध पीते हैं। देश में बिकने वाला 68.7% दूध खाद्द नियंत्रक संस्था एफएसएसआई (FSSAI) के मापदंडों पर खरा नहीं उतरता है।

आम नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा में एफएसएसआई (FSSAI) एक अहम भूमिका निभाती है और खाद्द पदार्थों में मिलावट के खिलाफ कदम उठाती है। पर एफएसएसआई (FSSAI) कैसे जनता की समस्याओं को सुलझाएगी जब वो खुद संसाधनों और कर्मचारियों की कमी से जूझेगी। समय आ गया है कि एफएसएसआई (FSSAI) को और शक्ति दी जाए।

इस वक्त की सबसे बड़ी जरूरत ये है कि मिलावट के खिलाफ एक जन-अभियान शुरू किया जाए। स्वच्छ भारत के साथ-साथ स्वच्छ खान-पान पर भी ज़ोर दिया जाए ताकि भारत का हर नागरिक स्वस्थ हो।

मेरी पेटीशन पर हस्ताक्षर करें और आइये मेरे साथ मिलकर सभी राजनीतिक दलों से कहें कि यदि वो 2019 में सत्ता में आते हैं तो हमारी इन माँगों पर ठोस कदम उठाएं:

1. फल तथा सब्ज़ियों को केमिकल से पकाना और दूध में मिलावट करना पूरी तरह से गैर-कानूनी हो और इसके लिए सख्त से सख्त सज़ा का प्रावधान हो।
2. फल, सब्ज़ी विक्रेताओं, होटलों और खान-पान की अन्य जगहों को मिलावट के ऊपर सख्त निर्देश जारी हों।
3. एफएसएसआई (FSSAI) को खाद्य पदार्थ की बेहतर जाँच के लिए नई तकनीक और बेहतर उपकरण मुहैया कराए जाएं।
4. फूड इंस्पेक्टर  और ऐनेलिस्ट के रिक्त पदों को तत्कालीन भरा जाए।
5. एफएसएसआई (FSSAI) के आदेशों और निर्देशों का सख्ती से पालन हो।
6. उल्लंघन करने वालों को भारी जुर्माना और बार-बार ऐसा करने वालों का लाइसेंस रद्द किया जाए।

समय आ गया है कि देश के सभी राजनीतिक दल एकजुट होकर इस गंभीर समस्या को सुलझाने की ओर एक बड़ा कदम उठाएं। वैसे इस समस्या से तो वो भी अछूते नहीं हैं, उनकी चाय के कप में भी मिलावट वाला दूध मौजूद होगा।

2018 में हम और आप ने बहुत सारे नेताओं, सेलेब्रिटीज़ को उनके फिटनेस वीडियो और मैसेज अपलोड करते देखा। वक्त आ गया है कि वो मिलावट के खिलाफ भी वीडियो अपलोड करें और इसे भी वायरल करें ताकि हर भारतीय इस समस्या से अवगत हो। नेताओं को चाहिए कि वो इसे अपनी पार्टी के घोषणापत्रों में जगह दें, अपनी रैलियों में इसपर बात करें और संसद में भी इसपर चर्चा करें।

मेरे साथ दीजिए और मिलावट के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद करिए। हस्ताक्षर करें और कहें कि अब #DaalMeKala नहीं चलेगा। #SafeFood 

 
#SheVotes2019



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