Save plants save River - Jaago! Kshipra Pukare
Save plants save River - Jaago! Kshipra Pukare
समस्या
उद्देश्य /purpose of petition
- वैश्विक /राष्ट्रीय /स्थानीय भूजल के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु ।
- पवित्र नदी क्षिप्रा को सदानीरा, प्रवाहमान एवं आत्मनिर्भर बनाने हेतु।
विवरण /detail
सर्व विदित है उज्जैन की क्षिप्रा नदी उन पवित्र नदियों में से एक है जहाँ प्रत्येक 12 वर्ष में कुंभ / सिंहस्थ का आयोजन सैकड़ों वर्षों से होता आ रहा है। इस आयोजन में क्षिप्रा नदी में स्नान करने हेतु विश्व भर से श्रद्धालु आते हैं। दुर्भाग्य एवं मानवीय गलतियों की वजह से पिछले 3 सिंहस्थ से क्षिप्रा नदी श्रद्धालुओं को स्वयं के जल से स्नान कराने की स्थिति में नहीं रही।
संतों एवं समाज के जागरूक पर्यावरण प्रेमियों की पहल पर इसके पुनरुध्दार के लिए 2016 में प्रयास प्रारंभ किए गए। इन प्रयासों में वन विभाग को स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों को साथ लेकर क्षिप्रा के catchment एरिया में पौधारोपण का कार्य प्रारंभ किया गया। विगत तीन वर्षों में (2016, 17,18) में डेढ़ लाख पौधें रोपे गए। सबके सामुहिक प्रयासों से आज ये पौधें वृक्ष बन चुके हैं।
वर्ष 2018 में उज्जैन में sewerage लाइन डालने की योजना प्रारंभ की गई। तत्कालीन राजस्व कमिश्नर एवं कलेक्टर को वन विभाग एवं पर्यावरणविदों द्वारा पौधारोपण क्षेत्र का अवलोकन कराया गया। साथ ही उनसे आग्रह किया गया कि sewerage लाइन इस क्षेत्र से ना डाली जाए। पूरे क्षेत्र का अवलोकन करने के उपरांत कलेक्टर ने संबंधित विभाग को साफ़ निर्देश दिए कि pipeline नदी से 200 मीटर दूर / पौधों को संरक्षित रखते हुए /बाढ़ क्षेत्र से बाहर ही डाली जाए। वर्तमान में यह लाइन का कुछ भाग नदी के 30 मीटर /पौधारोपण /बाढ़ क्षेत्र में डाला जा रहा है। जिससे हजारों की संख्या में पेड़ नष्ट होंगे, बाढ़ क्षेत्र में होने से मिट्टी का कटाव होगा और पूरी लाइन बह जाने का संकट भी बना रहेगा। इससे नदी के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु जो कार्य किए गए हैं, उनका कोई औचित्य नहीं रह जाएगा। तीन साल तक जो भावनात्मक रूप से समाज ने सहभागिता की है, वह आहत होगी। भविष्य में समाज ऐसे कार्यों में सहभागिता करने में कतरायेगा।
अतः आग्रह है कि सर्वप्रथम sewerage लाइन के मार्ग से नदी का संरक्षण संवर्धन बाधित ना हो ऐसा प्लान तैयार किया जाए। साथ ही इस प्लान मे सबसे बड़ी और गंभीर त्रुटि यह है कि आज की सात लाख की आबादी द्वारा उपयोग किए गए घरेलु पानी का उज्जैन शहर में रीसाइकल/ reuse के बारे में विचार नहीं किया गया है, जिससे करोड़ों-अरबों लीटर पानी प्रतिदिन जो अन्य उपयोग (उद्योग, निर्माण कार्य इत्यादि) मे लिया जा सकता था उससे भी उज्जैन नगर वंचित रह जाएगा। इस प्रकार वर्तमान में जिन पेड़ों से भूजल स्तर को सुधारने का प्रयास हो रहा है उसे धक्का लगेगा, साथ ही शहर की अन्य आवश्यकताओं जैसे उद्योगों एवं निर्माण कार्य इत्यादि में लगने वाले जल की अपूर्ति भी भूजल के अत्याधिक दोहन से की जा रही है जिससे निश्चित ही भविष्य में भयंकर जल संकट से शहर का सभी वर्ग प्रभावित होगा।
अतः सभी से विनम्र अनुरोध है कि हमारे अभियान को सफल बनाने के लिए ज्यादा से ज्यादा लोग petition sign कर पर्यावरण, वृक्ष एवं क्षिप्रा नदी के संरक्षण के सहभागी बने।
धन्यवाद् �।
समस्या
उद्देश्य /purpose of petition
- वैश्विक /राष्ट्रीय /स्थानीय भूजल के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु ।
- पवित्र नदी क्षिप्रा को सदानीरा, प्रवाहमान एवं आत्मनिर्भर बनाने हेतु।
विवरण /detail
सर्व विदित है उज्जैन की क्षिप्रा नदी उन पवित्र नदियों में से एक है जहाँ प्रत्येक 12 वर्ष में कुंभ / सिंहस्थ का आयोजन सैकड़ों वर्षों से होता आ रहा है। इस आयोजन में क्षिप्रा नदी में स्नान करने हेतु विश्व भर से श्रद्धालु आते हैं। दुर्भाग्य एवं मानवीय गलतियों की वजह से पिछले 3 सिंहस्थ से क्षिप्रा नदी श्रद्धालुओं को स्वयं के जल से स्नान कराने की स्थिति में नहीं रही।
संतों एवं समाज के जागरूक पर्यावरण प्रेमियों की पहल पर इसके पुनरुध्दार के लिए 2016 में प्रयास प्रारंभ किए गए। इन प्रयासों में वन विभाग को स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों को साथ लेकर क्षिप्रा के catchment एरिया में पौधारोपण का कार्य प्रारंभ किया गया। विगत तीन वर्षों में (2016, 17,18) में डेढ़ लाख पौधें रोपे गए। सबके सामुहिक प्रयासों से आज ये पौधें वृक्ष बन चुके हैं।
वर्ष 2018 में उज्जैन में sewerage लाइन डालने की योजना प्रारंभ की गई। तत्कालीन राजस्व कमिश्नर एवं कलेक्टर को वन विभाग एवं पर्यावरणविदों द्वारा पौधारोपण क्षेत्र का अवलोकन कराया गया। साथ ही उनसे आग्रह किया गया कि sewerage लाइन इस क्षेत्र से ना डाली जाए। पूरे क्षेत्र का अवलोकन करने के उपरांत कलेक्टर ने संबंधित विभाग को साफ़ निर्देश दिए कि pipeline नदी से 200 मीटर दूर / पौधों को संरक्षित रखते हुए /बाढ़ क्षेत्र से बाहर ही डाली जाए। वर्तमान में यह लाइन का कुछ भाग नदी के 30 मीटर /पौधारोपण /बाढ़ क्षेत्र में डाला जा रहा है। जिससे हजारों की संख्या में पेड़ नष्ट होंगे, बाढ़ क्षेत्र में होने से मिट्टी का कटाव होगा और पूरी लाइन बह जाने का संकट भी बना रहेगा। इससे नदी के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु जो कार्य किए गए हैं, उनका कोई औचित्य नहीं रह जाएगा। तीन साल तक जो भावनात्मक रूप से समाज ने सहभागिता की है, वह आहत होगी। भविष्य में समाज ऐसे कार्यों में सहभागिता करने में कतरायेगा।
अतः आग्रह है कि सर्वप्रथम sewerage लाइन के मार्ग से नदी का संरक्षण संवर्धन बाधित ना हो ऐसा प्लान तैयार किया जाए। साथ ही इस प्लान मे सबसे बड़ी और गंभीर त्रुटि यह है कि आज की सात लाख की आबादी द्वारा उपयोग किए गए घरेलु पानी का उज्जैन शहर में रीसाइकल/ reuse के बारे में विचार नहीं किया गया है, जिससे करोड़ों-अरबों लीटर पानी प्रतिदिन जो अन्य उपयोग (उद्योग, निर्माण कार्य इत्यादि) मे लिया जा सकता था उससे भी उज्जैन नगर वंचित रह जाएगा। इस प्रकार वर्तमान में जिन पेड़ों से भूजल स्तर को सुधारने का प्रयास हो रहा है उसे धक्का लगेगा, साथ ही शहर की अन्य आवश्यकताओं जैसे उद्योगों एवं निर्माण कार्य इत्यादि में लगने वाले जल की अपूर्ति भी भूजल के अत्याधिक दोहन से की जा रही है जिससे निश्चित ही भविष्य में भयंकर जल संकट से शहर का सभी वर्ग प्रभावित होगा।
अतः सभी से विनम्र अनुरोध है कि हमारे अभियान को सफल बनाने के लिए ज्यादा से ज्यादा लोग petition sign कर पर्यावरण, वृक्ष एवं क्षिप्रा नदी के संरक्षण के सहभागी बने।
धन्यवाद् �।
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22 नवंबर 2019 पर पेटीशन बनाई गई